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जन सेवा के 25 साल: पोरबंदर से पीएफआई तक, पीएम मोदी ने ऐसे गढ़ा ‘जीरो टॉलरेंस’ सुरक्षा मॉडल

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किसी भी संप्रभु राष्ट्र के सामाजिक उत्थान और आर्थिक समृद्धि की पहली पूर्वशर्त मजबूत आंतरिक सुरक्षा तथा निष्पक्ष विधि का शासन है। 7 अक्टूबर 2001 को जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में दायित्व संभाला था, तब से लेकर वर्ष 2026 में जन सेवा के 25 वर्ष पूरे होने तक, उनका शासन मॉडल आंतरिक सुरक्षा को सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता देने के लिए जाना जाता है। पूर्ववर्ती शासनकालों में जिस प्रकार वोट बैंक की राजनीति और तुष्टीकरण के दबाव में राज्य सत्ता संगठित अपराधियों और राष्ट्रविरोधी ताकतों के सामने लाचार दिखाई देती थी, उसे समाप्त कर नरेंद्र मोदी ने अपराध और आतंकवाद के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ का एक ऐसा व्यावहारिक मॉडल स्थापित किया है जिसने भारत की सुरक्षा नीति की दिशा बदल दी है।

गुजरात मॉडल: संगठित अपराध पर प्रहार और दंगामुक्त परिवेश
वर्ष 2001 से पहले गुजरात की स्थिति संगठित गिरोहों और तटीय तस्करी के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील मानी जाती थी। पोरबंदर के बंदरगाहों से लेकर अहमदाबाद तक आपराधिक सिंडिकेट सक्रिय थे, सीमा पार से नशीले पदार्थों व हथियारों की तस्करी के मार्ग खुले थे और सांप्रदायिक तनाव विकास में सबसे बड़ा अवरोधक बन चुका था। मुख्यमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को राजनीतिक हस्तक्षेप से पूरी तरह मुक्त कर कर्तव्य निर्वहन की पूर्ण स्वायत्तता दी। संगठित अपराध की जड़ें काटने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कानूनी आधार तैयार किया, जिसके चलते आगे चलकर ‘गुजसीटोक’ (GUJCTOC) जैसा कड़ा कानून अस्तित्व में आया। तटीय सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया और गैरकानूनी गतिविधियों पर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई हुई। इसका परिणाम यह निकला कि गुजरात में लगातार दो दशकों से अधिक समय तक शांति व्यवस्था कायम रही, जिसने ‘वाइब्रेंट गुजरात’ और राज्य की औद्योगिक क्रांति की मजबूत जमीन तैयार की।

राष्ट्रीय सुरक्षा नीति: कमजोर डोजियर नीति का अंत और एनआईए का 95% दोषसिद्धि रिकॉर्ड
वर्ष 2014 में देश की बागडोर संभालने के उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी सुरक्षा दृष्टिकोण को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी बनाया। 2014 से पूर्व दिल्ली, मुंबई, जयपुर, वाराणसी और हैदराबाद जैसे शहरों के व्यस्त बाजारों में आए दिन सीरियल बम धमाके होना आम बात थी, जिस पर तत्कालीन सत्ता का रुख केवल निंदा और कागजी डोजियर भेजने तक सिमट जाता था। मोदी सरकार ने इस रणनीतिक हिचकिचाहट को समाप्त कर आतंकवाद पर कड़ा प्रहार किया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को स्वतंत्र कानूनी अधिकार और अतिरिक्त शाखाएं दी गईं, जिसके चलते एजेंसी का दोषसिद्धि दर लगभग 95 प्रतिशत के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। यूएपीए में संशोधन कर आतंकियों को व्यक्तिगत स्तर पर सीधे नामजद करने का प्रावधान हुआ और हवाला तंत्र पर सख्त कार्रवाई की गई, जिसके चलते आज सामान्य नागरिक इलाकों में बम धमाकों का दौर इतिहास बन चुका है।

अनुच्छेद 370 समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर में 2.35 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन
देश की एकता और अखंडता की दिशा में सबसे ऐतिहासिक कदम 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35ए को निष्प्रभावी करना रहा। दशकों से तुष्टीकरण की नीतियों के चलते कश्मीर घाटी में अलगाववाद और पथराव की घटनाओं को खुला संरक्षण मिलता था। मोदी सरकार ने इस विशेषाधिकार को समाप्त कर कानून का समान राज स्थापित किया। अलगाववादी तंत्र के वित्तीय स्रोतों पर पूर्ण रोक लगने के बाद घाटी में शांति का नया दौर शुरू हुआ, जिसका प्रमाण यह है कि पर्यटन मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों का आगमन 2020 के 25.19 लाख से बढ़कर 2024-2025 में 2.35 करोड़ के पार पहुंच गया। इसी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए देश के भीतर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और राष्ट्रविरोधी नेटवर्क खड़ा करने वाले संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उसके सहयोगी संगठनों पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाकर उसके पूरे बुनियादी ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया।

पूर्वोत्तर में ऐतिहासिक शांति: 10,800 से अधिक उग्रवादियों का आत्मसमर्पण और दर्जनों समझौते
आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के क्रम में पूर्ववर्ती सरकारों की उपेक्षा का शिकार रहे पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद का स्थायी समाधान निकाला गया। केंद्र सरकार ने बोडो, ब्रू-रियांग, कार्बी आंगलोंग, दिमासा और उल्फा जैसे प्रमुख विद्रोही समूहों के साथ 12 से अधिक ऐतिहासिक शांति समझौते संपन्न किए हैं। गृह मंत्रालय की रिपोर्टों के अनुसार, इन शांति समझौतों के फलस्वरूप अब तक 10,800 से अधिक उग्रवादियों ने अपने हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में वापसी की है। पूर्वोत्तर में सुरक्षा स्थिति में आए अभूतपूर्व सुधार के चलते अधिकांश क्षेत्रों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) को पूरी तरह या आंशिक रूप से हटा लिया गया है। सीमा विवादों के समाधान और बुनियादी ढांचे के तेज विकास ने पूर्वोत्तर को हिंसा के दौर से निकालकर स्थाई शांति और प्रगति के नए युग में पहुंचा दिया है।

नक्सलवाद पर अंतिम प्रहार: प्रभावित जिले 126 से घटकर मात्र 11, रेड कॉरिडोर का अंत निकट
देश के विभिन्न हिस्सों में दशकों से विकास और शांति में बाधा बने वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) के विरुद्ध मोदी सरकार ने निर्णायक और चौतरफा रणनीति अपनाई है। गृह मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में जहां देश के 126 जिले नक्सल हिंसा से प्रभावित थे, वहीं वर्ष 2026 तक यह संख्या सिमटकर मात्र 11 रह गई है, तथा सर्वाधिक प्रभावित जिले 36 से घटकर केवल 3 बचे हैं। सुरक्षा बलों द्वारा सुदूर वनांचलों में 400 से अधिक नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों का दायरा पूरी तरह सिमट गया है। आधुनिक सड़कों के निर्माण, मोबाइल टावर नेटवर्क के विस्तार और विकास योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाकर मार्च 2026 की तय समयसीमा के भीतर ‘रेड कॉरिडोर’ को हमेशा के लिए समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता हासिल की गई है।

नए आपराधिक कानून: 160 वर्ष पुराने कानूनों का अंत और आधुनिक न्याय प्रणाली
देश की आंतरिक सुरक्षा को 21वीं सदी के अनुकूल बनाने के लिए मोदी सरकार ने औपनिवेशिक काल के 160 वर्ष पुराने कानूनों को समाप्त किया। वर्ष 2024 से लागू हुए भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने दंड की जगह त्वरित न्याय को केंद्र में रखा है। इन नवीन संहिताओं में आतंकवाद और संगठित अपराध सिंडिकेट्स को पहली बार स्पष्ट कानूनी दायरे में लाकर कठोरतम दंड का प्रावधान किया गया है। डिजिटल साक्ष्य की मान्यता, अनिवार्य फोरेंसिक जांच और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से मुकदमों के त्वरित निस्तारण ने जांच एजेंसियों की क्षमता को कई गुना बढ़ाया है। यह युगांतकारी विधायी सुधार नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ अपराधियों में कानून का भय स्थापित कर देश के सुरक्षा ढांचे को अटूट बनाता है।

नार्को-टेररिज्म पर प्रहार: 1.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के मादक पदार्थ जब्त व नष्ट
आतंकवाद को पोषित करने वाले नार्को-टेररिज्म और संगठित मादक पदार्थ सिंडिकेट के विरुद्ध केंद्र सरकार ने देशव्यापी स्तर पर कठोर नीति अपनाई है। गृह मंत्रालय और एनसीबी द्वारा सितंबर 2026 में जारी तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, 2004 से 2014 के बीच जहां मात्र 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स पकड़े गए थे, वहीं 2014 से 2026 के बीच 1.8 करोड़ किलोग्राम से अधिक नशीले पदार्थ जब्त किए गए। पूर्ववर्ती सरकार के 40,000 करोड़ रुपये के मुकाबले मोदी शासनकाल में जब्त व नष्ट मादक पदार्थों का मूल्य 1.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। गुजरात के तटीय बंदरगाहों से लेकर सुदूर समुद्री मार्गों तक ‘नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (एनकॉर्ड) के नेटवर्क ने अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स की कमर तोड़ी है। टेरर फंडिंग के इस प्रमुख स्रोत को ध्वस्त कर मोदी सरकार ने राष्ट्र की युवा पीढ़ी को सुरक्षित किया है।

साइबर सुरक्षा: I4C और 1930 हेल्पलाइन से 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय धोखाधड़ी रोकी गई
डिजिटल संप्रभुता और आम नागरिकों की जमा पूंजी की सुरक्षा के लिए ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (I4C) और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन ‘1930’ को अभूतपूर्व विस्तार दिया गया है। संसद में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक इस हेल्पलाइन और सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम के जरिए 32.80 लाख शिकायतों में नागरिकों के 11,158 करोड़ रुपये से अधिक डूबने से बचाए गए हैं। इसके साथ ही, संगठित साइबर गिरोहों द्वारा संचालित 32 लाख से अधिक संदिग्ध बैंक खातों पर रोक लगाई गई और दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर करोड़ों फर्जी सिम कनेक्शन बंद किए गए। आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी तंत्र के जरिए डार्क वेब और डिजिटल फ्रॉड नेटवर्क्स पर कड़ा शिकंजा कसा गया है।

सीमाओं की किलेबंदी: ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ और आधुनिक स्मार्ट फेंसिंग
दशकों पुरानी रक्षात्मक मानसिकता को बदलते हुए मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर बुनियादी ढांचे का कायाकल्प किया है। ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत सीमांत गांवों को देश की पहली रक्षा पंक्ति बनाते हुए वहां सड़क, बिजली और संचार तंत्र से परिपूर्ण किया गया, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन रुका है और स्थानीय नागरिक सुरक्षा तंत्र के सजग प्रहरी बने हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमाओं पर व्यापक स्मार्ट फेंसिंग, थर्मल सेंसर, नाइट विजन कैमरे और लेजर बैरियर तैनात किए गए हैं। इन तकनीकी उपायों ने दुर्गम नदी-नालों और दलदली इलाकों से होने वाली पारंपरिक घुसपैठ व तस्करी के रास्तों को सील कर दिया है, जिससे देश की सीमाएं पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और अभेद्य हो चुकी हैं।

पश्चिमी सीमा पर एंटी-ड्रोन ग्रिड: आसमान से होने वाली नार्को-हथियार तस्करी पर कड़ा पहरा
पारंपरिक घुसपैठ के रास्ते बंद होने के बाद सीमा पार से आतंकियों द्वारा ड्रोन के जरिए हथियार और मादक पदार्थ गिराने की नई साजिशें शुरू की गई थीं। मोदी सरकार ने इस हवाई खतरे से निपटने के लिए पंजाब, राजस्थान और जम्मू की पश्चिमी सीमाओं पर एक मजबूत ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस ग्रिड स्थापित किया है। बीएसएफ और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा स्वदेशी काउंटर-ड्रोन तकनीकों की तैनाती के चलते वर्ष 2024 से 2026 के बीच सीमा पार से आए 450 से अधिक पाकिस्तानी ड्रोन्स को मार गिराया गया अथवा निष्क्रिय किया गया। इस आधुनिक रक्षात्मक घेराबंदी ने पंजाब और जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में सीमा पार से भेजी जाने वाली अवैध खेपों को जमीन पर उतरने से पहले ही नष्ट करने की अचूक क्षमता हासिल की है।

गैंगस्टर-टेरर नेक्सस पर प्रहार: ‘ऑपरेशन प्रहार’ से संगठित अपराध सिंडिकेट्स की कमर टूटी
देश के भीतर संगठित आपराधिक गिरोहों और सीमा पार बैठे आतंकी व अलगाववादी तत्वों के नापाक गठजोड़ को समाप्त करने के लिए मोदी सरकार ने निर्णायक रणनीति अपनाई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और विभिन्न राज्यों की स्पेशल सेल ने ‘ऑपरेशन प्रहार’ और ‘ऑपरेशन ध्वस्त’ के माध्यम से अंतरराज्यीय गैंगस्टरों के सैकड़ों ठिकानों पर एक साथ दबिश दी है। जेलों से रंगदारी नेटवर्क चलाने वाले कुख्यात सरगनाओं की करोड़ों रुपये की संपत्तियां कुर्क की गईं और दर्जनों विदेशी सहयोगियों के विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए। अपराध और आतंकवाद के इस गठजोड़ पर निरंतर और समन्वित कार्रवाई ने देश के विभिन्न राज्यों में फैले अंडरवर्ल्ड के प्रभाव को लगभग समाप्त कर दिया है।

स्मार्ट पुलिसिंग और नागरिक सेवाएं: 100% थानों में सीसीटीएनएस और घर बैठे ऑनलाइन सुविधाएं
पारंपरिक पुलिस व्यवस्था को तकनीकी रूप से सक्षम और जनता के प्रति उत्तरदायी बनाने के लिए ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ विजन को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 1 फरवरी 2026 तक देश के सभी 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 17,798 पुलिस थाने 100 प्रतिशत ‘क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स’ (सीसीटीएनएस) से जुड़ चुके हैं। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (नफीस) के जरिए अपराधियों का रिकॉर्ड चंद सेकंड में उपलब्ध हो जाता है। इसके साथ ही, डिजिटल इंडिया के समन्वय से नागरिकों को घर बैठे ऑनलाइन ई-एफआईआर, चरित्र प्रमाण पत्र और सत्यापन जैसी 30 से अधिक सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिसने थानों के अनावश्यक चक्कर काटने की मजबूरी और बिचौलियों की संस्कृति को समाप्त किया है।

सुरक्षा व फोरेंसिक शिक्षा में आत्मनिर्भरता: NFSU और RRU से प्रशिक्षित सुरक्षा बल
अपराध और आंतरिक सुरक्षा की आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में स्थापित रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय और गुजरात फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी को राष्ट्रीय दर्जा प्रदान किया। संसद के कानून द्वारा इन्हें ‘राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय’ (NFSU) और ‘राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय’ (RRU) के रूप में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित किया गया। आज देश भर के 10 से अधिक राज्यों में इनके परिसर स्थापित हो चुके हैं, जहां सुरक्षा बलों, पुलिस अधिकारियों और साइबर जांचकर्ताओं को वैज्ञानिक जांच व सामरिक सुरक्षा का अत्याधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जांच में फोरेंसिक को अनिवार्य बनाने वाले नए कानूनों के साथ-साथ यह अकादमिक क्रांति देश की सुरक्षा एजेंसियों को विश्वस्तरीय तकनीकी जनशक्ति उपलब्ध करा रही है।

एकीकृत राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचा: एनएससीएस और समग्र सुरक्षा डॉक्ट्रिन का विस्तार
मोदी सरकार के कार्यकाल में आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के बीच के पारंपरिक अंतर को समाप्त कर एक एकीकृत राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचा स्थापित किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के नेतृत्व में सैन्य बलों, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, खुफिया तंत्र और राज्य पुलिस के बीच एक साझा रणनीतिक डॉक्ट्रिन तैयार की गई है। इस समग्र समन्वय के चलते सीमा पर होने वाली किसी भी हलचल का सीधा इनपुट आंतरिक सुरक्षा बलों तक तत्काल पहुंचता है। एकीकृत कमान व्यवस्था और त्वरित निर्णय लेने की इस प्रणाली ने देश की सामरिक प्रतिक्रिया क्षमता को ऐतिहासिक गति और प्रभावशीलता प्रदान की है।

रियल-टाइम इंटेलिजेंस और मल्टी-एजेंसी सेंटर (MAC): 24 घंटे साझा इनपुट से साजिशें नाकाम
वर्ष 2014 से पूर्व विभिन्न खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में कमी को देश की आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी कमजोरी माना जाता था। मोदी सरकार ने इस खाई को पाटते हुए मल्टी-एजेंसी सेंटर (एमएसी) और राज्य स्तर पर स्टेट मल्टी-एजेंसी सेंटर (एसएमएसी) को 24 घंटे क्रियाशील और सशक्त बनाया है। अब थल सेना, वायु सेना, नौसेना, रॉ, आईबी, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और सभी राज्यों की पुलिस के बीच संदिग्ध इनपुट रियल-टाइम में साझा होते हैं। इस तकनीकी तालमेल और साझा इंटेलिजेंस नेटवर्क के कारण ही पिछले एक दशक में दर्जनों संभावित आतंकी हमलों, स्लीपर सेल नेटवर्क्स और सीमा पार की साजिशों को अंजाम तक पहुंचने से पहले ही नाकाम कर दिया गया।

राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में रणनीतिक बदलाव: सक्रिय रक्षा और सर्जिकल स्ट्राइक का नया दौर
वर्ष 2014 के बाद भारत की आंतरिक सुरक्षा नीति में रणनीतिक निष्क्रियता की जगह सक्रिय और आक्रामक रक्षात्मक रुख ने ली। उरी और पुलवामा हमलों के उपरांत सीमा पार किए गए सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक ने यह स्थापित किया कि प्रायोजित आतंकवाद को अब सीमाओं के भीतर रोकने के बजाय उसके उद्गम स्थल पर कड़ा प्रहार किया जाएगा। आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए थल, जल और नभ की रक्षा प्रणालियों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को एकजुट किया गया। इस ऐतिहासिक नीतिगत परिवर्तन ने भारत की आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाते हुए राष्ट्रविरोधी ताकतों और सीमा पार के आकाओं में भारतीय संप्रभुता का कड़ा भय स्थापित किया है।

सुरक्षा बलों में ‘आत्मनिर्भर भारत’: 80% से अधिक स्वदेशी उपकरणों और हथियारों की तैनाती
आंतरिक सुरक्षा बलों की विदेशी हथियारों पर दशकों पुरानी निर्भरता को समाप्त करते हुए मोदी सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को सुरक्षा क्षेत्र में मजबूती से लागू किया है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य पुलिस बलों को देश में ही निर्मित आधुनिक असॉल्ट राइफलें, बुलेटप्रूफ जैकेट, उन्नत हेलमेट और बख्तरबंद गाड़ियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। निगरानी और गश्त के लिए निजी रक्षा स्टार्टअप्स द्वारा विकसित उच्च तकनीक युक्त स्वदेशी ड्रोन तैनात किए गए हैं। केंद्रीय बलों के बुनियादी सुरक्षा उपकरणों में 80 प्रतिशत से अधिक की आपूर्ति अब ‘मेक इन इंडिया’ के तहत घरेलू स्तर पर हो रही है, जिसने सुरक्षा बलों की सामरिक क्षमता को स्वावलंबी और किसी भी बाहरी संकट से अप्रभावित बना दिया है।

सीएपीएफ सशक्तिकरण: 40 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड और आवासीय संतुष्टि में भारी वृद्धि
आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ कहे जाने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को आधुनिक अस्त्र-शस्त्र, बख्तरबंद वाहन और उन्नत संचार उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। जवानों के मनोबल को बढ़ाने के लिए ‘आयुष्मान सीएपीएफ’ योजना के तहत 40 लाख से अधिक डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं, जिससे जवानों और उनके आश्रितों को देश भर के निजी व सरकारी अस्पतालों में कैशलेस उपचार मिल रहा है। ‘सीएपीएफ ई-आवास’ पोर्टल के जरिए बलों की आवासीय संतुष्टि दर को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 73 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य हासिल किया गया है। कठिन क्षेत्रों में तैनात जवानों के भत्तों में वृद्धि और सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के परिजनों के लिए आर्थिक संबल तंत्र को मजबूत कर जवानों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

सुरक्षा बलों में नारी शक्ति: सीमा चौकियों से लेकर कमांडो यूनिट्स तक महिला प्रहरियों का परचम
आंतरिक सुरक्षा के ढांचे को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने के लिए मोदी सरकार ने पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महिलाओं की भागीदारी को ऐतिहासिक विस्तार दिया है। सीएपीएफ में महिला कर्मियों की संख्या 2014 के मुकाबले लगभग दोगुनी से अधिक पहुंच चुकी है। कठिनतम अभियानों के लिए सीआरपीएफ की महिला कोबरा कमांडो टुकड़ियां तैनात की गई हैं, जबकि भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ की महिला प्रहरी अग्रिम चौकियों पर 24 घंटे पहरा दे रही हैं। थानों में अनिवार्य महिला हेल्प डेस्क और केंद्रीय बलों की भर्ती में आरक्षण के निरंतर प्रयासों ने कानून व्यवस्था के तंत्र को अधिक संवेदनशील, पेशेवर और जनता के प्रति उत्तरदायी बनाया है।

महिला सुरक्षा: 775 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों से 3.50 लाख से अधिक मामलों का त्वरित निस्तारण
आंतरिक सुरक्षा मॉडल का एक प्रमुख आधार देश की आधी आबादी के लिए मजबूत कानूनी और तकनीकी सुरक्षा कवच तैयार करना रहा है। पोक्सो (POCSO) अधिनियम में कठोर संशोधन कर नाबालिगों के साथ जघन्य अपराधों के लिए मृत्युदंड तक का स्पष्ट कानूनी प्रावधान किया गया। विधि एवं न्याय मंत्रालय के वर्ष 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश भर के 29 राज्यों में 398 विशेष पोक्सो अदालतों सहित कुल 775 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें पूरी तरह क्रियाशील हैं, जिन्होंने अब तक 3,50,000 से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया है। इसके अतिरिक्त, एकल आपात नंबर ‘112’ (ERSS), थानों में स्थापित ‘महिला हेल्प डेस्क’ और सेफ सिटी परियोजनाओं के जरिए सार्वजनिक स्थानों को निगरानी तंत्र से जोड़ा गया है, जिससे महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हुई है।

वीआईपी सुरक्षा संस्कृति का अंत: आम नागरिक की सुरक्षा को सर्वोच्चता
मोदी शासन के 25 वर्षों में सुरक्षा नीति का केंद्रबिंदु ‘विशिष्ट वर्ग’ से हटकर देश के ‘सामान्य नागरिक’ पर केंद्रित हुआ। सड़कों पर अनावश्यक सुरक्षा तामझाम और गाड़ियों पर लाल बत्ती के चलन को खत्म कर पुलिस बल को वीआईपी ड्यूटी के अनावश्यक दबाव से मुक्त किया गया, जिससे सुरक्षा बलों की सीधी तैनाती आम जनता की रक्षा में हो सकी। इसके साथ ही, सुरक्षा समीक्षा की निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था लागू कर राजनीतिक आधार पर मिलने वाली अनुचित सुरक्षा को समाप्त किया गया। इस दृष्टिकोण ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य की पहली जिम्मेदारी सत्ताधारियों को विशेष सुरक्षा कवच देने की बजाय देश के अंतिम पंक्ति में खड़े नागरिक के जान-माल की हिफाजत सुनिश्चित करना है।

क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा: 68 से अधिक हवाई अड्डों और प्रतिष्ठानों पर सीआईएसएफ का अभेद्य पहरा
देश के आर्थिक और रणनीतिक ढांचे को आतंकी हमलों और तोड़फोड़ से सुरक्षित रखने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। वर्तमान में देश के 68 से अधिक नागरिक हवाई अड्डों, परमाणु प्रतिष्ठानों, अंतरिक्ष केंद्रों, बंदरगाहों और दिल्ली मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन तंत्रों को सीआईएसएफ का सुरक्षा कवच प्राप्त है। इन संवेदनशील स्थलों पर एंटी-ड्रोन तकनीक, फुल-बॉडी स्कैनर और बायोमेट्रिक एक्सेस कंट्रोल जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणालियां तैनात की गई हैं। महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की यह फूलप्रूफ सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि देश की तेज आर्थिक प्रगति और सामरिक संपत्तियों पर कभी कोई आंच न आने पाए।

रेलवे सुरक्षा: स्टेशनों पर एआई फेशियल रिकॉग्निशन और ड्रोन गश्त से तोड़फोड़ पर रोक
देश की जीवनरेखा कही जाने वाली रेल प्रणाली और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को आतंकी षड्यंत्रों और तोड़फोड़ से बचाने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा कवच तैयार किया गया है। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को आधुनिक उपकरणों, लंबी दूरी के सर्विलांस ड्रोन और डॉग स्क्वाड से सुसज्जित किया गया है। देश भर के 800 से अधिक प्रमुख और संवेदनशील रेलवे स्टेशनों पर उच्च तकनीक युक्त फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक और सीसीटीवी निगरानी तंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। पटरियों की सुरक्षा के लिए स्वचालित ट्रैक मॉनिटरिंग और संवेदनशील मार्गों पर सुरक्षा बलों की 24 घंटे गश्त ने असामाजिक तत्वों द्वारा रेल संचालन को बाधित करने और जान-माल को नुकसान पहुंचाने के मंसूबों को लगातार विफल किया है।

तटीय सुरक्षा का राष्ट्रीय चक्रव्यूह: 7,516 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर 24 घंटे इलेक्ट्रॉनिक पहरा
2001 में पोरबंदर और गुजरात तट पर तस्करी रोकने के अनुभवों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश की 7,516 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा पर लागू किया। तटीय सुरक्षा योजना के तहत देश भर में 200 से अधिक तटीय पुलिस थानों, आधुनिक इंटरसेप्टर नौकाओं और 86 से अधिक तटीय रडार स्टेशनों का अभेद्य नेटवर्क स्थापित किया गया है। ‘नेशनल कमांड कंट्रोल कम्युनिकेशन एंड इंटेलिजेंस नेटवर्क’ (NC3I) के जरिए हर संदिग्ध समुद्री हलचल पर 24 घंटे नजर रखी जाती है। मछुआरों को 10 लाख से अधिक बायोमेट्रिक पहचान पत्र और नावों में आधुनिक ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम ट्रांसपोंडर लगाकर उन्हें सुरक्षा का अभिन्न अंग बनाया गया है, जिससे 26/11 जैसे समुद्री हमलों की पुनरावृत्ति पूरी तरह असंभव हो चुकी है।

आर्थिक अपराधों पर प्रहार: ईडी द्वारा 1.30 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क
आंतरिक सुरक्षा को भीतर से खोखला करने वाले आर्थिक सिंडिकेट्स और काले धन के तंत्र पर मोदी सरकार ने अभूतपूर्व कानूनी प्रहार किया है। संगठित अपराध और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को मिलने वाली आर्थिक मदद को समाप्त करने के लिए ‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (पीएमएलए) और ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम’ को पूरी तरह प्रभावी बनाया गया। केंद्रीय जांच एजेंसियों के अनुसार, पीएमएलए के तहत अब तक 1.30 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आपराधिक संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं और लाखों संदिग्ध शेल कंपनियों के पंजीकरण रद्द किए गए हैं। अपराध से अर्जित धन की जब्ती और वित्तीय तंत्र की कड़ी निगरानी ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी आपराधिक या देशविरोधी गिरोह धनबल के सहारे आंतरिक सुरक्षा को चुनौती न दे सके।

नकली करेंसी और हवाला सिंडिकेट का खात्मा: टेरर फंडिंग के आर्थिक नेटवर्क पर चोट
आतंकवाद और संगठित अपराध की प्राणवायु कहे जाने वाले जाली नोटों (एफआईसीएन) और हवाला नेटवर्क के विरुद्ध मोदी सरकार ने निर्णायक रणनीति अपनाई। एनआईए के तहत विशेष ‘टेरर फंडिंग एंड फेक करेंसी सेल’ का गठन कर सीमा पार से आने वाली उच्च गुणवत्ता वाली नकली भारतीय मुद्रा के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया गया। इसके साथ ही, देश में डिजिटल लेन-देन और यूपीआई के तीव्र विस्तार ने काले धन व बेनामी नकदी के प्रवाह को लगभग समाप्त कर दिया है। हवाला ऑपरेटरों पर वित्तीय जांच एजेंसियों की सख्त कार्रवाई और बैंक खातों की सख्त निगरानी ने आतंकवादियों और अंडरवर्ल्ड सिंडिकेट्स की फंडिंग पाइपलाइन को जड़ से काट दिया है।

अवैध घुसपैठ पर कड़ा नियंत्रण: बायोमेट्रिक कैप्चरिंग और सीमा सुरक्षा का डिजिटलीकरण
सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ देश की जनसांख्यिकी और आंतरिक सुरक्षा दोनों के लिए लंबे समय से गंभीर चुनौती बनी हुई थी। मोदी सरकार ने इस पर अंकुश लगाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध प्रवासियों की बायोमेट्रिक पहचान और केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार करने की व्यवस्था लागू की। फर्जी पहचान पत्रों, पासपोर्ट और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त सत्यापन और डिजिटल ट्रैकिंग का तंत्र स्थापित किया गया। म्यांमार और बांग्लादेश से लगी सीमाओं पर अवैध रास्तों की पहचान कर उन्हें सील करने और घुसपैठियों के मददगार स्थानीय सिंडिकेट्स पर कानूनी शिकंजा कसने से देश की आंतरिक अखंडता को मजबूती मिली है।

जेल सुधार: ‘ई-प्रिजन्स’ से 1,400 से अधिक कारागार जुड़े और संगठित गिरोहों के अड्डों पर ताला
दशकों से देश की जेलें संगठित अपराधियों और गैंगस्टरों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनी हुई थीं, जहां से बैठकर वे रंगदारी और अपराध सिंडिकेट संचालित करते थे। मोदी सरकार ने 130 वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानून को बदलकर आधुनिक ‘आदर्श कारागार अधिनियम’ (मॉडल प्रिजन्स एक्ट) लागू किया। देश की 1,400 से अधिक जेलों को ‘ई-प्रिजन्स’ डिजिटल नेटवर्क से जोड़कर बंदियों की निगरानी को पारदर्शी बनाया गया है। कुख्यात आतंकियों और अपराधियों के लिए हाई-सिक्योरिटी बैरक, 5G-रेडी कॉल ब्लॉकिंग जैमर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अदालती पेशी की व्यवस्था अनिवार्य की गई। इस संस्थागत सुधार ने जेलों को अपराध संचालन के सुरक्षित केंद्रों से बदलकर वास्तविक सुधार गृहों और कानून के कड़े पहरे में तब्दील कर दिया है।

विदेशी फंडिंग पर शिकंजा: एफसीआरए के तहत 20,000 से अधिक संदिग्ध एनजीओ पर कार्रवाई
आंतरिक सुरक्षा को कमजोर करने और विकास परियोजनाओं में बाधा डालने के उद्देश्य से आने वाले संदिग्ध विदेशी धन पर केंद्र सरकार ने निर्णायक रोक लगाई है। विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में कड़े संशोधन कर विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा में खाता अनिवार्य किया गया और ऑडिट प्रणाली सख्त की गई। गृह मंत्रालय की समीक्षा के अनुसार, नियमों के उल्लंघन, धर्मांतरण और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर 20,000 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों के एफसीआरए पंजीकरण निरस्त किए जा चुके हैं। इस वित्तीय पारदर्शिता ने यह सुनिश्चित किया कि बाहरी ताकतों द्वारा देश के आंतरिक सौहार्द और संप्रभुता को किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुंचाया जा सके।

एंटी-टेरर डिप्लोमेसी: दर्जनों वैश्विक भगोड़ों का प्रत्यर्पण और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स पर प्रहार
देश में अपराध कर विदेशों में शरण लेने वाले भगोड़ों, गैंगस्टरों और आतंकियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नकेल कसने की नीति में ऐतिहासिक तेजी आई है। भारत ने इंटरपोल, प्रत्यर्पण संधियों और पारस्परिक कानूनी सहायता समझौतों (एमएलएटी) का प्रभावी उपयोग कर दर्जनों कुख्यात अपराधियों को विदेशों से वापस लाकर भारतीय अदालतों के कटघरे में खड़ा किया है। भारत की पहल पर आयोजित वैश्विक आतंकवाद विरोधी सम्मेलन ‘नो मनी फॉर टेरर’ ने दुनिया भर में आतंकी फंडिंग के स्रोतों को बंद करने की अगुवाई की। इस सक्रिय कूटनीति ने वैश्विक मंचों पर भारत के सुरक्षा हितों को मजबूती दी है और यह संदेश दिया है कि भारतीय कानून से बचकर दुनिया के किसी भी कोने में छिपना अब संभव नहीं है।

दंगामुक्त भारत: सांप्रदायिक दंगों की घटनाओं में भारी गिरावट और कर्फ्यू संस्कृति का अंत
वर्ष 2001 से पहले देश के कई राज्यों में महीनों तक चलने वाले कर्फ्यू और दंगे सामान्य जनजीवन का हिस्सा बन चुके थे, जिसे नरेंद्र मोदी ने दृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति से पूरी तरह समाप्त किया। केंद्र में 2014 के बाद इसी नीति को राष्ट्रीय स्तर पर लागू कर बड़े संगठित सांप्रदायिक उपद्रवों पर विराम लगाया गया है। एनसीआरबी और गृह मंत्रालय की रिपोर्टों के अनुसार, देश में बड़े सांप्रदायिक दंगों की घटनाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई है। उपद्रवियों द्वारा सार्वजनिक संपत्ति को पहुंचाए गए नुकसान की उन्हीं से भरपाई कराने की सख्त नीति और त्वरित अदालती कार्यवाहियों ने उपद्रवी तत्वों में कानून का खौफ पैदा किया है। देश भर में कानून का इकबाल स्थापित होने से सभी वर्गों के लिए एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील परिवेश सुनिश्चित हुआ है।

आपदा प्रबंधन का आधुनिकीकरण: एनडीआरएफ की क्षमता में 183% की वृद्धि और ‘शून्य जनहानि’ का लक्ष्य
गुजरात में 2001 के कच्छ भूकंप के उपरांत नरेंद्र मोदी द्वारा स्थापित गुजरात राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (जीएसडीएमए) को बाद में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और एनडीआरएफ के रूप में राष्ट्रव्यापी विस्तार मिला। चक्रवात, बाढ़ या अन्य गंभीर संकटों के दौरान ‘शून्य जनहानि’ के लक्ष्य पर काम करते हुए पूर्व चेतावनी प्रणालियों और त्वरित राहत बलों को आधुनिक बनाया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार एनडीआरएफ की सक्रिय उपलब्धता में 183 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है और त्वरित राहत संचालन के लिए 28 शहरों में क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए गए हैं। आंतरिक सुरक्षा का यह मानवीय पहलू देश के प्रत्येक नागरिक को यह भरोसा दिलाता है कि किसी भी आपदा के समय शासन तंत्र पूरी संवेदनशीलता और सामर्थ्य के साथ उनके साथ खड़ा है।

सुरक्षित भारत, सशक्त भारत का अटूट संकल्प
मोदी सरकार का यह स्पष्ट दृष्टिकोण रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा से बड़ा कोई राजनीतिक हित नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और पिछले 25 वर्षों के निरंतर व समर्पित नेतृत्व ने आंतरिक सुरक्षा नीति को तुष्टीकरण और हिचकिचाहट के साए से पूरी तरह मुक्त कराया है। वर्ष 2001 में पोरबंदर के माफियाराज के खात्मे से शुरू हुई यह यात्रा आज देश को संगठित अपराध, आतंकवाद, नक्सलवाद और अलगाववाद की पुरानी चुनौतियों से निर्णायक रूप से मुक्त करा चुकी है। मोदी सरकार द्वारा निर्मित सुरक्षा का यह अभेद्य ढांचा और संस्थागत सुधार ही वर्ष 2047 के विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव हैं।

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