Home समाचार देखिए कैसे फैक्ट चेक करने वाले खुद फैला रहे हैं फेक न्यूज

देखिए कैसे फैक्ट चेक करने वाले खुद फैला रहे हैं फेक न्यूज

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देश में कुछ एजेंडा पत्रकार है, जो मोदी सरकार के खिलाफ हमेशा प्रोपेगेंडा में लगे रहते हैं। जब भी मौका मिलता है, मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए फर्जी खबरों की मदद लेने से भी नहीं चुकते हैं। जब पूरा देश कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एकजुट है, वहीं एजेंडा पत्रकार इस मुश्किल समय में भी सरकार और देश की मदद करने की जगह झूठी खबरों के जरिए लोगों में डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। हैरानी तब होती है, जब फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट का संस्थापक भी झूठी और मनगढ़ंत खबर फैलाते हुए पकड़ा जाता है। आइए आपको बताते हैं किस तरह कथित फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ के संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने फेक अकाउंट को रीट्वीट कर झूठी खबर फैलाने की कोशिश की।

एक ट्विटर अकाउंट जो कई दिनों से बंद पड़ा हुआ था। उस ट्विटर अकाउंट से अचानक से एक वीडियो ट्वीट किया जाता है, जिसमें एक महिला डॉक्टर बताती है कि किस तरह डॉक्टरों को सरकार द्वारा कुछ भी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। वो बताती हैं कि उसने जो मास्क पहना हुआ है, वो काफ़ी पुराना है और उसे बार-बार धो कर उसे पहनना पड़ रहा है। 

वो डॉक्टर बताती हैं कि वो एक सप्ताह से यही मास्क पहन रही हैं। इस ट्विटर अकाउंट के काफ़ी कम फॉलोवर हैं, मात्र 314 ही। फिर वो ट्वीट वायरल कैसे होगा? ऐसे में प्रतीक सिन्हा आगे आते हैं और वो उस ट्वीट को रीट्वीट करते हैं। इसके बाद ‘द प्रिंट’ के संस्थापक शेखर गुप्ता द्वारा उसे रीट्वीट किया जाता है। 

इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस ट्विटर अकाउंट से ट्वीट किया गया था, वह अकाउंट किसी पुरुष के नाम पर था, जिसका हैंडल है- विक्रमादित्य। पहले नाम भी किसी पुरुष का था लेकिन इसको वायरल करने के लिए इसे किसी महिला के नाम पर बना दिया गया। लेकिन, चोरी पकड़ी इसीलिए गई क्योंकि इस ट्विटर अकाउंट ने नाम तो बदल लिया लेकिन वो अपना यूजरनेम या फिर ट्विटर हैंडल का नाम नहीं बदल पाए। तैयारी अधूरी रह गई और प्रपंच पकड़ा गया। इसका मतलब है कि प्रतीक सिन्हा ने एक फेक अकाउंट का ट्वीट शेयर किया, ताकि इसके आधार पर मोदी सरकार पर निशाना साधा जा सके।

अब उस अकाउंट ने अपने सारे ट्वीट्स डिलीट कर लिए हैं। अगस्त 2011 में बने उस अकाउंट पर अगर आप अभी जाएंगे तो आपको कुछ नहीं दिखेगा क्योंकि उसने सारे ट्वीट्स हटा दिए हैं। पकड़े जाने के बाद गिरोह विशेष ने ऐसा करवाया है। इस ट्विटर हैंडल को जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद फॉलो कर रही थीं। और भी कई लोग थे, जिन्होंने मोदी सरकार के विरोध में ट्वीट देखते ही इस हैंडल को फॉलो कर दिया। उनमें से एक नाम ज्योति यादव का भी है, जो ‘द प्रिंट’ नामक प्रोपेगंडा पोर्टल में कार्यरत हैं। अब आप समझ सकते हैं कि किसके तार कहां और किस-किस से जुड़े हुए हैं।

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