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PM Modi का मास्टर-स्ट्रोक साबित मुर्मू: विपक्षी एकता तार-तार, द्रौपदी के नाम पर कांग्रेस समेत कई दलों में सेंध, जानिए देशभर में कहां के कितने विधायकों और सांसदों ने की क्रॉस वोटिंग

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अपने रणनीतिक फैसलों से सबको चौंकाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार में भी सारे कयासों को फेल कर दिया। हालांकि पहले विपक्ष की ओर से यशवंत सिन्हा के नाम का ऐलान प्रत्याशी के तौर किया था। पर शानदार जीत की बाजी पीएम मोदी के नाम रही। पीएम मोदी ने ट्रंप कार्ड के तौर पर राष्ट्रपति पद के लिए ऐसा प्रत्याशी चुना, जिसकी काट करना दो दूर विपक्ष के कई विधायक और सांसद अपनी पार्टी लाइन से परे जाकर द्रौपदी मुर्मू के खेमे में आ गए। राष्ट्रपति का चुनाव जीतने वाली द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला बनीं। आदिवासी चेहरा और वह भी महिला, इस आधार पर विपक्षी में बड़ी सेंधमारी हुई। मुर्मू के पक्ष में 13 राज्यों के 119 विधायकों और 17 सांसदों के क्रॉस वोटिंग का आंकलन आया है। खासतौर पर उन राज्यों में क्रॉस वोटिंग ज्यादा हुई है, जहां पर कांग्रेस सत्ता पक्ष या विपक्ष में है।

पीएम मोदी की रणनीति के आगे हारे विपक्षी दल, क्रॉस वोटिंग भी नहीं रोक पाए
पीएम मोदी ने पिछली बार जब राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया था, तब भी उन्होंने चौंकाया था। वाजपेयी ने अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनवाकर बीजेपी को मुस्लिम विरोधी कहने वालों को चुप कराया। वहीं पीएम मोदी ने पहले कोविंद और अब मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर बीजेपी को दलित और आदिवासी विरोधी कहने वालों के मुंह पर ताला ही लगा दिया। आदिवासी के साथ-साथ बीजेपी की महिलाओं को आगे बढ़ाने की नीति भी इसी से सध गई। यही वजह है कि एनडीए के ओर से राष्ट्रपति के द्रोपदी मुर्मू का नाम घोषित होते ही विपक्षी एकता में फूट पड़ गई गई। सबसे पहले BJD और YSR कांग्रेस ने समर्थन देने का ऐलान किया था।सोनिया-राहुल की परवाह नहीं, विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर चुनाव में वोटिंग की
इसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने समर्थन किया, जबकि झारखंड में कांग्रेस के साथ मिलकर हेमंत सोरेन सरकार चला रहे हैं। जबकि, विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा भी झारखंड से ही चुनाव लड़ते रहे हैं। बाद में शिवसेना के उद्धव ठाकरे के गुट ने आदिवासी महिला के नाम पर समर्थन दिया था। बड़ी बात यह है कि कांग्रेस के विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग की है। अब लगातार तीन साल में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के संदर्भ में कांग्रेस के लिए यह खतरे की घंटी है। दिलचस्प यह है कि मुर्मू की जीत के जश्न को जिस तरह से देशभर में भाजपा मना रही है, यह भी एक बड़ा राजनीतिक मैसेज है।

पीएम मोदी की ट्रंप-कार्ड द्रोपदी मुर्मू की जीत तो नाम घोषित होने के साथ ही सुनिश्चित थी, लेकिन बीजेपी की यह बड़ी रणनीतिक जीत हुई कि मुर्मू के नाम पर विपक्षी विधायकों और सांसद खुद ही क्रॉस वोटिंग के लिए आगे आए। आइये सबसे अधिक क्रॉस वोटिंग करने वाले राज्यों के समीकरण समझते हैं…राजस्थान : गहलोत खेमे के अलावा बेनीवाल की पार्टी के विधायकों के वोट मिले
राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों में से द्रौपद्री मुर्मू के पक्ष में 75 वोट पड़े हैं। जबकि, यहां बीजेपी के पास 70 ही विधायक हैं। ऐसे में पांच वोट अतिरिक्त मिले हैं। इसमें से तीन तो नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल की पार्टी RLP के है। बेनीवाल ने पहले ही यशवंत सिन्हा को वोट न देने के लिए कहा था, जबकि दो वोट गहलोत खेमे से मुर्मू को मिले। राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करने के लिए BJP ने शोभा रानी कुशवाहा को पार्टी से निकाल दिया था। यशवंत सिन्हा को 123 वोट ही मिले।

छत्तीसगढ़ : अब विधानसभा चुनाव में सियासी लाभ उठाने की रणनीति बनाएगी बीजेपी
कांग्रेस राज वाला दूसरा प्रदेश छत्तीसगढ़ है। यहां भी विधानसभा चुनाव राजस्थान के साथ एक साल बाद 2023 में होंगे। इस राज्य में भी आदिवासी समाज का अच्छा प्रभाव है। कांग्रेस के 69 विधायक हैं, लेकिन यहां छह वोट भाजपा को अतिरिक्त मिले हैं। बताया जा रहा है कि छह विधायकों ने क्रॉस वोट किया है। इसमें से दो वोट कांग्रेस के भी शामिल हैं। ऐसे में भाजपा आने वाले विधानसभा चुनाव में सियासी लाभ उठाने के लिए अपनी पूरी रणनीति बनाएगी।महाराष्ट्र : उद्धव ठाकरे ने बीजेपी से दोस्ती तोड़ने का प्रायश्चित किया
महाराष्ट्र में हाल ही में सियासी बदलाव के बाद उद्धव ठाकरे अपनी सरकार गंवा बैठे। उऩ्हें शायद इसके बाद अहसास हुआ कि बीजेपी से दोस्ती तोड़कर और सोनिया-पवार के साथ जाकर उन्होंने गलती की थी। इसी के प्रायश्चित स्वरूप शिवसेना के उद्धव ठाकरे के गुट ने पहले ही भाजपा प्रत्याशी को अपना समर्थन दे दिया था। इसके अलावा महाराष्ट्र में 16 विधायकों की ओर से क्रॉस वोट करने की खबर आ रही है। ऐसे में साफ है कि आदिवासी महिला के नाम पर कांग्रेस और NCP अपने विधायकों को भी एकजुट नहीं रख पाई। इससे आने वाले समय में कांग्रेस के लिए महाराष्ट्र में सियासी राह आसान नहीं होगी। असम : कई विधायक यशवंत सिन्हा को प्रत्याशी बनाए जाने से नाराज थे
राज्य की कई सीटों पर आदिवासी समाज का प्रभाव है। असम में छह फीसदी आबादी आदिवासी समाज की है। लगातार दो टर्म से कांग्रेस यहां विपक्ष में है। विपक्ष के पास यहां 39 विधायक हैं। इसमें से 25 कांग्रेस के है, जबकि 22 विधायकों ने मुर्मू के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की है। इससे साफ है कि असम के विधायक यशवंत सिन्हा को प्रत्याशी बनाए जाने से नाराज थे, जिसके कारण उन्होंने मुर्मू के पक्ष में क्रास वोटिंग करना श्रेयस्कर समझा। पार्टी विधायकों की इस क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस को सोचना पड़ेगा।उत्तर प्रदेश : अखिलेश के ‘साथियों’ ने पहले से ही तय था कि क्रास वोटिंग करेंगे
उत्तर प्रदेश में पहले दिन से सबको पता था कि राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग होना तय है। उत्तर प्रदेश में विपक्ष के लगभग 12 विधायकों की ओर से क्रॉस वोट करने का दावा किया जा रहा है। सपा की सहयोगी पार्टियों के विधायकों ने मुर्मू को वोट देने का ऐलान कर दिया था। मुलायम सिंह के भाई और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव पहले ही बोल चुके थे कि वे यशवंत सिन्हा के पक्ष में वोट नहीं करेंगे। पिछले दिनों उनकी मुलाकात उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी हुई थी।गुजरात : कांग्रेस विधायकों के टूटने से लेकर कॉस वोटिंग तक का सिलसिला
राज्य में 30 से 40 विधानसभा सीटों पर आदिवासी समाज का प्रभाव है। 2022 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में जो विधायक बच गए हैं, उनमें से कई ने आदिवासी प्रत्याशी के नाम पर पार्टी लाइन से हटकर द्रौपदी के पक्ष में वोटिंग किया। हालांकि 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस विधायकों के टूटने का सिलसिला जारी है। ऐसे में साफ है कि तीन महीने बाद प्रदेश में जो चुनाव होंगे उसमें कांग्रेस के लिए आदिवासी समाज के वोट बैंक पर पकड़ बनाना अब आसान नहीं होगा।झारखंड : आदिवासी बहुल राज्य में मुर्मू के हैं विधायकों से व्यक्तिगत रिश्ते
एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू इसी राज्य की गवर्नर रह चुकी हैं। इसके चलते राज्य के विधायकों से मुर्मू के व्यक्तिगत रिश्ते भी हैं। वैसे भी यह राज्य आदिवासी बहुल भी है, जिसको देखते हुए कांग्रेस के साथ गठबंधन की सरकार चलाते हुए भी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मुर्मू के पक्ष में वोटिंग करने का ऐलान किया था, जिससे राज्य के आदिवासी समाज की भावना आहत न हों। 82 सीट वाले विधानसभा में से केवल नौ वोट ही यशवंत सिन्हा को मिले, जबकि 18 विधायक कांग्रेस के और एक-एक सीटें CPI-NCP की हैं। 70 वोट BJP प्रत्याशी को मिले। 10 विधायकों ने क्रॉस वोट किया है। ऐसे में माना जा रहा है, ज्यादातर विधायक कांग्रेस के ही होंगे।

मध्य प्रदेश : अगले साल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मुश्किल होगी
मध्य प्रदेश में कांग्रेस और विपक्ष के पास 100 विधायक हैं, जबकि वोट 79 ही पड़े। राज्य की 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें आदिवासी समाज के लिए आरक्षित हैं। यहां भाजपा प्रत्याशी मुर्मू को 146 वोट मिले। बताया जा रहा है कि 19 विधायकों ने क्रॉस वोट किया है। अगले साल 2023 में यहां विधानसभा के चुनाव भी होंगे। इस लिहाज से कांग्रेस लिए यह अच्छा संकेत नहीं है, जबकि भाजपा आदिवासी समाज से राष्ट्रपति बनाने को लेकर उत्सव का माहौल बनाने की तैयारी कर रही है।

उपरोक्त राज्यों के अलावा बिहार में 6, गोवा में 4, मेघालय में 7, अरुणाचल और हरियाणा में एक-एक विधायकों ने और देश में 17 सांसदों ने भी क्रॉस वोटिंग की है।

 

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