Home पोल खोल ‘एसिड अटैक’ के अपराध वाली मानसिकता से गुजर रही है कांग्रेस ?

‘एसिड अटैक’ के अपराध वाली मानसिकता से गुजर रही है कांग्रेस ?

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देश की सबसे वयोवृद्ध पार्टी जल बिन मछली की तरह छटपटा रही है। स्वतंत्रता के 70 वर्षों के इतिहास पर दृष्टि डालिए तो आपको कांग्रेस की बौखलाहट समझ में आ जाएगी। उसे हर परिस्थिति में सत्ता चाहिए। सत्ता छिनने पर उसकी हालत एकतरफा प्रेम में उन्मादित उस व्यक्ति की तरह हो जाती है, जो एसिड अटैक कर अपनी ही चाहत का जीवन समाप्त कर देने पर तुल जाते हैं। विचारकों की राय में कांग्रेस जब भी सत्ता से दूर होती है, वो एसिड अटैक वाले व्यक्ति की तरह ही व्यवहार करना शुरू कर देती है। उन्माद के चक्कर में ये बात उसकी समझ में ही नहीं आती कि यदि जनता ने ठुकराया है, तो उल्टे-सीधे हथकंडों से कुछ होने वाला नहीं। भारत के बंटवारे से लेकर पिछले तीन वर्षों में उसकी मनोवृत्ति की पड़ताल करें एक ही बात प्रमाणित होगी, कांग्रेस को हर हाल में सत्ता चाहिए। सत्ता के लिए वो देश का बंटवारा करवा चुकी है, देश के टुकड़े-टुकड़े करवाने की मंशा रखती है, सरेआम गाय को कटवा सकती है, दंगे और नरसंहार तक करवा सकती है।

मंदसौर को कांग्रेस ने जलाया !
मध्यप्रदेश के मंदसौर और दूसरे जिलों में किसान आंदोलन को हिंसक बनाने के पीछे कांग्रेस का हाथ था, ये बात अब किसी से छिपी नहीं रही। एक के बाद एक कांग्रेस नेताओं के जो वीडियो सामने आ रहे हैं उससे साफ पता चलता है कि कांग्रेस ने किसानों के आंदोलन में कैसे हिंसा भड़काई। शिवपुरी से कांग्रेस विधायक शकुंतला खटिक का वीडियो सामने आया है, जिसमें वो सरेआम थाने में आग लगाने को कह रही हैं। एक दूसरे कांग्रेस नेता रतलाम जिला पंचायत के उपाध्यक्ष डीपी धाकड़ का भी वीडियो है जिसमें वो सरेआम हिंसा को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस को लगता है कि तीन साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश में किसानों के लिए जितना भी काम किया है उसे आग में जलाकर राख कर देना का यही समय है। यही वजह है कि वो देश को अशांत करने के लिए अब वो सड़कों पर उतर चुकी है। 

कांग्रेस की करतूत देखिए:

आग में घी डालने राहुल भी पहुंचे !
मध्य प्रदेश में एक तरफ कांग्रेस के उकसावे के चलते हिंसा भड़क गई थी। लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी स्वयं भी वहां राजनीतिक रोटी सेंकने पहुंच गए। एक तरफ उनकी पार्टी के गुर्गे किसानों को हिंसा में झोंक रहे थे, सरकारी और निजी संपत्तियों में आग लगा रहे थे और राहुल गांधी सियासी सैर का आनंद उठाना चाहते थे। इस काम में राहुल का साथ देने के लिए मध्यप्रदेश से जुड़े सारे कांग्रेसी नेता पूरी तरह नकारात्मक राजनीति को भड़काने में सक्रिय हो गए। सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि मध्यप्रदेश सरकार को बदनाम करने के लिए गिद्ध दृष्टि लगाने राहुल को ये बात भी समझ नहीं आई कि विरोध करने का ये मतलब नहीं कि विधि-विधान को भी ताक पर रख दें। छिप-छिपाकर मंदसौर पहुंचने के लिए वो बिना हेलमेट के तीन लोगों के साथ बाइक पर बैठे। यही नहीं एक समय वो एक पुलिस वाले से भी तू-तू, मैं-मैं पर उतर आए। सोनिया-राहुल को इस बात का भय सता रहा है कि पीएम मोदी जो किसानों की आय दो गुना करना चाहते हैं, तो फिर इससे तो कांग्रेस की दंगाई राजनीति को पलीता ही लग जाएगा। इसी घबराहट में वो आग में घी डालने का कोई अवसर नहीं छोड़ रही है।

सहारनपुर हिंसा में भी कांग्रेस का हाथ !
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कुछ दिनों पहले भड़की हिंसा में जिस भीम आर्मी का हाथ बताया जा रहा है, अचानक कांग्रेस से उसकी नजदीकियों के लक्षण भी सामने आने लगे हैं। सहारनपुर हिंसा का मुख्य आरोपी चंद्रशेखर उर्फ रावण को हिमाचल प्रदेश के डलहौजी से बहुत मुश्किलों के बाद पकड़ा जा सका है। वो लगातार यूपी पुलिस की आंखों में धूल झोंककर भागता फिर रहा था। इस बीच यूपी कांग्रेस के नेता और राहुल गांधी का बहुत निकट इमरान मसूद ने हिंसा के आरोपी का साथ देकर पूरे मामले का एक नया रंग सामने ला दिया है। इमरान वही व्यक्ति है जो आम चुनाव से पहले सरेआम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की हत्या की धमकी दे चुका है। इस गुनाह के बाद उसे जेल भी जाना पड़ा था। लेकिन उसकी आपराधिक मानसिकता सामने आने के बाद से गांधी परिवार में उसकी पूछ और बढ़ चुकी है। कांग्रेसी इमरान मसूद का एक दंगाई के समर्थन में उतरना और उस आरोपी का कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश से पकड़ा जाना सिर्फ संयोग नहीं हो सकता।

यहां ये बात बता देना भी आवश्यक है कि मंदसौर की तरह राहुल गांधी ने सहारनपुर पहुंचने की भी असफल कोशिश की थी। कांग्रेस और उसकी पिछलग्गुओं को चिंता सता रही है कि जिस तरह से यूपी विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी के समर्थन में दलितों ने मतदान किया है, उससे उनकी राजनीति पर ही ताला लग गया है। इसीलिए वो भाई-भाई में आग लगाकर, हिंसा को हवा देकर अपनी राजनीतिक भूमि को फिर से हथियाने के लिए चाल पर चाल चलती जा रही है।

देश की दुश्मन कांग्रेस !
विचारकों का मानना है कि 70 साल में भारत ने चार युद्ध लड़े हैं। लेकिन पिछले तीन साल से देश जिस तरह से अंदर के दुश्मनों से लड़ रहा है, उतनी लंबी लड़ाई कभी नहीं लड़ गई। परेशानी ये है कि अंदर के इन दुश्मनों से बाहरी शक्तियों की तरह लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। कांग्रेस ने इस लड़ाई की पृष्ठभूमि 2002 से एक व्यक्ति के विरोध में तैयार की। लेकिन 2014 की असफलता के बाद उसने इसे देश विरोधी युद्ध में बदल दिया। जिस तरह से एकतरफा प्रेम में बौराया मानव एसिड अटैक कर अपनी ही चाहत के जीवन पर पूर्ण विराम लगा देता है, उसी तरह सत्ता से हटाई गई कांग्रेस भारत को ही नष्ट करने पर तुली हुई है। मोदी विरोध के नाम पर कई और विपक्षी पार्टियां भी इस राजनीतिक पाप में सहभागी बन गई हैं। चाहे दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले चर्चों पर सुनियोजित हमले हों या बिहार चुनाव से पहले असहिष्णुता का मामला चुनाव समाप्ति के साथ ये मामले भी अपने-आप शांत होते गए हैं। उसी तरह जेएनयू में भारत के टुकड़े-टुकड़े करने की नारेबाजी हो या फिर हैदराबाद में रोहित बेमुला की आत्महत्या का मामला।

इन मामलों को जिस तरह से हवा दी गई और मीडिया उस दुष्प्रचार में सहभागी बना वो सिर्फ कोई संयोग नहीं है। यही नहीं एक मात्र कांग्रेस से गठबंधन करने वाली आम आदमी पार्टी की ओर से किसानों के नाम पर बुलाई गई रैली में एक किसान को सरेआम फांसी पर लटकने दे दिया गया ताकि सरकार को घेरा जा सके। उसी तरह केंद्र सरकार को बदनाम करने के लिए OROP मामले में कांग्रेस के एक नेता का विष खाकर संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की घटना कभी भुलाई नहीं जा सकती। ये सारे उसी एसिड अटैक वाली मानसिकता की परछाई हैं। सत्ता का भोग और अपने टुकड़ों पर पलने वाले बंदियों का उपभोग करने की मानसिकता कांग्रेस को अंग्रेज विरासत में सौंपकर गए हैं।

सत्ता के लिए पाकिस्तान से भी याचना
ये भी सिर्फ संयोग नहीं हो सकता कि कांग्रेस से सत्ता छिनते ही पाकिस्तान की हरकतें बढ़ने लगती हैं। वाजपेयी सरकार के समय उसने कारगिल हड़पने की चाल चली, तो वर्तमान समय में भी वो हर हथकंडे अपनाने को तैयार है। वो तो मोदी सरकार ने जबसे आंख दिखा दिया है, तो वो बचने की राह ढूंढ रहा है। जानकारी के अनुसार, ये भी संयोग नहीं है कि सीमा पर पाकिस्तान ने अपनी गतिविधि तबसे बढ़ानी शुरू कर दीं, जब कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान से मोदी सरकार को हटाने की याचना की। उन्होंने ऐसे समय में कश्मीरी अलगाववादी ताकतों को प्रोत्साहित करने का कुकर्म किया जब भारतीय सेना उनकी नकेल कसने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही है। बिना गोली चलाए पत्थरबाजों का सामना कर रही सेना के मनोबल को गिराने का कोई प्रयास नहीं छोड़ा जा रहा है। सेना प्रमुख की तुलना जनरल डायर से की गई क्योंकि, सेना ने कश्मीरी युवाओं पर गोली चलाने की स्थिति को टालने के लिए एक पत्थरबाज को गाड़ी के आगे बिठा दिया।

देश में अशांति फैलाने के लिए गाय कटवाई !
केरल में पिछले दिनों जो कुछ हुआ उसने देश के हिंदुओं के सामने कांग्रेस का असली चेहरा सामने ला दिया है। राहुल गांधी के एक नजदीकी नेता ने सिर्फ इसलिए सरेआम गाय काट दी, क्योंकि उसे केंद्र सरकार के एक निर्णय का विरोध करना था। पकड़े जाने पर उसने साफ किया कि उसने इतना बड़ा अपराध राज्य कांग्रेस के नेतृत्व के निर्देश पर किया है। क्या किसी देश में सबसे पुरानी पार्टी बहुसंख्यक जनता की भावनाओं की इस तरह से हत्या करने का साहस दिखा सकती है। लेकिन कांग्रेस को लगा कि गाय काटने से वो मुसलमानों का समर्थन बटोर लेगी। लेकिन जब उसे लगा कि इस अपराध से देशभक्त मुसलमान भी क्रोधित हैं, तो राहुल गांधी ने अपने उस अपराधी साथी को पार्टी से निलंबित करने का भी दिखावा किया। कहने वाले तो यहां तक कहते हैं कि अगर सोनिया गांधी भारतीय संस्कृति को समझतीं तो राहुल में भी उसकी समझ अवश्य होती।

सत्ता के लिए देश का बंटवारा !
‘बांटो और राज्य करो’ की सीख कांग्रेस को अंग्रेजों से मिली है। महात्मा गांधी भारत के बंटवारे के सबसे बड़े विरोधी थे। लेकिन कांग्रेस नेताओं के स्वार्थ के चलते उन्हें सांप्रदायिक आधार पर देश का बंटवारा मानना पड़ा। जानकार बताते रहे हैं कि जवाहर लाल नेहरू सत्ता हथियाने के लिए पाकिस्तान के नाम पर तैयार हो गए। बंटवारे का दर्द जिसने झेला है, वो ही समझ सकता है। लाखों लोग मार डाले गए, लेकिन जिसे सत्ता चाहिए थी उसने शवों पर से होकर भी अपनी चाहत पूरी की। जो नींव जवाहर लाल ने डाली, राहुल-सोनिया उसी पर नये सिरे से नया महल खड़ा करने की कोशिशों में लगे हैं। लेकिन, 1947 का दौर कुछ और था, 2019 का दौर कुछ और रहेगा। ये पब्लिक जो है वो किसी की मातहत नहीं है। वो एक वोट की चोट से भारत माता की लाज बचाना जानती है, देश के सम्मान को बनाए रखना जानती है।

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