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चीनी वैज्ञानिकों के शोध का दावा, वुहान है कोरोना का उत्पत्ति केंद्र

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पूरी दुनिया में करीब साढ़े न लाख और देश में लगभग दो हजार लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी वैश्विक महामारी कोरोना की उत्पत्ति से अब परदा उठ चुका है। ये परदा कोई और नहीं बल्कि चीन के वैज्ञानिकों द्वारा प्रकाशित शोध पत्र से हुआ है। फॉक्स न्यूज के एंकर टकर कॉर्ल्सन ने अपने टॉक शो में एक रिपोर्ट प्रसारित कर इसका खुलासा किया है। इस शो के दौरान प्रसारित रिपोर्ट में बताया गया है कि पूरी दुनिया में महामारी फैलाने वाले कोरोना वायरस की उत्पत्ति वुहान की एक प्रयोगशाला में हुई है।

चीनी वैज्ञानिकों ने खुद किया इसका खुलासा

एक तरफ जहां पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के फैलाव को लेकर चीन को दोषी ठहराने पर बहस चल रही थी, वहीं चीन चुप्पी साधकर इससे बाहर निकलने के प्रयास में जुटा है। लेकिन चीन के वैज्ञानिकों के प्रकाशित शोध पत्र से यह तथ्य सामने आ गया है कि इस वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का उत्पादक देश स्वयं चीन है। कर्ल्सन ने अपने शो में हुई बहस के दौरान दक्षिण चीन प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (South china University of Technology) के वैज्ञानिक बोटाओ जिआओ और ली जिआओ की रिपोर्टों का हवाला देते हुए उस पर ध्यान दिलाया। दुनिया में फैली इस महामारी पर ध्यान आकृष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कोविड-19 मानव निर्मित वायरस है जो वुहान के प्रयोगशाला में लीक हो गया है। शोध में प्रकाशित रिपोर्ट से साफ हो गया है कि वुहान स्थित इसी प्रयोगशाला से यह वायरस पूरी दुनिया में फैला है। हालांकि कार्ल्सन ने स्वयं इस बात की पुष्टि नहीं कि लेकिन उन्होंने शोध में प्रकाशित आर्टिकिल का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि छह फरवरी को दक्षिण चीन प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर एक पेपर अपलोड किया।

कोरोना वायरस पर जैविक हथियार होने का संदेह

कुछ समय से तो कोरोना वायरस पर जैविक हथियार होने का भी संदेह जाहिर होने लगा है। कहा गया है कि कोरोना वायरस एक जैविक हथियार भी हो सकता है। यह संदेह इसलिए भी गहराया है क्योंकि हाल ही कुछ चीनी वैज्ञानिकों के एक समूह पर जैव हथियार के संबंध में जासूसी करने का आरोप लगा है। कनाडा में नेशनल माइक्रोबायोलॉजी लैब (एनएमएल) तक पहुंच बनाने का आरोप लगा है। जिन चीनी वैज्ञानिकों पर यह आरोप लगा है वे सभी घातक रोगजनक वायरस पर काम करने क लिए विख्यात हैं।

आक्रामक जैविक हथियार है कोरोना वायरस

जैविक हथियार कानून के निर्माता डॉ. फ्रांसिस बॉयल का दावा है कि यह बायो कोरोना वायरस विश्व के सबसे खतरनाक और आक्रामक जैविक हथियार है। इसके साथ ही उन्होंने डीएनए-जेनेटिक इंजीनियरिंग को भी खतरनाक जैविक हथियार बताया है। उन्होंने भी इनमें से कोरोना वायरस को चीन की प्रयोगशाला से जोड़कर बताया है।

वुहान में है सबसे उन्नत वायरस अनुसंधान प्रयोगशाला

कोरोना वायरस की उत्पत्ति केंद्र के रूप में वुहान का नाम भले ही अभी सामने आया हो लेकिन चीन के उन्नत वायरस अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में वह पहले से प्रसिद्ध है। इजरायल के एक जैविक युद्ध विशेषज्ञ डेनी शोहम के हवाले से वाशिंगटन टाइम्स ने जो रिपोर्ट पेश की है उससे साफ जाहिर है कि वायरस अनुसंधान के लिए वुहान पहले से प्रसिद्ध रहा है। साल 2015 में वुहान के एक टेलिविजन चैनल पर प्रसारित एक रिपोर्ट को रेडियो फ्री एशिया ने प्रसारित किया। उस रिपोर्ट में चीन के जिस उन्नत वायरस अनुसंधान प्रयोगशाला को दिखाया गया वास्तव में वही वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी है।चीन जैव युद्ध का अध्ययन कर चुके इजरायली सैन्य खुफिया अधिकारी डेनी शोहन ने ही द वाशिंगटन टाइम्स को बताया कि वुहान स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के कई संस्थाओं में जैविक हथियार पर अनुसंधान और विकास का कार्य काफी समय से हो रहा है।          

हथियार निर्माण और निर्यात में अविश्वसनीय रहा है चीन

बात जैविक हथियार की तैयारी की हो या फिर परमाणु हथियार के निर्माण की या फिर अवैध रूप से उसके निर्यात की, इन सब मामलों में चीन का ट्रैक रेकॉर्ड काफी खराब रहा है। चीन ने पहले भी परमाणु हथियार अवैध रूप से पाकिस्तान को दिया है। हालांकि अतीत में जैविक हथियार पर कार्य करने की बात से चीन ने इनकार कर दिया है। लेकिन वह भरोसे के लायक नहीं है। इसका खुलासा उसका अपना ही विदेश विभाग ने कर दिया है। पिछले साल की ही तो बात है जब उसका विदेश विभाग ने अपनी एक रिपोर्ट में जैविक युद्ध पर संदेह जताया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्हें संदेह है कि चीन गुप्त रूप से जैविक युद्ध कार्य में लगा हुआ है।

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