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कोरोना वायरस से लड़ने के लिए भारतीय सेना ने भी कसी कमर, 8,500 डॉक्टर और सपोर्ट स्टाफ तैयार

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भारतीय सेना ने हर मुश्किल घड़ी में आगे बढ़कर देशवासियों की मदद की है। चाहे कोई प्राकृतिक आपदा हो, बाढ़ हो, भूकंप हो या तूफान, सेना के जवानों ने हमेशा अपने जज्बे से देशवासियों की मदद की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी हमेशा भारतीय सैन्य बलों के इस जज्बे की सराहना की है। आज जब पूरा देश कोरोना वायरस की महामारी की चपेट में है, तो एक बार फिर सेना अपनी तरफ से मदद करने को तैयार है। कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज करने के लिए सशस्त्र बलों के जहां 9,000 बेड वाले अस्पताल तैयार हैं वहीं, 8,500 डॉक्टर और सपोर्ट स्टाफ भी जरूरत पड़ने पर कोरोना पीड़ितों के इलाज के लिए तैयार हैं।

आपको बता दें पिछले एक महीने से भी ज्यादा वक्त से सेना नागरिक प्रशासन की मदद कर रही है। पिछले तीन दिनों से सैन्य विमानों ने देश भर में लगभग 25 टन चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति की है। सेना विभिन्न संगठनों को पहले ही 1.5 लाख लीटर सैनिटाइजर मुहैया करा चुकी है। इसके अलावा रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) भी नैनो तकनीक के जरिए पांच परतों वाले एन-99 फेस मास्क और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) का युद्धस्तर पर निर्माण कर रहा है।

रक्षा मंत्रालय ने सेना, नौसेना और भारतीय वायुसेना के साथ-साथ डीआरडीओ, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और आयुध निर्माण बोर्ड द्वारा चिकित्सा देखभाल, क्वारंटाइन सुविधाओं और चिकित्सा उपकरणों के उत्पाद को दोगुना करने को कहा गया है। इतना ही नहीं तीनों सेनाओं को कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई के राष्ट्रीय प्रयास में अन्य मंत्रालयों के साथ मिलकर काम करने को भी कहा गया है।। डीआरडीओ से मिली जानकारी के अनुसार उसके द्वार पहले ही 10,000 एन-99 मास्क बनाए जा चुके हैं और जल्द ही उनका दैनिक उत्पादन 20,000 तक बढ़ा दिया जाएगा।

डीआरडीओ ने दिल्ली पुलिस को 40,000 फेस मास्क उपलब्ध कराए हैं। डीआरडीओ की एक प्रयोगशाला रोजाना 20,000 पीपीई बनाने की भी व्यवस्था कर रही है। साथ ही डीआरडीओ के वैज्ञानिक वेंटिलेटर में संशोधन करने की कोशिशों में लगे हुए हैं ताकि एक मशीन एक ही समय में चार रोगियों के काम आ सके।

जाहिर है कि इटली, ईरान और मलेशिया जैसे देशों से निकाले गए 1,000 से अधिक लोगों को जैसलमेर, जोधपुर, चेन्नई, मानेसर, हिंडन और मुंबई में स्थित सैन्य स्थल में एकांतवास में रखा गया है। इन सभी की क्वारंटाइन अवधि सात अप्रैल को खत्म हो जाएगी। नौसेना ने भी सिविल एडमिनिस्ट्रेशन की सहायता करने के लिए युद्धपोतों को स्टैंडबाय पर रखा है। वहीं वायुसेना ने अपना सहयोग देते हुए दिल्ली, सूरत और चंडीगढ़ से मणिपुर, नगालैंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख तक लगभग 25 टन आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति कर चुकी है।

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