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‘स्टिंग ऑपरेशन’ से बड़ा खुलासा, दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने शराब माफिया दोस्तों को पहुंचाया फायदा, सिसोदिया के हाथ में दी जाती थी दलाली, कट्टर भ्रष्टाचारी निकले केजरीवाल

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शिक्षक दिवस पर दिल्ली के शिक्षा मॉडल और जनता को लूटने का बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने अपने शराब माफिया दोस्तों को फायदा पहुंचाने के लिए जहां कमीशन में बढ़ोतरी की, वहीं छात्रों और युवाओं को एक उपभोक्ता के रूप में देखकर शराब पीने की उम्र को घटाकर 18 वर्ष कर दिया। दिल्ली बीजेपी ने ‘स्टिंग ऑपरेशन’ का वीडियो जारी कर शराब माफिया के साथ मिलकर दिल्ली की जनता को लूटने के खेल को पूरी दुनिया के सामने ला दिया है। बीजेपी ने इसके जरिए ‘आम आदमी पार्टी’ पर मोटा माल कमीशन के जरिए लेने का आरोप लगाया है। बीजेपी का दावा है कि सीबीआई की ओर से दर्ज किए गए केस में आरोपी नंबर 13 सनी मारवाह के पिता कुलविंदर मारवाह ने खुफिया कैमरे पर केजरीवाल सरकार की ओर से कमीशन लिए जाने की बात मानी है। 

स्टिंग मास्टर केजरीवाल का स्टिंग हो गया

दिल्ली बीजेपी ने सोमवार (05 सितंबर, 2022) को शिक्षक दिवस पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ‘स्टिंग ऑपरेशन’ का वीडियो जारी करते हुए कहा, ”स्टिंग मास्टर का स्टिंग हो गया है। अरविंद केजरीवाल जब मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने कहा था कि कोई भ्रष्टाचार करे तो आप उसका स्टिंग कर लेना और हमें भेज देना। आज वही हो गया है। स्टिंग में जो कंटेंट है उससे एक बात साबित होती है कि जो लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की कसम खाकर आए थे वह आम आदमी पार्टी कट्टर भ्रष्टाचारी बनकर सामने आई है।”

“पैसे फिक्स दो, जितनी मर्जी दुकानें करो, जितने में मर्जी हो बेचो”

दरअसल स्टिंग ऑपरेशन के इस वीडिया में एक आदमी बोल रहा है कि इसमें 80 प्रतिशत फायदा है। यानी एक रुपये का माल बेचने पर उसमें 80 पैसे का फायदा होता है। इसमें यह चाल चली गई है। 20 रुपये का माल लेकर जितने में मर्जी हो उतने में बेचो। बस हमें पैसे फिक्स चाहिए। इसमें वह आगे कहता है कि हमसे एक साल के 235 करोड़ रुपये लिए हैं। हमें कहा गया कि जितनी मर्जी दुकानें करो या जो मर्जी करो। ये तो बहुत कम हैं। बाकियों से तो 500-500 करोड़ रुपये तक लिए थे। जब हमने टेंडर भरा था तो सबसे कम भरा था बाकि जिसका जो टेंडर बना वो लेने पड़े। हमने कच्ची कॉलोनी का टेंडर भरा था, जहां दुकानें सस्ती हैं।

हमारा जो सेटल हो गया 6 प्रतिशत – कुलविंदर मारवाह

वीडियो में आगे कह गया है, “हम बिचौलियों को क्यों देंगे। हमारा जो सेटल हो गयी 6 प्रतिशत, जो भी तो जब आएगा तो ले जाएंगे। आप 6 प्रतिशत को आसान काम मत समझो। सुन लो आज आपके पास माल आया 100 करोड़ का, 12 करोड़ रुपये कमीशन आ गयी। 6 प्रतिशत काला हो गया। वो 6 करोड़ काला कैसे करके देंगे। ये तरीका तो बाताओ मुझे ? अब तो काला देना है। नोट ऐसे ही थोड़े ही पड़े हैं। जो देंगे उसको। भई एक कंपनी से 2 प्रतिशत से 12 प्रतिशत तक की कमीशन करी, कैसे हो गयी ?”

केजरीवाल, सिसोदिया ने माफिया दोस्तों से ली मोटी दलाली

बीजेपी ने आम आदमी पार्टी पर कमीशन के जरिए मोटा माल लेने का आरोप लगाया है। बीजेपी का दावा है कि सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में आरोपी नंबर 13 सनी मारवाह के पिता कुलविंदर मारवाह ने खुफिया कैमरे पर आप सरकार की ओर से कमीशन लेने की बात कही है। संबित पात्रा ने सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को मोटा माल कमाने और अपने मित्रों से मोटी दलाली लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि लोग दलाली देने के लिए अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के पास जाते थे।

आने वाले टाइम में और भी ऐसे वीडियो सामने आएंगे- संबित

संबित पात्रा ने कहा कि मोटी दलाली कमाकर दिल्ली को नुकसान में धकेला गया और खुद को प्रॉफिट में रखा गया। यह स्टिंग उस व्यक्ति के मुंह से है जो खुद शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के हाथ में मोटा माल देता था। दरअसल शनि मारवाह दिल्ली शराब घोटाने का मुख्य आरोपी है। संबित ने कहा कि यह वीडियो आखिरी नहीं होगा, आने वाले टाइम में और भी ऐसे वीडियो सामने आएंगे। बीजेपी ने इस दौरान दिल्ली की जनता से अपील की है कि आम लोग भी वीडियो बनाकर डालें और बिना डरे सीबीआई के पास जाएं और देश का साथ दें।

नई शराब नीति के तहत हजारों करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार

स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल जो नई शराब नीति लेकर आए और जो इस शराब नीति के अंदर हजारों करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है, ये किसी से छुपा नहीं है। दिल्ली के सीएम ने नई शराब नीति लाकर जनता के टैक्स के पैसों को बर्बाद किया है। वहीं बीजेपी नेता मनोज तिवारी ने कहा कि केजरीवाल सरकार से जितने सवाल हम करते थे, उन सभी सवालों के जवाब इन स्टिंग ऑपरेशन ने दे दिए हैं। आज ये भी स्पष्ट हो गया कि जो रेवेन्यू दिल्ली सरकार को आता था वो क्यों शराब व्यापारियों को दिया जाता था, क्योंकि वो भ्रष्टाचार में घुमकर इनके पास जाना होता था।

गौरतलब है कि दिल्ली में हुए कथित आबकारी यानी शराब बिक्री के घोटाले की सीबीआई जांच चल रही है। सीबीआई ने आबकारी विभाग देख रहे डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के घर पर छापा भी मारा था। सिसोदिया के बैंक लॉकर की जांच भी की थी। वहीं सिसोदिया और सीएम अरविंद केजरीवाल लगातार दावा कर रहे हैं कि कोई घोटाला नहीं हुआ। मनीष सिसोदिया पर शराब माफिया से सांठ-गांठ कर शराब के ठेके खुलवाने के केस दर्ज हैं। उन्होंने नियम के खिलाफ जाकर शराब के ठेके बांटे जिससे दिल्ली को सैकड़ों करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ।

आइए देखते हैं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने नई शराब नीति के तहत अपने शराब माफिया दोस्तों को फायदा पहुंचा कर किस तरह दिल्ली की जनता को लूटा है…

केजरीवाल समेत AAP को पता ही नहीं दिल्ली में कितने ठेके खुलवाए
अब जब दिल्ली की AAP सरकार, सीएम अरविंद केजरीवाल और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों से शराब के ठेके के बारे में बात की जाती है तो वो इसे छोड़कर सब बात करने लगते हैं। बच्चों को बहलाने की तरह शराब घोटाले से ध्यान हटाने के लिए विधायकों के खरीद-फरोख्त की बातें करने लगते हैं। हैरानी की बात तो यह है कि सीएम केजरीवाल से लेकर दूसरे नेताओं को ये नहीं पता कि दिल्ली में शराब के कितने ठेके दिए गए हैं। दूसरे पर झूठ बोलने का आरोप लगाने वाले केजरीवाल हर बार नई संख्या बता देते हैं। देख लीजिए वीडियो-

 

 

 

 

 

 

 

 

केजरीवाल की नई शराब नीति से सरकार को हुआ भारी घाटा

दिल्ली सरकार की पुरानी शराब नीति की तुलना में 2021-22 में मनीष सिसोदिया द्वारा लाई गई नई नीति के तहत शराब विक्रेताओं को रिटेल मार्जिन में 989% की वृद्धि हो गई। यानी नई शराब नीति लाए जाने के बाद शराब कारोबारी लगभग एक हजार प्रतिशत का मुनाफा कमा रहे थे। वहीं सरकार को नई नीति से राजस्व का घाटा हो रहा था। एक उदाहरण से समझिए नई पुरानी शराब नीति में फर्क। RK ब्रांड की शराब की 750 ml बोतल पर कारोबारी पुरानी नीति के तहत 33.35 रुपए कमा रहे थे। वहीं, नई नीति के तहत इसी बोतल पर कारोबारी 363.27 रुपए कमा रहे थे। यानी हर बोतल पर 330 रुपए ज्यादा।

नई नीति से दिल्ली सरकार को घाटा और AAP को फायदा

पुरानी नीति के तहत सरकार को 530 रुपए की एक बोतल पर 223.89 रुपए मिलते थे। नई नीति के तहत एक्साइज ड्यूटी होलसेल प्राइज का सिर्फ 1% कर दी गई। यानी ग्राहकों को 560 रुपए में मिलने वाली बोलत पर पुरानी नीति में सरकार को जहां 223.89 रुपए मिलते थे वहीं नई नीति में एक्साइज ड्यूटी होलसेल प्राइज का सिर्फ 1% कर देने से सरकार को सिर्फ 1.88 पैसा एक्साइज ड्यूटी मिली। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिल्ली में कितना बड़ा शराब घोटाला हुआ है।

नई और पुरानी शराब नीति में फर्क इस टेबल के जरिये समझिएः

पुरानी शराब नीति

750ML थोक कीमत ₹166.73
एक्साइज ड्यूटी ₹223.88
VAT ₹106.00
रिटेलर कमीश ₹ 33.39
एमआरपी ₹530.00

नई शराब नीति (लागू मार्च 2022)

750ML थोक कीमत ₹188.41
एक्साइज ड्यूटी ₹ 1.88
VAT 1% ₹ 1.90
रिटेलर मार्जिन ₹ 363.27
अतिरिक्त एक्साइज ₹ 4.54
एमआरपी ₹560.00

इस प्रकार पुरानी शराब नीति में एक बोतल पर सरकार की कमाई 329.89 रुपए थी जो नई शराब नीति में मात्र 8.32 रुपए रह गई। यानी नई नीति से प्रति बोतल सरकार को ₹321.57 का घाटा हुआ। पुरानी नीति में रिटेलर का कमीशन 33.39 था जबकि नई नीति में रिटेलर का कमीशन 363.27 हो गया अर्थात प्रति बोतल ₹330.12 का रिटेलर को फायदा को पहुंचा। इससे स्पष्ट होता है कि प्रति बोतल सरकार को जितना नुकसान होता है लगभग उतना ही बल्कि उससे भी थोड़ा ज्यादा रिटेलर को फायदा पहुंचता है। अब कोई भी आसानी से समझ सकता है कि सिसोदिया और केजरीवाल की चतुराई से तैयार की गई नई नीति से मैन्युफेक्टरर्स/ रिटेलर्स को कितना बड़ा फायदा पंहुचाया गया। अब ये फायदा मैन्युफैक्चरर को कैसे पंहुचे तो नई नीति में मैन्युफैक्चरर्स को रिटेल में भी शॉप खोलने की अनुमति दे दी गई (जो कि नियमानुसार गलत थी)।

पुरानी नीति में शराब की बिक्री प्रतिमाह 132 लाख लीटर थी जो नई नीति में 245 लाख लीटर हो गई

पुरानी नीति में जहां शराब की बिक्री प्रतिमाह 132 लाख लीटर थी तो नई शराब नीति में प्रतिमाह शराब की बिक्री 245 लाख लीटर हो गई। शराब की बिक्री को बढ़ाने के लिए केजरीवाल सरकार ने बाकायदा तीन प्रमुख कदम उठाए-

1. पीने वाले की उम्र घटाकर 18 साल कर दिया।

2. समय बढाकर रात्रि 3 बजे तक कर दिया गया।

3. ड्राई डे 31 से कम करके सिर्फ़ 3 दिन कर दिए।

जिससे शराब की खपत कम से कम 8-10 % और बढ़ गई।

नई शराब नीति के जरिये की गई मनी लॉन्ड्रिंग

नई शराब नीति के जरिये मनी लॉन्ड्रिंग भी की गई। कई बड़े शराब करोबारियों ने अपनी दुकानों पर एक के साथ एक फ्री बोतल का आफर दिया। यानी शराब की किसी एक बोतल की कीमत 500 रुपए है तो लोगों को 500 रुपये में एक बोतल के साथ एक फ्री दिया गया। अब सरकार की नजर में तो एक बोतल बिका लेकिन कारोबारी ने दो बोतल के दाम यानी 1000 रुपए बैंक में जमा किए। यहां सवाल यह उठता है कि जब जनता से 500 रुपए लिए गए तो 1000 रुपए कैसे बैंक में जमा कराए गए। यानी यहां काला धन को सफेद किया गया। जांच एजेंसियां इस पहलू से भी मामले में जांच कर रही हैं। इन्हीं गोरखधंधे की वजह से दिल्ली में शराब की बिक्री करने वाले कई छोटे वेंडर्स दुकानें बंद कर चुके हैं। उनका आरोप है कि बड़े कारोबारी अपने यहां भारी छूट देते रहे हैं और ऐसे में उनके लिए कारोबार कर पाना लगभग नामुमकिन हो गया है।

दिल्ली के मुख्य सचिव ने उपराज्यपाल को लिखा था पत्र 

अब इन बातों से यह साफ हो जाता है कि नई शराब नीति कितना बड़ा घोटाला है और केजरीवाल गैंग में इस नीति की आड़ में कितनी कमाई की होगी। यह वजह है दिल्ली के मुख्य सचिव ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर इसमें हो रही गड़बड़ी की तरफ ध्यान दिलाया और जांच की बात कही। अब इस मामले की जांच कर रही एजेंसियों को शक है कि सिसोदिया और केजरीवाल ने अगर शराब कारोबारियों को इतना लाभ पहुंचाया तो आम आदमी पार्टी के नेताओं को रिश्वत के तौर पर पैसे मिल रहे होंगे। बीजेपी इसीलिए लगातार आरोप लगा रही है कि यह हजारों करोड़ रुपये का घोटाला है।

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए करोड़ों के शराब घोटाले में जल्द होगी ED की एंट्री
दिल्ली की एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी-घोटाले के आरोप में सीबीआई ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। इससे साथ ही सीबीआई ने सिसोदिया के घर समेत 31 जगहों पर छापेमारी भी की थी। अब इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री भी होने वाली है, क्योंकि सीबीआई ने एफआईआर की कॉपी और दस्तावेज इस एजेंसी से भी साझा किए हैं, ताकि करोड़ों के घोटाले में मनी लांड्रिंग की संभावनाओं का भी पता लग सके। माना जा रहा है कि जल्द ही ED भी सिसोदिया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर सकती है। सीबीआई पड़ताल में सामने आया है कि अरुण रामचंद्र पिल्लई, विजय नायर के माध्यम से समीर महेंद्रू से आरोपी लोक सेवकों को आगे स्थानांतरित करने के लिए अनुचित धन एकत्र करता था। अर्जुन पांडे नाम के एक व्यक्ति ने विजय नायर की ओर से समीर महेंद्रू से लगभग 2-4 करोड़ रुपये की बड़ी नकद राशि एकत्र की।सिसोदिया के करीबी शराब लाइसेंसधारियों से एकत्रित करते थे अनुचित आर्थिक लाभ
सीबीआई के मुताबिक मनोरंजन और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ‘ओनली मच लाउडर’ के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विजय नायर, पर्नोड रिकार्ड के पूर्व कर्मचारी मनोज राय, ब्रिंडको स्पिरिट्स के मालिक अमनदीप ढल तथा इंडोस्पिरिट्स के मालिक समीर महेंद्रू सक्रिय रूप से पिछले साल नवंबर में लाई गई आबकारी नीति का निर्धारण और क्रियान्वयन में अनियमितताओं में शामिल थे। एजेंसी ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम में बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमित अरोड़ा, दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे, सिसोदिया के ‘करीबी सहयोगी’ हैं और आरोपी लोक सेवकों के लिए ‘शराब लाइसेंसधारियों से एकत्र किए गए अनुचित आर्थिक लाभ के प्रबंधन और स्थानांतरण करने में सक्रिय रूप से शामिल थे।दिल्ली सरकार ने नई एक्साइज पॉलिसी में 100 प्रतिशत दुकानें निजी हाथों में सौंप दीं
दरअसल, दिल्ली सरकार के शराब घोटाले का खेल पिछले साल ही शुरू हो गया था। सरकार ने 17 नवंबर 2021 को दिल्ली में नई एक्साइज पॉलिसी लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए। हर जोन में 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह कुल मिलाकर 849 दुकानें खोलने की नीति थी। नई नीति लागू होने से पहले तक दिल्ली में शराब की 60% दुकानें सरकारी और 40% प्राइवेट थीं, लेकिन नई नीति लागू होने के बाद 100% दुकानें निजी हाथों को सौंप दी गई। आरोप लगे तो दिल्ली सरकार ने खोखला तर्क गढ़ा कि इससे रेवेन्यू 3,500 करोड़ रुपये बढ़ने की उम्मीद है। अब 1 सितंबर से फिर से पुरानी एक्साइज पॉलिसी लागू हो जाएगी। इसके बाद शराब की दुकानें सरकारी एजेंसियां ही चलाएंगी।लाइसेंस शुल्क में छूट/कमी, बिना मंजूरी के एल-1 लाइसेंस के विस्तार में हुईं अनियमितताएं
सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि शुक्रवार को मध्य दिल्ली में सिसोदिया के आधिकारिक आवास, दिल्ली, गुरुग्राम, चंडीगढ़, मुंबई, हैदराबाद, लखनऊ और बेंगलुरु सहित 31 स्थानों पर तलाशी ली गई, जिससे अब तक आपत्तिजनक दस्तावेज, विभिन्न कागजात, डिजिटल रिकॉर्ड आदि बरामद हुए हैं। प्रवक्ता ने बताया कि यह जांच में यह सामने आया है कि आबकारी नीति में संशोधन, लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ देने, लाइसेंस शुल्क में छूट/कमी, बिना मंजूरी के एल-1 लाइसेंस के विस्तार में अनियमितताएं की गईं। उन्होंने कहा कि यह भी आरोप लगाया गया था कि इन कृत्यों से अवैध लाभ को निजी पक्षों द्वारा संबंधित लोक सेवकों को उनके खातों की पुस्तकों में गलत प्रविष्टियां देकर बदल दिया गया था। प्राथमिकी में डिप्टी सीएम को आरोपी नंबर 1 के रूप में नामित किया गया है।मुख्य सचिव कुमार की गोपनीय रिपोर्ट पर एलजी ने की थी सीबीआई जांच की सिफारिश
आपको बता दें कि दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और अन्य के खिलाफ ये पूरी कार्रवाई मुख्य सचिव नरेश कुमार की उस रिपोर्ट पर हो रही है, जिसमें एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया गया है। ये रिपोर्ट दो महीने पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्‍सेना को सौंपी गई थी। मुख्य सचिव कुमार की रिपोर्ट पर एलजी ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इस रिपोर्ट में GNCTD एक्ट 1991, ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993, दिल्ली एक्साइज एक्ट 2009 और दिल्ली एक्साइज रूल्स 2010 के नियमों का उल्लंघन पाया गया था। सीबीआई ने अब 8 आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया है. यानी, ये लोग अब देश छोड़कर नहीं जा सकते।

शराब घोटाले में चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार की विस्तृत जांच में मिलीं ये सात ‘खामियां’

1. मनीष सिसोदिया के निर्देश पर एक्साइज विभाग ने एयरपोर्ट जोन के एल-1 बिडर को 30 करोड़ रुपये रिफंड करने का निर्णय लिया। बिडर एयरपोर्ट अथॉरिटीज से जरूरी एनओसी नहीं ले पाया था। ऐसे में उसके द्वारा जमा कराया गया सिक्योरिटी डिपॉजिट सरकारी खाते में जमा हो जाना चाहिए था, लेकिन बिडर को वह पैसा लौटा दिया गया।
2. सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना एक्साइज विभाग ने 8 नवंबर 2021 को एक आदेश जारी करके विदेशी शराब के रेट कैलकुलेशन का फॉर्मूला बदल दिया और बियर के प्रत्येक केस पर लगने वाली 50 रुपए की इंपोर्ट पास फीस को हटाकर लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकार को रेवेन्यू का भारी नुकसान हुआ।
3. टेंडर दस्‍तावेजों के प्रावधानों को हल्का करके L7Z (रिटेल) लाइसेंसियों को वित्‍तीय फायदा पहुंचाया गया, जबकि लाइसेंस फी, ब्‍याज और पेनाल्‍टी न चुकाने पर ऐक्‍शन होना चाहिए था।
4. सरकार ने दिल्ली के अन्य व्यवसायियों के हितों को दरकिनार करते हुए केवल शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए कोविड काल में हुए नुकसान की भरपाई के नाम पर उनकी 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी, जबकि टेंडर दस्तावेजों में ऐसे किसी आधार पर शराब विक्रेताओं को लाइसेंस फीस में इस तरह की छूट या मुआवजा देने का कहीं कोई प्रावधान नहीं था।5. सरकार ने बिना किसी ठोस आधार के और किसी के साथ चर्चा किए बिना नई पॉलिसी के तहत हर वॉर्ड में शराब की कम से कम दो दुकानें खोलने की शर्त टेंडर में रख दी। बाद में एक्साइज विभाग ने सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना नॉन कन्फर्मिंग वॉर्डों के बजाय कन्फर्मिंग वॉर्डों में लाइसेंसधारकों को अतिरिक्त दुकानें खोलने की इजाजत दे दी।
6. सोशल मीडिया, बैनरों और होर्डिंग्‍स के जरिए शराब को बढ़ावा दे रहे लाइसेंसियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह दिल्‍ली एक्‍साइज नियमों, 2010 के नियम 26 और 27 का उल्‍लंघन है।
7. लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी किए बिना लाइसेंसधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए उनका ऑपरेशनल पीरियड पहले 1 अप्रैल 2022 से बढ़ाकर 31 मई 2022 तक किया गया और फिर इसे 1 जून 2022 से बढ़ाकर 31 जुलाई 2022 तक कर दिया गया। इसके लिए सक्षम अथॉरिटी यानी कैबिनेट और एलजी से भी कोई मंजूरी नहीं ली गई। बाद में आनन फानन में 14 जुलाई को कैबिनेट की बैठक बुलाकर ऐसे कई गैरकानूनी फैसलों को कानूनी जामा पहनाने का काम किया गया। शराब की बिक्री में बढ़ोतरी होने के बावजूद रेवेन्यू में बढ़ोतरी होने के बजाय 37.51 पर्सेंट कम रेवेन्यू मिला।कैसे फंसे सिसोदिया… कोरोना के बहाने शराब ठेकेदारों के 144.36 करोड़ रुपये माफ कराए
जनमानस की यह जानने में दिलचस्पी जरूर होगी कि आखिर शातिर खिलाड़ी मनीष सिसोदिया इस सारे खेल में कैसे घिर गए। दरअसल, मुख्य सचिव की रिपोर्ट बताती है कि एक्साइज डिपार्टमेंट के प्रभारी होने के नाते मनीष सिसोदिया ने जानबूझकर ऐसे फैसले लिए। इसके आधार पर एलजी ने पाया कि आबकारी नीति को लागू करने में किस प्रकार की वित्तीय गड़बड़ियां हुईं। सिसोदिया पर एक्साइज पॉलिसी के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है. मुख्य सचिव की रिपोर्ट में कहा गया था कि सिसोदिया ने कथित तौर पर टेंडर दिए जाने के बाद भी शराब लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इसी रिपोर्ट में बताया गया कि शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए सिसोदिया के आदेश पर एक्साइज पॉलिसी के जरिए कोरोना के बहाने शराब ठेकेदारों के 144.36 करोड़ रुपये माफ किए गए।शराब कारोबारियों को करोड़ों का फायदा देने के लिए नियमों को बौना साबित किया

  • एक्साइज डिपार्टमेंट ने एयरपोर्ट जोन में L1 लाइसेंसधारी को 30 करोड़ रुपये वापस कर दिए, क्योंकि उसे एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से दुकान खोलने की अनुमति नहीं मिली थी। नियमानुसार ये रकम जब्त की जानी चाहिए थी।
  • विदेशों से आने वाली बीयर पर 50 रुपये प्रति केस के हिसाब से रकम ली जाती थी। इस फैसले को बिना किसी मंजूरी के वापस ले लिया गया। इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
  • सिसोदिया ने कैबिनेट तक को अंधेरे में रखा। शराब कारोबारियों को लाइसेंस फीस में 144.36 करोड़ रुपये की छूट दे दी गई। इसके लिए कोरोना का बहाना बनाया गया। इस छूट के लिए कैबिनेट को लूप में नहीं रखा गया, बल्कि मंत्री स्तर पर ही फैसला ले लिया गया।
  • इतना ही नहीं, आरोप ये भी हैं कि L7Z और L1 लाइसेंसधारियों का लाइसेंस पहले 1 अप्रैल से 31 मई और फिर 1 जून से 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया और इसके लिए एलजी की मंजूरी भी नहीं ली गई।

FIR का फेर: मनीष के करीबियों को पांच करोड़ शराब कारोबारी समीर महेंद्रू ने दिए

  • सीबीआई की एफआईआर में 15 आरोपियों में सिसोदिया पहले नंबर पर यानी मुख्य आरोपी हैं। एजेंसी के मुताबिक, अब तक की जांच में सामने आया है कि शराब कारोबारी समीर महेंद्रू एक्साइज पॉलिसी बनाने और उसे लागू करने में हुई कथित अनियमितताओं में शामिल थे।
  • सीबीआई के मुताबिक सिसोदिया के करीबी सहयोगियों को शराब व्यापारी समीर महेंद्रू ने 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।
  • यही नहीं प्राथमिकी में सिसोदिया के तीन और करीबियों- अमित अरोड़ा (बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर), दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे का नाम भी शामिल है।
  • आरोप है कि इन्होंने आरोपी सरकारी अफसरों की मदद से शराब लाइसेंसधारियों से पैसा इकट्ठा किया और उसे दूसरी जगह डायवर्ट किया।
  • सीबीआई ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया है। इनमें तीन पूर्व सरकारी अफसर एजी कृष्णा (पूर्व एक्साइज कमिश्नर), आनंद तिवारी (पूर्व डिप्टी एक्साइज कमिश्नर) और पंकज भटनागर (पूर्व असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर) का नाम भी शामिल है।
  • सीबीआई की एफआईआर में कुल 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जिसमें मनीष सिसोदिया, तीन पूर्व सरकारी अफसर, 9 कारोबारी और दो कंपनियों के नाम शामिल हैं।

Time Line : डिप्टी सीएम पर FIR के बाद आबकारी आयुक्त समेत दो अफसर निलंबित

  1. एलजी की सिफारिश के बाद सीबीआई ने प्रारंभिक जांच की और 17 अगस्त को इस मामले में एफआईआर दर्ज की।
  2. सीबीआई ने दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद सहित विभिन्न स्थानों पर तलाशी लेने के बाद 13 व्यक्तियों, दो कंपनियों और ‘अन्य अज्ञात लोकसेवकों तथा निजी व्यक्तियों’ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
  3. सीबीआई ने शुक्रवार (19 अगस्त) को सिसोदिया के घर समेत 31 जगहों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में कई ऐसे दस्तावेज मिले, जिससे सिसोदिया घिरते नजर आ रहे हैं।
  4. सीबीआई ने 21 अगस्त को तीन आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाया था। इनसे वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी ली गई। आरोपियों के बयान दर्ज किए गए हैं।
  5. अधिकारियों के मुताबिक तीनों आरोपियों से लगभग 12 घंटे तक पूछताछ की गई थी। कुछ आरोपियों को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

6. सीबीआई की छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के एग्जामिनेशन के बाद दूसरे आरोपियों को भी समन जारी किया जाएगा।

7.दिल्ली शराब लाइसेंस घोटाले की जांच के दायरे में एक दर्जन से अधिक स्टैंडअप कॉमेडियन, हैदराबाद से जुड़े शराब के थोक और खुदरा व्यापारियों का एक ग्रुप और मुंबई के समान पते वाली कॉरपोरेट संस्थाएं सीबीआई के रडार पर हैं।

8. कुछ सेवारत और पूर्व अधिकारी, सोशल मीडिया पर अति सक्रिय रहने वाले लोग, घुड़दौड़, सट्टेबाजी और ऑनलाइन गेमिंग की गतिविधियों में लगे व्यक्ति और कंपनियां भी जांच के दायरे में हैं।

9. अभी 22 अगस्त को गृह मंत्रालय बड़ी कार्रवाई करते हुए शराब घोटाले के आरोप में तत्कालीन आबकारी आयुक्त अरवा गोपी कृष्णा और डिप्टी कमिश्नर आनंद तिवारी को निलंबित कर दिया है।

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