जुलाई 2012 का वह मंजर देश की स्मृति में आज भी ताजा है, जब ग्रिड फेल होने से उत्तर भारत के करीब 60 करोड़ नागरिक भीषण अंधेरे में डूब गए थे। चरमराती ट्रांसमिशन लाइनें, भारी घाटे में डूबी बिजली वितरण कंपनियां और अघोषित कटौती भारत की नियति मान ली गई थी। वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने ऊर्जा क्षेत्र में एक अभूतपूर्व परिवर्तन देखा। नीतिगत सुस्ती को समाप्त कर ‘एक देश, एक ग्रिड’ के निर्माण से लेकर आम आदमी की छत पर सौर ऊर्जा तक, और वैश्विक दबावों के बीच स्वतंत्र विदेश नीति से लेकर ग्रीन हाइड्रोजन, परमाणु ऊर्जा, घरेलू विनिर्माण, हेरिटेज शहरों, तैरते व नहरों पर लगे सोलर प्लांट, बंजर रेगिस्तान में विशाल बिजली घर, सीमांत चौकियों पर रोशनी, ई-कुकिंग, हाई-टेक सुपर पावर लाइनें, थोरियम तकनीक और यूरोप तक ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर तक, भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के हर मोर्चे पर आत्मनिर्भरता हासिल की है। आज भारत न केवल अपने नागरिकों को चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध करा रहा है, बल्कि विश्व मंच पर ऊर्जा महाशक्ति बनकर उभरा है।
60 करोड़ को अंधेरे से मुक्ति: एक ग्रिड से बंधा पूरा देश, अब पड़ोसियों को भी बेच रहे बिजली
जुलाई 2012 में ग्रिड फेल होने से उत्तर भारत के 60 करोड़ लोग जिस भीषण ब्लैकआउट में डूब गए थे, उससे देश को हमेशा के लिए मुक्ति दिलाना मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी। 2014 से पहले बिजली की भारी किल्लत और राज्यों के बीच ट्रांसमिशन नेटवर्क का अभाव आम बात थी। सरकार ने आते ही ग्रिड एकीकरण को मिशन मोड में लिया और ‘वन नेशन, वन ग्रिड, वन फ्रीक्वेंसी’ के संकल्प को जमीन पर उतारकर 60 करोड़ नागरिकों के जीवन में 24 घंटे निर्बाध रोशनी सुनिश्चित की। बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए ‘उदय’ योजना लागू की गई, जिससे पीक पावर डेफिसिट शून्य के करीब पहुंच गया। बिजली उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि का ही परिणाम है कि कभी ऊर्जा संकट से जूझने वाला भारत आज नेपाल, बांग्लादेश और भूटान जैसे पड़ोसी देशों को निर्बाध बिजली निर्यात कर रहा है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज करते हुए देश की सौर क्षमता 2014 के महज 2.8 गीगावाट से 50 गुना से अधिक बढ़कर 143 गीगावाट के पार पहुंच चुकी है, जिसने भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा को अभूतपूर्व नई रफ्तार दी है।
क्या आप जानते हैं?
भारत में 2012 में वर्ल्ड का सबसे बड़ा दो दिन का ब्लैकआउट (पावर ग्रिड फेलियर) हुआ था, जिसमें
यूपी, दिल्ली पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर के 60 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे और ये वैश्विक शर्मदगी का कारण बनी।कांग्रेस ने सुशील कुमार शिंदे को उसी दिन…
— Himanshu Mishra(नीम करोली बाबा का दास) (@himanshumi2911) March 28, 2026
बिजली बिल का झंझट खत्म: पीएम सूर्य घर योजना से अब छत पर बिजली बनाकर पैसे कमा रहा आम आदमी
मोदी सरकार ने ऊर्जा क्रांति को केवल बड़े पावर प्लांटों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे आम नागरिक की छत तक पहुंचा दिया। 75,000 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ ने आम आदमी की भूमिका को बिजली उपभोक्ता से बदलकर बिजली उत्पादक में बदल दिया है। धूप से बिजली, बिजली से बचत के मंत्र के साथ देश भर में 30 लाख से अधिक घर इस योजना से जुड़ चुके हैं और 12.5 लाख से अधिक परिवारों का बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो चुका है। लाभार्थियों को 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की सीधी सब्सिडी सीधे बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। इस योजना से परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल रही है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर वे आय अर्जित कर रहे हैं। इससे पहले ‘सौभाग्य’ योजना से 2.8 करोड़ घरों तक पहली बार रोशनी पहुंची और 37 करोड़ से अधिक उजाला एलईडी बल्बों से आम जनता के हजारों करोड़ रुपये बचे।
धूप से बिजली, बिजली से बचत – पीएम सूर्य घर योजना से 30 लाख से अधिक घर जुड़े और 12.5 लाख परिवारों का बिजली बिल हुआ शून्य।#PMSuryaGhar #SolarEnergy #RooftopSolar #RenewableEnergy #NewIndia #ViksitBharat pic.twitter.com/5AjoVBMaAv
— MyGov Hindi (@MyGovHindi) March 16, 2026
बिजली कटौती पर कंपनियों को जुर्माना: 24 घंटे निर्बाध बिजली पाना बना नागरिक का कानूनी अधिकार
बिजली कंपनियों की मनमानी और अघोषित कटौती पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार ने पहली बार देश के उपभोक्ताओं को कानूनी अधिकार दिए। ‘विद्युत उपभोक्ता अधिकार नियम’ के तहत चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली पाना हर नागरिक का बुनियादी हक तय किया गया। यदि बिजली कंपनियां बिना पूर्व सूचना के अघोषित कटौती करती हैं, तो उन्हें उपभोक्ताओं को मुआवजा देना अनिवार्य किया गया है। नए कनेक्शन के लिए सख्त समय-सीमा तय की गई और छत पर सोलर पैनल लगाने की मंजूरी से लेकर मीटरिंग तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर आम उपभोक्ता को सशक्त किया गया।
दिन में सस्ती और रात में संतुलित बिजली: नए टैरिफ नियमों से आम जनता के बिल में सीधी राहत
सौर ऊर्जा की प्रचुरता का सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं और छोटे उद्योगों तक पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने ‘टाइम ऑफ डे’ (ToD) टैरिफ व्यवस्था लागू की। इस नई व्यवस्था के तहत दिन के समय, जब सौर ऊर्जा का उत्पादन चरम पर होता है, बिजली की दरें सामान्य दरों से 10% से 20% तक सस्ती कर दी गई हैं। आम नागरिक दिन के समय कपड़े धोने, पानी चढ़ाने या कारखानों में मशीनों का संचालन कर अपने बिजली बिल में सीधी बचत कर रहे हैं। इससे न केवल जनता की जेब पर खर्च घटा है, बल्कि रात के समय ग्रिड पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी संतुलित हुआ है।
खेतों में सोलर क्रांति: पीएम-कुसुम से डीजल पंपों का खर्च शून्य, किसान बने ऊर्जादाता
भारत में खेती के लिए रात की अनिश्चित बिजली और महंगे डीजल पंपों पर निर्भरता दशकों पुरानी समस्या थी। मोदी सरकार की ‘पीएम-कुसुम’ योजना ने देश के अन्नदाता को आत्मनिर्भर ऊर्जादाता बना दिया। सौर ऊर्जा से सशक्त हो रहे किसानों के लिए पीएम-कुसुम योजना एक वरदान साबित हुई है, जिसके तहत अब तक 21 लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिल चुका है और इससे देश की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में भारी इजाफा हुआ है। सिंचाई के लिए महंगे डीजल पर किसानों की निर्भरता और खर्च लगभग शून्य हो गया है। इतना ही नहीं, किसानों को अपनी बंजर या अनुपयोगी जमीन पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने और अतिरिक्त बिजली को ग्रिड को बेचकर निश्चित मासिक आय अर्जित करने का अवसर मिला। इससे दिन के समय खेतों को निर्बाध बिजली मिलने लगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया संबल प्राप्त हुआ।

आजादी के 70 साल बाद मिला उजाला: 18 हजार अंधेरे गांवों और दुर्गम सरहदों तक पहुंची रोशनी
वर्ष 2014 तक देश के 18,000 से अधिक गांव आजादी के दशकों बाद भी घने अंधेरे में जीने को विवश थे। मोदी सरकार ने ‘दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना’ के तहत इन सभी दुर्गम गांवों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूर्ण कर ऐतिहासिक काम किया। मणिपुर के सुदूर लेसांग गांव से लेकर कश्मीर और पूर्वोत्तर की दुर्गम पहाड़ियों तक बिजली के खंभे खड़े किए गए। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से लद्दाख और सियाचिन क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए श्रीनगर-कारगिल-लेह ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण किया गया, जिससे सीमावर्ती इलाकों और सुरक्षा बलों को माइनस डिग्री तापमान में भी निर्बाध बिजली मिलने लगी।

शून्य से नीचे तापमान में भी चौबीसों घंटे बिजली: चीन सीमा के अग्रिम चौकियों और वाइब्रेंट गांवों तक पहुंचा सौर कवच
देश की सीमाओं पर तैनात वीर जवानों और सीमावर्ती नागरिकों के लिए मोदी सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का अनिवार्य अंग बनाया। ‘वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम’ के माध्यम से लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के 600 से अधिक सीमावर्ती गांवों में स्टैंडअलोन सोलर सिस्टम और माइक्रो-ग्रिड लगाकर चौबीसों घंटे बिजली सुनिश्चित की गई। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तैनात अग्रिम चौकियों पर पुराने डीजल जनरेटरों को हटाकर इंसुलेटेड सोलर शेल्टर और सोलर-विंड हाइब्रिड सिस्टम स्थापित किए गए। इससे माइनस 30 से 40 डिग्री की कड़ाके की ठंड में भी जवानों के हीटिंग, संचार और निगरानी उपकरण बिना किसी रुकावट के लगातार काम कर रहे हैं, जिससे सीमांत इलाकों से पलायन थमा है और सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य बनी है।
हजारों किलोमीटर दूर बिना बिजली बर्बाद हुए करंट की सप्लाई: दुनिया की सबसे लंबी ‘सुपर पावर लाइनें’
देश के एक हिस्से में बनने वाली बिजली को बिना रास्ते में नष्ट हुए हजारों किलोमीटर दूर दूसरे कोने तक पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने अल्ट्रा हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (UHVDC) तकनीक का विस्तार किया। 800 किलोवोल्ट की विशेष ट्रांसमिशन लाइनों (जैसे चंपा-कुरुक्षेत्र और रायगढ़-पुगलूर कॉरिडोर) के जरिए पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत की बिजली उत्तर भारत तक न्यूनतम नुकसान के साथ पहुंच रही है। इसके साथ ही पूरी तरह स्वचालित ‘नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर’ (NLDC) की स्थापना की गई, जो पूरे देश में बिजली की मांग और आपूर्ति को सेकंड के हिस्से में संतुलित कर किसी भी ग्रिड फेल्योर के खतरे को पूरी तरह समाप्त कर देता है।
बिजली चोरी और गलत बिलिंग पर रोक: 25 करोड़ स्मार्ट मीटर और साइबर सुरक्षा का मजबूत कवच
बिजली वितरण क्षेत्र में दशकों से चली आ रही बिजली चोरी, मीटर रीडर की गड़बड़ियों और भारी लाइन नुकसान को खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने व्यापक सुधार लागू किए। इसके तहत देश भर में 25 करोड़ स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाने का अभियान शुरू हुआ, जिसमें से करोड़ों स्मार्ट मीटर सफलतापूर्वक सक्रिय हो चुके हैं। इससे उपभोक्ताओं को मोबाइल की तरह अपनी बिजली खपत पर सीधी नजर रखने और सटीक बिलिंग की सुविधा मिली। वितरण कंपनियों का एटीएंडसी (AT&C) नुकसान घटकर करीब 15% के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया। इसके साथ ही देश के पावर ग्रिड को विदेशी साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए विशेष तकनीकी सुरक्षा तंत्र स्थापित किया गया, जिससे राष्ट्रीय ग्रिड नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित हो गया।
5-स्टार उपकरण और कम बिजली खपत: सरकारी मानकों से मध्यम वर्ग के हजारों करोड़ बचे
केवल बिजली का उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं था, बल्कि उपकरणों की बिजली खपत घटाकर आम जनता के पैसे बचाना भी आवश्यक था। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के स्टार लेबलिंग कार्यक्रम के जरिए एसी, फ्रिज, पंखे और टीवी जैसे घरेलू उपकरणों पर कड़े ऊर्जा मानक लागू किए गए। 5-स्टार और इनवर्टर तकनीक के अनिवार्य होने से घरों में बिजली की खपत में भारी कमी आई, जिससे आम परिवारों के मासिक बिजली बिल आधे रह गए। इसके अलावा बड़े कारखानों और उद्योगों के लिए अनिवार्य ऊर्जा बचत लक्ष्य तय किए गए, जिससे देश भर में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बिजली की प्रत्यक्ष बचत हुई।
बिजली बचाना बना जन आंदोलन: ‘मिशन लाइफ’ से दैनिक जीवन में घटा बिजली और कार्बन का खर्च
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘मिशन लाइफ’ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) ने ऊर्जा सुरक्षा को सरकारी फाइलों से बाहर निकालकर देश के 140 करोड़ नागरिकों के दैनिक जीवन की आदत बना दिया। घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक संस्थानों में एसी का मानक तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तय करने की राष्ट्रव्यापी मुहिम चलाई गई। बेवजह जलती लाइटों को बंद करने, ऊर्जा-कुशल उपकरणों को अपनाने और बिजली की एक-एक यूनिट का सदुपयोग करने की सोच से देश भर में करोड़ों यूनिट बिजली की बचत हुई। जनभागीदारी के इस अनूठे मॉडल ने दिखा दिया कि आम नागरिक भी अपनी छोटी-छोटी आदतों से देश के ऊर्जा चक्र को मजबूत बना सकता है।
Mission LiFE has generated many positive changes. India has taken the lead in efforts like the International Solar Alliance, Global Biofuel Alliance and more. pic.twitter.com/QzZlPiHWwT
— Narendra Modi (@narendramodi) September 16, 2024
बंजर रेगिस्तान बने दुनिया के सबसे बड़े बिजली घर: अल्ट्रा मेगा सोलर पार्कों से बदला बंजर जमीन का भूगोल
जिस बंजर और तपती जमीन पर घास का तिनका नहीं उगता था, उसे मोदी सरकार ने दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा केंद्रों में बदल दिया। राजस्थान का भडला सोलर पार्क 2,245 मेगावाट क्षमता के साथ विश्व के सबसे बड़े सोलर पार्कों में सिरमौर बना। कर्नाटक के पावागढ़ में बंजर भूमि पर स्थानीय किसानों से जमीन लीज पर लेकर 2,050 मेगावाट का विशाल सोलर पार्क स्थापित किया गया, जिससे किसानों को बिना जमीन बेचे नियमित वार्षिक किराया मिल रहा है। ‘अल्ट्रा मेगा रिन्यूएबल एनर्जी पावर पार्क्स’ नीति के तहत देश भर में 50 से अधिक विशाल सौर पार्कों को मंजूरी दी गई, जिसने भारत को वैश्विक स्तर पर बड़े सौर पार्कों की राजधानी बना दिया।
घोटालों और किल्लत के दौर का अंत: खुली ई-नीलामी से 100 करोड़ टन कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन
वर्ष 2014 से पहले ‘कोल ब्लॉक आवंटन घोटालों’ और पावर प्लांटों में कोयले के सूखे ने देश की बिजली व्यवस्था को ठप कर दिया था। मोदी सरकार ने कोयला खदानों के आवंटन को पूरी तरह पारदर्शी ई-नीलामी में बदलकर नीतिगत शुचिता स्थापित की। आधुनिक तकनीकों और पारदर्शी नीतियों के बल पर देश का घरेलू कोयला उत्पादन लगातार 1,000 मिलियन टन (100 करोड़ टन) के ऐतिहासिक स्तर को पार बनाए हुए है। इस कदम से न केवल आयातित कोयले पर विदेशी मुद्रा की भारी बचत हुई, बल्कि बिजली संयंत्रों में कोयले का पुख्ता स्टॉक सुनिश्चित हुआ, जिससे देश में बिजली संकट का डर सदा के लिए खत्म हो गया।
कांग्रेस सरकार ने बनाया था कोयला घोटाले का रिकॉर्ड…
मोदी सरकार ने बनाया कोयला उत्पादन का रिकॉर्ड। pic.twitter.com/0hMxLJoUYq
— BJP (@BJP4India) March 23, 2025
विदेशी दबावों के आगे नहीं झुका भारत: स्वतंत्र तेल कूटनीति से देश में नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
वैश्विक उथल-पुथल, रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य-पूर्व के तनाव के समय जब दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब मोदी सरकार ने पश्चिमी देशों के कड़े दबाव को दरकिनार करते हुए ‘राष्ट्र प्रथम’ का मार्ग चुना। 140 करोड़ भारतीयों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए भारत ने स्वतंत्र ऊर्जा कूटनीति अपनाई और रियायती दरों पर कच्चे तेल की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित की। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार किया गया और तेल आयात के स्रोतों को 39 से अधिक देशों में विविधता दी गई। रुपये में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार शुरू कर भारत ने वैश्विक स्तर पर आर्थिक संप्रभुता का सशक्त उदाहरण पेश किया, जिससे देश में महंगाई नियंत्रित रही।
भारत की अपनी परमाणु तकनीक: स्वदेशी 700 मेगावाट रिएक्टरों से चौबीसों घंटे पक्की बिजली
सौर और पवन ऊर्जा के साथ-साथ हर मौसम में चौबीसों घंटे बिना रुके मिलने वाली बिजली के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक फैसले लिए गए। काकरापार (गुजरात) में भारत के पहले पूर्णतः स्वदेशी 700 मेगावाट प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (KAPP-3 और KAPP-4) का सफल व्यावसायिक संचालन शुरू कर भारत ने अपनी उन्नत वैज्ञानिक क्षमता सिद्ध की। मोदी सरकार ने एक साथ 10 नए स्वदेशी परमाणु रिएक्टरों के निर्माण को फ्लीट मोड में गति दी और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के विकास की राह खोली। इस साहसिक कदम ने देश की परमाणु बिजली क्षमता को 8,700 मेगावाट से अधिक पहुंचाते हुए प्रदूषण मुक्त और कभी न रुकने वाली बिजली का पक्का आधार तैयार किया है।
दुनिया को यूरेनियम की फिक्र, भारत के पास है थोरियम का खजाना: कलपक्कम से शुरू हुआ परमाणु भविष्य
विदेशी यूरेनियम पर भारत की निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करने के लिए मोदी सरकार ने परमाणु ऊर्जा के तीसरे चरण को धरातल पर उतारा। तमिलनाडु के कलपक्कम में 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) की सफल शुरुआत के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा गिने-चुने देशों में शामिल हो गया, जो परमाणु कचरे से दोबारा ईंधन बनाकर बिजली पैदा करते हैं। भारत के पास केरल और ओडिशा के तटीय रेत में मौजूद थोरियम का दुनिया का सबसे बड़ा भंडार है। इस स्वदेशी तकनीक के जरिए भारत आने वाली कई शताब्दियों के लिए असीमित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर परमाणु बिजली का स्वामी बनने की राह पर बढ़ चुका है।
भारत की थोरियम क्रांति: ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई उड़ान! 🇮🇳⚡
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) अब बिजली उत्पादन के लिए पूरी तरह तैयार है।
जहां बड़े-बड़े विकसित देश अरबों डॉलर खर्च… pic.twitter.com/88Rt77Qb8I
— BJP (@BJP4India) April 16, 2026
वर्षों से अटकी हुई बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को गति: पूर्वोत्तर बना देश का नया पावर हाउस
नदियों के बहते पानी से बनने वाली पनबिजली को गति देने के लिए मोदी सरकार ने वर्षों से लालफीताशाही और विवादों में अटकी बड़ी परियोजनाओं को दोबारा शुरू कराया। जलविद्युत को आधिकारिक तौर पर ‘नवीकरणीय ऊर्जा’ का दर्जा देकर विशेष वित्तीय पैकेज दिए गए। असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित 2,000 मेगावाट की सुबनसिरी लोअर परियोजना जैसे विशाल हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को रिकॉर्ड समय में आगे बढ़ाया गया। देश की जलविद्युत क्षमता 47 गीगावाट के पार पहुंच चुकी है। ये परियोजनाएं पूर्वोत्तर राज्यों में विकास का आधार बनी हैं और जब रात में सौर संयंत्र काम नहीं करते, तब तुरंत बिजली देकर राष्ट्रीय ग्रिड को स्थिरता प्रदान करती हैं।
जमीन की कमी का नायाब तोड़: बांधों और झीलों के पानी पर तैरते सोलर प्लांट से बन रही बिजली
खेती और जंगलों की बहुमूल्य जमीन को बचाते हुए सौर ऊर्जा का विस्तार करने के लिए मोदी सरकार ने फ्लोटिंग सोलर तकनीक को जमीन पर उतारा। तेलंगाना के रामागुंडम (100 मेगावाट), केरल के कायमकुलम और मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर बांध के विशाल जलाशयों पर पानी की सतह पर तैरने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स स्थापित किए गए। इन तैरते संयंत्रों का दोहरा लाभ मिला—पहला, बिना किसी भूमि अधिग्रहण के भारी मात्रा में हरित बिजली बनी, और दूसरा, पैनलों की छाया से तेज गर्मी में बांधों का पानी भाप बनकर उड़ने से रुका, जिससे गर्मियों में पीने और सिंचाई के अमूल्य पानी का संरक्षण हुआ।
नहरों पर बिछा सोलर पैनल्स का जाल: पानी भाप बनने से रुका और पैदा हुई स्वच्छ बिजली
जमीन की बचत और जल संरक्षण का एक और अनूठा प्रयोग नहरों के ऊपर सोलर पैनल लगाकर किया गया। गुजरात के नर्मदा कैनाल प्रोजेक्ट से शुरू हुआ यह मॉडल अब देश भर की प्रमुख सिंचाई नहरों पर तेजी से अपनाया जा रहा है। नहरों के ऊपर सोलर पैनल लगने से जमीन अधिग्रहण का भारी खर्च पूरी तरह बच गया। पैनलों की छाया के कारण लाखों लीटर कीमती पानी भाप बनकर उड़ने से बच गया, जिससे टेल-एंड के किसानों तक पूरा पानी पहुंच रहा है। इसके साथ ही नीचे बहते ठंडे पानी के कारण पैनलों का तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे उनकी बिजली उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है।
रेगिस्तान और पहाड़ों से शहरों तक: ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से घर-घर पहुंच रही हरी बिजली
राजस्थान और गुजरात के तपते रेगिस्तानों तथा लद्दाख की चोटियों पर बनने वाली विशाल सौर और पवन ऊर्जा को मुख्य शहरों और उद्योगों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी। इसके समाधान के लिए मोदी सरकार ने समर्पित ‘ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर’ का जाल बिछाया। इसके तहत 10,000 सर्किट किलोमीटर से अधिक लंबी विशेष हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनें तैयार की गईं, जिससे कच्छ में बन रहे 30,000 मेगावाट के हाइब्रिड एनर्जी पार्क और राजस्थान के विशाल सोलर पार्कों में बनने वाली हरित बिजली बिना किसी रुकावट के देश के हर कोने में स्थित घरों और कारखानों तक पहुंच रही है।
खावड़ा सोलर पार्क – @narendramodi जी के विज़न का नया भारत 🇮🇳
गुजरात के कच्छ में बन रहा खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट बनने जा रहा है, जिसकी कुल क्षमता लगभग 30 GW है।
यह मेगा प्रोजेक्ट लाखों घरों को स्वच्छ बिजली देगा और भारत को ऊर्जा के… pic.twitter.com/apf7fmAY03
— Sandeep Thakur (@thakurbjpdelhi) February 11, 2026
रात में भी मिलेगी सौर ऊर्जा: आधुनिक बैटरी स्टोरेज और वॉटर-बैटरी से ग्रिड हुआ स्थिर
सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि रात में सूरज ढलने के बाद बिजली कैसे मिले। इसका समाधान निकालने के लिए मोदी सरकार ने ग्रिड-स्तरीय स्टोरेज क्रांति शुरू की। 4,000 मेगावाट-घंटे (MWh) क्षमता के बैटरी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को केंद्र सरकार की वित्तीय मदद (VGF) देकर स्थापित कराया जा रहा है। इसके साथ ही पानी से चलने वाले पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PSP) के लिए स्पष्ट राष्ट्रीय नीति लागू की गई, जो पानी को प्राकृतिक बैटरी की तरह उपयोग करते हैं। जब बिजली की मांग चरम पर होती है, तब यह संचित ऊर्जा तुरंत ग्रिड में प्रवाहित होकर किसी भी ब्लैकआउट की संभावना को पूरी तरह समाप्त कर देती है।
बैटरी और सोलर के लिए विदेशी मोह खत्म: देश में ही मिले लिथियम के बड़े भंडार
हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों के दौर में भारत ने विदेशी आपूर्ति और चीनी एकाधिकार पर निर्भर न रहने की दूरदर्शी रणनीति अपनाई। जम्मू-कश्मीर के रियासी और छत्तीसगढ़ में लिथियम तथा दुर्लभ खनिज भंडारों की ऐतिहासिक खोज की गई। खनन कानूनों में क्रांतिकारी संशोधन कर 24 महत्वपूर्ण खनिजों की नीलामी निजी क्षेत्र के लिए खोली गई। साथ ही, सार्वजनिक उपक्रम ‘काबिल’ (KABIL) के माध्यम से अर्जेंटीना में 5 लिथियम ब्लॉकों का अधिग्रहण कर भारत ने अपनी बैटरियों और सोलर उपकरणों के कच्चे माल की सप्लाई को आने वाले कई दशकों के लिए सुरक्षित कर लिया है।
पुरानी बैटरियों और सोलर पैनल से फिर निकलेगा सोना: रीसाइक्लिंग से कचरा बना नया कच्चा माल
ग्रीन एनर्जी के विस्तार के साथ भविष्य में ई-कचरे और खराब बैटरियों की समस्या न बने, इसके लिए मोदी सरकार ने सर्कुलर इकोनॉमी का मजबूत तंत्र तैयार किया। बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत देश भर में पुरानी लिथियम-आयन बैटरियों और सोलर पैनल्स की रीसाइक्लिंग को अनिवार्य बनाया गया। आधुनिक रीसाइक्लिंग संयंत्रों के जरिए इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों से 90% से अधिक लिथियम, कोबाल्ट और निकेल को दोबारा निकालकर नई बैटरियों के निर्माण में लगाया जा रहा है। कचरे को दोबारा मूल्यवान कच्चे माल में बदलने के इस मॉडल ने भारत को महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में आत्मनिर्भरता का एक नया चक्र प्रदान किया है।
https://x.com/moefcc
चूल्हे के जहरीले धुएं से बहनों को मुक्ति: 10 करोड़ उज्ज्वला कनेक्शन और घर-घर पाइप से गैस
मोदी सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को केवल बड़े उद्योगों तक सीमित न रखकर देश की करोड़ों माताओं-बहनों की रसोई का सुरक्षा कवच बनाया। ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के तहत 10.60 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन देकर चूल्हे के जहरीले धुएं से मुक्ति दिलाई जा चुकी है। इसके साथ ही 12वें राउंड की सिटी गैस बिडिंग के बाद देश के 98% से अधिक भौगोलिक क्षेत्र और आबादी तक सिटी गैस नेटवर्क का विस्तार हुआ, जिससे शहरों और कस्बों में 1.4 करोड़ से अधिक घरों में सीधे पाइप के जरिए सस्ती रसोई गैस (PNG) और 7,000 से अधिक स्टेशनों से वाहनों के लिए सीएनजी उपलब्ध कराई जा रही है।
उज्ज्वला परिवार का विस्तार
नारी शक्ति को बड़ा उपहार!नवरात्रि के शुभारम्भ के साथ ही निःशुल्क 25 लाख नए #PMUjjwala कनेक्शन की सौगात एक और प्रमाण है कि PM @narendramodi जी महिलाओं को देवी दुर्गा जी के सामान सम्मान देते हैं। यह निर्णय माताओं-बहनों के सम्मान और सशक्तिकरण के हमारे… pic.twitter.com/5bDaYobrSx
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) September 22, 2025
गैस सिलेंडर की चिंता से भी मुक्ति: ‘सूर्य नूतन’ और इंडक्शन से रसोई में शुरू हुई बिजली से पकवान बनाने की क्रांति
धुआं-मुक्त रसोई के बाद अब मोदी सरकार ने माताओं-बहनों को गैस सिलेंडर भरवाने के खर्च से भी पूरी तरह मुक्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया। इंडियन ऑयल के जरिए पूरी तरह स्वदेशी ‘सूर्य नूतन’ इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम तैयार कराया गया। यह खास चूल्हा दिन में धूप से चार्ज होकर रात में भी रसोई के भीतर बिना किसी झंझट के चार-पांच लोगों का खाना पका देता है। इसके साथ ही नेशनल एफिशिएंट कुकिंग प्रोग्राम के तहत लाखों घरों तक सुरक्षित इंडक्शन चूल्हे पहुंचाए जा रहे हैं। छत पर लगी सोलर बिजली से सीधे भोजन बनने से आम परिवारों का रसोई खर्च शून्य होने की राह पर है।
सोलर पैनल के लिए चीन पर निर्भरता खत्म: पीएलआई योजना से देश में ही बनने लगे उपकरण
सौर ऊर्जा के उपकरणों के लिए दशकों तक चीन पर निर्भर रहने की विवशता को मोदी सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ से तोड़ा। 24,000 करोड़ रुपये की सोलर पीएलआई योजना लागू कर देश के भीतर ही सोलर सेल, मॉड्यूल्स और इनवर्टर्स के विशाल कारखाने स्थापित कराए गए। सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 70 गीगावाट से अधिक पहुंच चुकी है। चीनी उपकरणों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी और कड़े नियम लगाकर स्थानीय उद्योगों को मजबूत किया गया। इस नीति का परिणाम है कि भारत आज न केवल अपनी सौर परियोजनाओं के लिए उपकरण खुद बना रहा है, बल्कि अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों को अरबों रुपये के मेड इन इंडिया सोलर पैनल्स का निर्यात भी कर रहा है।
हाईवे पर हर कुछ किलोमीटर पर चार्जिंग प्वाइंट: पेट्रोल पंप की तरह आसान हुआ गाड़ियों को चार्ज करना
देश के परिवहन तंत्र को प्रदूषणकारी तेल से मुक्त कर इलेक्ट्रिक पर शिफ्ट करने के लिए मोदी सरकार ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का राष्ट्रीय नेटवर्क खड़ा किया। देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और प्रमुख शहरों में 12,000 से अधिक पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। नेशनल हाईवे पर हर 25 से 50 किलोमीटर की दूरी पर फास्ट चार्जिंग हब तैयार किए जा रहे हैं। पीएम ई-बस सेवा के तहत 10,000 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शहरों में शुरू हो चुका है, जिससे देश के आम नागरिकों और ट्रांसपोर्टरों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन चलाना पेट्रोल पंप जाने जितना ही सुलभ और सस्ता बन चुका है।
दुनिया के पहले 100% सौर ऊर्जा संचालित एयरपोर्ट: भारतीय हवाई अड्डों का ग्रीन कायाकल्प
हवाई यात्राओं के बढ़ते विस्तार के बीच विमानन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने की दिशा में भारत ने दुनिया को राह दिखाई है। केरल का कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपनी शत-प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों को सौर ऊर्जा से पूरा कर दुनिया का पहला पूर्ण सोलर एयरपोर्ट बना, जिसके लिए उसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान मिला। इसी नक्शेकदम पर चलते हुए देश के 75 से अधिक हवाई अड्डों पर विशाल ऑन-साइट सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं और दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश का पहला नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन वाला हब बन चुका है।
पराली और गोबर से बन रही सीएनजी: गोबरधन योजना से प्रदूषण पर रोक और किसानों की कमाई
खेती के अवशेष, पराली और गोबर को प्रदूषण का कारण बनने के बजाय स्वच्छ ईंधन में बदलने का अनूठा मॉडल मोदी सरकार ने तैयार किया। ‘गोबरधन’ पहल और ‘सैटैट’ योजना के तहत देश भर में सैकड़ों कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट्स चालू किए जा चुके हैं। मवेशियों के गोबर और पराली से तैयार होने वाली यह गैस सीधे सीएनजी वाहनों और रसोई में इस्तेमाल हो रही है। इससे शहरों में वायु प्रदूषण कम हो रहा है, खेतों को जैविक स्लरी खाद मिल रही है और किसानों को अपने कृषि अपशिष्ट के बदले अतिरिक्त कमाई का नया जरिया मिल गया है।
कचरे से समृद्धि: गोबरधन योजना! 🇮🇳🌿
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत गोबरधन योजना भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा को नई गति दे रही है।
अब गोबर, खेतों के अवशेष और जैविक कचरे से बनेगा:
✅ कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) – स्वच्छ, नवीकरणीय ईंधन
✅ जैविक खाद – मिट्टी की उर्वरता के लिए… pic.twitter.com/vRdQux0NRd— BJP (@BJP4India) August 8, 2026
कोयले की जगह ग्रीन हाइड्रोजन से बनेगा लोहा: भारी उद्योगों में प्रदूषण मुक्त क्रांति
ऊर्जा सुरक्षा को केवल घरेलू बिजली और गाड़ियों तक सीमित न रखकर मोदी सरकार ने भारी उद्योगों के कायाकल्प की शुरुआत की। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत देश में ‘ग्रीन स्टील’ और ‘ग्रीन अमोनिया’ के पहले पायलट प्रोजेक्ट्स सफलता से जमीन पर उतारे गए। इस्पात और सीमेंट जैसे भारी उद्योगों में कोयले और गैस की जगह ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग शुरू कराया गया। यूरिया और उर्वरक उत्पादन में विदेशी नेचुरल गैस पर निर्भरता घटाने के लिए घरेलू ग्रीन अमोनिया का रोडमैप लागू किया गया, जिससे भारतीय उद्योग यूरोपीय देशों के कार्बन टैक्स जैसी चुनौतियों से पूरी तरह सुरक्षित होकर वैश्विक बाजार में अग्रणी बन रहे हैं।
डीजल मुक्त हुई भारतीय रेल: 100% बिजली पर चलने वाला दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क
देश के परिवहन की लाइफलाइन भारतीय रेलवे को प्रदूषणकारी डीजल इंजनों से मुक्त कर पूर्णतः इलेक्ट्रिक बनाने का कीर्तिमान मोदी सरकार ने स्थापित किया। आजादी के बाद 67 वर्षों में जहां रेलवे का आधा नेटवर्क भी इलेक्ट्रिक नहीं हो पाया था, वहीं ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6% विद्युतीकरण पूर्ण कर लिया गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से प्रतिवर्ष 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के डीजल आयात की बचत हुई और ट्रेनों की गति में भारी इजाफा हुआ। भारतीय रेलवे अब वर्ष 2030 तक दुनिया का पहला नेट-जीरो कार्बन रेलवे नेटवर्क बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।
काले धुएं से सफेद भाप तक: भारतीय रेल की नई हाइड्रोजन क्रांति शुरू! 🚄✨
भारतीय रेलवे के इतिहास में एक ऐतिहासिक युग की शुरुआत हो चुकी है, जहां अब ट्रेनें जहरीले धुएं की जगह सिर्फ पानी की भाप छोड़ेंगी।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश को पहली प्रदूषण-मुक्त हाइड्रोजन ट्रेन का… pic.twitter.com/1JG5bs0vfd
— BJP (@BJP4India) July 17, 2026
भगवान सूर्य की धरती से राम नगरी तक: सोलर सिटी बनकर जगमगा रहे देश के तीर्थ स्थल
मोदी सरकार ने देश के प्रमुख सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों को आधुनिक ऊर्जा क्रांति का प्रतीक बना दिया। ओडिशा का ऐतिहासिक कोणार्क सूर्य मंदिर और पूरा कोणार्क शहर देश का पहला शत-प्रतिशत सौर ऊर्जा से संचालित हेरिटेज केंद्र बन चुका है। प्रभु श्री राम की पावन नगरी अयोध्या को मॉडल ‘सोलर सिटी’ के रूप में संवारा गया, जहां सोलर बोट्स, सोलर ट्री और सौर ऊर्जा से जलने वाली स्ट्रीट लाइट्स आस्था और आधुनिक विज्ञान का संगम प्रस्तुत कर रही हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के सांची को देश की पहली पूर्ण सोलर सिटी घोषित किया गया, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ इन पवित्र स्थलों का कार्बन उत्सर्जन शून्य हो चुका है।
जमीन के बाद अब समंदर में घूमेंगे विशाल पंखे: तटीय राज्यों में शुरू हुई ऑफशोर विंड क्रांति
भूमि पर स्थान की सीमाओं को पार करते हुए मोदी सरकार ने देश के 7,500 किलोमीटर लंबे समुद्र तट को स्वच्छ ऊर्जा का नया स्रोत बना दिया। गुजरात और तमिलनाडु के गहरे समुद्र में 1,000 मेगावाट की पहली ‘ऑफशोर विंड एनर्जी’ परियोजनाओं को केंद्र सरकार ने 7,453 करोड़ रुपये का वित्तीय पैकेज (VGF) देकर मंजूरी दी। समुद्र में चलने वाली तेज और निर्बाध हवाओं से बिजली बनाकर तटीय बंदरगाहों, उद्योगों और मछुआरा समुदायों को दी जा रही है। यह पहल न केवल ब्लू इकोनॉमी को मजबूत कर रही है, बल्कि भारत को समुद्री पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भी दुनिया के शीर्ष देशों की श्रेणी में ला रही है।
समंदर की उठती लहरों से बनेगी रोशनी: टाइडल और भू-तापीय ऊर्जा के नए रास्ते
सौर और पवन ऊर्जा से आगे बढ़कर हर मौसम और चौबीसों घंटे स्थिर बिजली देने वाले नए स्रोतों पर भी मोदी सरकार ने निर्णायक कदम उठाए। लद्दाख की पूगा घाटी में भारत की पहली ‘जियोथर्मल एनर्जी’ (भू-तापीय ऊर्जा) परियोजना स्थापित की गई, जो शून्य से नीचे तापमान में भी जमीन के भीतर के गर्म पानी और भाप से लगातार स्वच्छ बिजली पैदा कर रही है। इसके साथ ही गुजरात के खंभात और कच्छ के तटीय इलाकों में समुद्र के ज्वार-भाटा (टाइडल पावर) से बिजली उत्पादन के आधुनिक प्रोजेक्ट्स को गति दी गई, जिससे देश के ऊर्जा टोकरे में प्रकृति के हर संसाधन का उपयोग सुनिश्चित हो रहा है।
लद्दाख की पुगा घाटी में भारत ने स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
ONGC एनर्जी सेंटर ने जियोथर्मल कुएं का कार्य पूरा कर लिया है।
यह सिर्फ़ एक जियोथर्मल कुआं नहीं, बल्कि देश को आगे ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
PM मोदी के विज़न से प्रेरित यह… pic.twitter.com/cKrWlBmkBz
— Panchjanya (@epanchjanya) July 17, 2026
बिजली क्रांति से खुले रोजगार के लाखों अवसर: ‘सूर्यमित्र’ बनकर देश भर में युवा पा रहे सम्मानजनक काम
ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार को मोदी सरकार ने सीधे युवाओं के रोजगार और तकनीकी कौशल से जोड़ा। ‘सूर्यमित्र’ कौशल विकास कार्यक्रम के जरिए देश भर के 1 लाख से अधिक युवाओं को सोलर पैनल लगाने, ग्रिड से जोड़ने और उनके रखरखाव का विशेष सरकारी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस कार्यक्रम से प्रशिक्षित युवा आज अपने-अपने जिलों और कस्बों में स्वतंत्र रूप से तकनीकी रोजगार पा रहे हैं या अपना उद्यम शुरू कर रहे हैं। इसके साथ ही ईवी चार्जिंग स्टेशन, बैटरी तकनीक और स्मार्ट मीटरिंग के क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए लाखों नए अवसर खुले हैं।
चक्रवात और बाढ़ में भी नहीं बुझती बत्ती: आपदाओं से निपटने के लिए तैयार हुआ मजबूत अंडरग्राउंड नेटवर्क
पहले ओडिशा, गुजरात या पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में समुद्री तूफान या बाढ़ आते ही बिजली के खंभे गिर जाते थे और पूरा इलाका कई हफ्तों तक घने अंधेरे में डूब जाता था। मोदी सरकार ने तटीय और आपदा-संवेदनशील क्षेत्रों में पुरानी तारों को हटाकर आधुनिक भूमिगत (अंडरग्राउंड) केबल नेटवर्क तैयार किया। इसका सुखद परिणाम यह हुआ कि हाल के वर्षों में आए भीषण चक्रवातों के दौरान भी बिजली का नुकसान न्यूनतम रहा और राहत व बचाव कार्यों के लिए अस्पतालों और बस्तियों में मात्र 24 से 48 घंटे के भीतर बिजली बहाल कर दी गई।
भारत से यूरोप तक बिछेगी ग्रीन एनर्जी की पाइपलाइन: जी-20 से निकला नया वैश्विक व्यापार मार्ग
भारत ने अपनी ऊर्जा कूटनीति को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के केंद्र में स्थापित कर दिया है। नई दिल्ली जी-20 शिखर सम्मेलन में ऐतिहासिक ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEC) का खाका खींचा गया। इस परियोजना के तहत भारत से अरब सागर और भूमध्य सागर के रास्ते सीधे यूरोप तक अंडरसी बिजली केबल्स और ग्रीन हाइड्रोजन पाइपलाइन बिछाने की तैयारी है। भारत में पैदा होने वाली सौर व पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन सीधे खाड़ी और यूरोपीय देशों तक निर्यात होगी। इस रणनीतिक पहल ने भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र और भरोसेमंद पार्टनर बना दिया है।
इंडिया–मिडिल ईस्ट–यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर ट्रेड रूट्स को फिर से डिफाइन करेगा। ये क्लीन एनर्जी और स्मार्ट लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देगा।
मैरीटाइम लीडर्स कॉन्क्लेव में प्रधानमंत्री @narendramodi का सम्बोधन#IndiaMaritimeWeek2025 @PMOIndia @shipmin_india @AshwiniVaishnaw pic.twitter.com/BA1zanxy48
— सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (@MIB_Hindi) October 29, 2025
सूरज कभी अस्त नहीं होता: पूरी दुनिया के पावर ग्रिड को एक सूत्र में पिरोती भारत की पहल
भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वैश्विक ग्रिड का नेतृत्व संभाला। प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ का क्रांतिकारी विजन रखा। इस योजना के तहत भारत, मध्य-पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोप के पावर ग्रिडों को समुद्री केबलों के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। दुनिया के जिस हिस्से में दिन होगा, वहां की सौर ऊर्जा रात वाले हिस्से में ट्रांसफर की जा सकेगी। इस दूरदर्शी सोच ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया है।
भविष्य का ईंधन और नेट-जीरो 2070: ग्रीन हाइड्रोजन और एथेनॉल से ऊर्जा क्षेत्र में पूरी आत्मनिर्भरता
ऊर्जा सुरक्षा का लक्ष्य केवल वर्तमान की आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वर्ष 2047 के विकसित भारत और 2070 के नेट-जीरो संकल्प की सुदृढ़ नींव है। वर्ष 2014 में जहां पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग महज 1.5% थी, वह 20% (E20) के ऐतिहासिक राष्ट्रीय लक्ष्य को सफलतापूर्वक छू चुकी है। इससे 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और गन्ना किसानों को सवा लाख करोड़ रुपये से अधिक का सीधा भुगतान मिला है। इसके साथ ही 19,744 करोड़ रुपये का ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ भारत को भविष्य के इस स्वच्छ ईंधन का वैश्विक निर्यातक बना रहा है, जिससे भारी उद्योग और रिफाइनरियां पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होंगी।
मजबूत नेतृत्व और दूरदर्शी नीतियों से अभेद्य बना ऊर्जा चक्र
पिछले ढाई दशकों में जन सेवा की प्रतिबद्धता और पिछले एक दशक के निर्णायक नेतृत्व ने भारत के ऊर्जा परिदृश्य को जड़ से बदल दिया है। ग्रिड विफलता और अंधेरे के डर से निकलकर आज का भारत न केवल अपने हर गांव और घर को 24 घंटे बिजली दे रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन का एजेंडा तय कर रहा है। खेतों में सोलर पंप से लेकर छतों पर बिजली उत्पादन, दिन में सस्ती बिजली का नया टैरिफ, पारदर्शी कोयला उत्पादन, सुदूर सरहदों पर रोशनी, बर्फीली चौकियों पर सौर कवच, स्वदेशी 700 मेगावाट रिएक्टर व कलपक्कम का थोरियम भविष्य, हाई-टेक सुपर पावर लाइनें, पनबिजली को नई गति, घरेलू विनिर्माण, 99.6% इलेक्ट्रिक रेल, उज्ज्वला व सूर्य नूतन से रसोई सुरक्षा, धार्मिक नगरों का सौर कायाकल्प, तैरते व कैनाल-टॉप सोलर प्लांट, ग्रीन स्टील, बंजर भूमि पर मेगा पार्क, समंदर की लहरों व गर्म जमीन से बिजली, ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग, आपदा-सुरक्षित नेटवर्क, यूरोप तक ग्रीन कॉरिडोर, युवाओं के लिए ग्रीन जॉब्स और स्वतंत्र विदेश नीति यह प्रमाणित करती है कि मोदी सरकार की नीतियां देश के आर्थिक विकास और 140 करोड़ नागरिकों की सुरक्षा का एक अभेद्य सुरक्षा चक्र बन चुकी हैं।
Renewable Energy सेक्टर में लीडर बनकर उभर रहा है नया भारत…
मोदी जी के नेतृत्व में आज भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि जलवायु परिवर्तन और संसाधन संरक्षण की गंभीर चुनौतियों का भी समाधान कर रहा है। pic.twitter.com/RH8nJQd1qB
— BJP (@BJP4India) March 1, 2025









