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PM Modi भव्य बना रहे ऐतिहासिक मंदिर…केदार, सोमनाथ और काशी के बाद अब 750 करोड़ में बनेगा Ujjain Mahakal Corridor, शिव की 200 मूर्तियां और सौ से ज्यादा शिव-स्तंभ के साथ भव्यतम दिखेगा ज्योतिर्लिंग

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी विराट छवि के साथ हिंदू सनातन संस्कृतियों और उनकी परंपराओं को आगे बढ़ाने वाले ब्रांड अम्बेडसर के तौर जनमानस का दिल जीत रहे हैं। देश को पीएम मोदी के रूप में ऐसे महानायक मिले हैं, जो न सिर्फ भ्रष्टाचार और परिवारवाद को देश के विकास के लिए नासूर मानते हैं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति के आधुनिक ध्वजवाहक के रूप में प्राचीनतम अध्यात्मिक धरोहरों के जीर्णोद्धार में दत्तचित्त होकर लगे हैं। केदारनाथ मंदिर का कायाकल्प हो या अयोध्या में निर्माणाधीन भव्यतम राम मंदिर। सोमनाथ मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार हो या चार धाम को जोड़ने वाली परियोजना। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का दिव्य आगाज हो या फिर अब उज्जैन में ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के शानदार कॉरिडोर का निर्माण… वे जिस भव्य-दिव्य तरीके से आस्था के प्रतीकों का पुनरुद्धार कर रहे हैं, वैसा इतिहास में पहले कभी किसी ने नहीं किया।उज्जैन महाकालेश्वर: 750 करोड़ की लागत से कॉरिडोर का भव्य-दिव्य निर्माण
पीएम मोदी की छवि धार्मिक मंदिरों के जीर्णोद्धार करने वाले और सनातन परंपराओं को संजोकर आगे बढ़ाने वाले बड़े नेता के तौर पर उभर रही है। पीएम मोदी ने राम मंदिर का शिलान्यास कर करोड़ों हिंदुओं की आस्था के पूरा होने का मार्ग प्रशस्त किया। राम लला के मंदिर की प्रतीक्षा सदियों के की जा रही थी। पीएम मोदी भव्यतम राम मंदिर का निर्माण भी मिशन मोड पर करवा रहे हैं। यह 2024 से पहले ही बनकर तैयार हो जाएगा। पीएम मोदी ने ज्योतिर्लिंगों का जीर्णोद्धार कराकर इन्हें सुविधायुक्त बनवाया है। अब उज्जैन के महाकाल ज्योतिर्लिंग की बारी है। यहां पर 750 करोड़ की लागत से भव्य-दिव्य कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा है।काशी विश्वनाथ धाम से तीन गुना ज्यादा क्षेत्र में बन रहा महाकाल कॉरिडोर
ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर का नया कॉरिडोर बनकर तैयार हो रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर 300 मीटर में बना है, जबकि महाकाल कॉरिडोर 900 मीटर क्षेत्र में बनाया जा रहा है। यानी कि महाकाल कॉरिडोर काशी से भी भव्य बनने जा रहा है। दो चरणों में हो रहे निर्माण में यात्रियों के लिए दर्शनीय क्षेत्र और सुविधाएं विकसित करने पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। प्रथम चरण का नाम रुद्र सागर-1 दिया गया है। पूरा प्रोजेक्ट 750 करोड़ रुपये का है। हाल ही में उज्जैन कलेक्टर ने महाकाल परिसर में किये जा रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। प्रथम चरण के कार्यों का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही कर सकते हैं। इसके बाद कॉरिडोर का प्रथम चरण आम श्रद्धालुओं के लिये खोल दिया जाएगा।

पहले चरण के विकास कार्य जल्द होंगे पूरे, महाकाल के आंगन के अलौकिक दर्शन होंगे
इस कॉरिडोर के बनने से महाकाल मंदिर का परिसर जो अभी 2 हेक्टेयर का है, बढ़कर 20 हेक्टेयर का हो जाएगा। पहले चरण में लगभग 350 करोड़ के विकास कार्य कराए जा रहे हैं। प्रथम चरण में महाकाल प्लाजा, महाकाल कॉरिडोर, मिडवे जोन, महाकाल थीम पार्क, घाट एवं डेक एरिया, नूतन स्कूल कॉम्पलेक्स, गणेश स्कूल कॉम्पलेक्स का कार्य पूर्ण हो चुका है। हरिफाटक ब्रिज की चौथी भुजा से आकर श्रद्धालु जैसे ही त्रिवेणी संग्रहालय पहुंचेंगे, उन्हें बाबा महाकाल के आंगन के अलौकिक दर्शन होंगे।महाकाल कॉरिडोर में 108 स्तंभ और भगवान शिव की 200 मूर्तियां स्थापित की जाएंगी
कॉरिडोर में 108 स्तंभ और भगवान शिव की 200 मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा, कॉरिडोर में मां पार्वती, गणेश, नंदी और अन्य देवताओं की मूर्तियां लगाई जाएंगी। कॉरिडोर के साथ-साथ स्मार्ट टिकट काउंटर, रेस्ट रूम भी बनाए जा रहे हैं। महाकाल कॉरिडोर में पैदल चलने हेतु उपयुक्त 200 मीटर लंबा मार्ग बना दिया गया है। इसमें 25 फीट ऊंची एवं 500 मीटर लंबी वॉल बनाई गई है। यही नहीं 108 शिवस्तंभ शिव की विभिन्न मुद्राओं सहित निर्मित हो चुके हैं, जो अलग ही छटा बिखेर रहे हैं। लोटस तालाब, ओपन एयर थिएटर तथा लेकफ्रंट एरिया और ई-रिक्शा व आकस्मिक वाहनों हेतु मार्ग भी लगभग पूर्ण हो चुका है।महाकाल थीम पार्क के तहत महाकालेश्वर की कथाओं से युक्त म्युरल वॉल विकसित होंगे
इसके अलावा बड़े रुद्र सागर की झील में स्वच्छ पानी भरा जाएगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि इस झील में गंदा पानी बिल्कुल न मिलने पाए। महाकाल थीम पार्क के अंतर्गत महाकालेश्वर की कथाओं से युक्त म्युरल वॉल, सप्त सागर हेतु डेक एरिया तथा डेक के नीचे शापिंग एरिया, बैठक क्षेत्र सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसी तरह त्रिवेणी संग्रहालय के समीप कार, बस और दोपहिया वाहन की मल्टीलेवल पार्किंग बन चुकी है. इस क्षेत्र में धर्मशाला और अन्नक्षेत्र भी बनाये जा रहे हैं। कोबल्ड स्टोन की रोड क्रॉसिंग के जरिये पदयात्रियों की कनेक्टिविटी विकसित की गई है।प्रधानमंत्री पीएम मोदी कॉरिडोर निर्माण के बाद उज्जैन आकर कर सकते हैं लोकार्पण
इस बात की ज्यादा संभावना है कि कॉरिडोर का लोकार्पण करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्जैन जाएंगे। महाकाल कॉरिडोर में चल रहे विकास कार्यों का पिछले दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निरीक्षण किया। महाकालेश्वर कॉरिडोर के अंदर भगवान शिव की 200 फुट की प्रतिमा होगी। प्रतिमा स्थापित करने का कार्य शुरू हो गया है। इसके साथ ही 108 भव्य पिलर भी लगाए जाएंगे। एक तरफ भगवान की शिव की प्रतिमा होगी और दूसरी तरफ भव्य पिलर लगाए जाएंगे। पिलर में खूबसूरत लाइटें भी लगाई जा रही हैं। इसके साथ ही कॉरिडोर में दूसरे भगवानों की प्रतिमा भी स्थापित की गई हैं।रुद्रसागर के किनारे 2 नए द्वार विकसित, एक घंटे में एक लाख श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन
इस मंदिर को चारों तरफ से खुला बनाया जा रहा है। इसके आसपास के भवन को हटाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालु लोग दूर से मंदिर के दर्शन कर सकें। इसी के साथ रुद्रसागर के किनारे 2 नए द्वार विकसित किए जा रहे हैं। इसमें एक साथ 20 हजार यात्री एक साथ जा सकते हैं। 400 से ज्यादा वाहनों का पार्किंग क्षेत्र और धर्मशाला से यात्री सीधे नंदी द्वार में प्रवेश करेंगे। कलेक्टर के अनुसार प्रोजेक्ट पूरा होने पर हर घंटे एक लाख श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। एक लाख लोगों की भीड़ होने पर भी श्रद्धालुओं को 45 से 60 मिनट में दर्शन हो जाएंगे।

श्रद्धालु लाइट एंड साउंड शो के जरिए महाकाल के बारे में अधिक जानकारी ले सकेंगे
महाकाल कॉरिडोर में कई स्थानों पर फिनिशिंग का काम चल रहा है। इसी साल महाकाल कॉरिडोर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। त्रिवेणी संग्रहालय के पास ही महाकाल पथ का बड़ा द्वार बन रहा है। बीच में फाउंटेन, लाइट एंड साउंड सिस्टम भी होगा। इसके सामने पवेलियन जैसी व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए की जाएगी,जहां रात के समय श्रद्धालु लाइट एंड साउंड शो के जरिए महाकाल के बारे मे और अधिक जानकारी ले सकेंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर से तीन गुना बड़ा बन रहा महाकाल कॉरिडोर अपने आप में बेहद खास है। परिसर इतना विशाल है कि पूरे मंदिर परिसर में घूमने और सूक्ष्मता से दर्शन करने के लिए 5 से 6 घंटे का वक्त लगेगा।बुजुर्ग श्रद्धालुओं और महिलाओं को मंदिर तक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा की अलग लेन
अभी मंदिर तक पहुंचने के लिए चारों तरफ से गलियों से होकर पहुंचना पड़ता है। नए प्रोजेक्ट के पूरा होने पर श्रद्धालु चौड़ी सड़कों से होकर महाकाल कॉरिडोर तक पहुंच जाएंगे। इसके लिए 70 मीटर चौड़ा मार्ग किया जा रहा है। इस मंदिर में पर्यावरण को ध्यान मे रखकर पूरे मंदिर परिसर मे छायादार पेड़ लगाए जा रहे हैं। महाकाल कॉरिडोर तक पहुंचने के लिए दो पैदल मार्ग भी होंगे। ई-रिक्शा के लिए भी अलग से लेन तैयार हो रही है। इसके जरिए बुजुर्ग श्रद्धालुओं और महिलाओं को मंदिर तक पहुंचने में आसानी हो जाएगी।पूरे कॉरिडोर मे शिवगाथा नजर आएगी, कॉरिडोर में मिलेगा 1000 लोगों को रोजगार
इसी के साथ कई सुविधाएं यात्रियों के लिए की जा रही हैं। पूरे कॉरिडोर मे शिवगाथा नजर आएगी। यहां तक की कॉरिडोर की दुकानों में भारतीय कला और संस्कृति की झलक दिखेगी। यहां लगने वाली फूल-प्रसादी और अन्य दुकान और काउंटर को भी कुछ अलग पहचान दी जा रही है। फेसिलिटी सेंटर के नजदीक बनी ऐसी ही कुछ दुकानों पर कलाकारों द्वारा मांडने बनाकर इन्हें ट्रेडिशनल लुक दिया जा रहा है। इस भव्य कारिडोर का संचालन करने के लिए एक हजार लोगों को रोजगार देने की भी तैयारी की जा रही है। ये लोग समिति की तरफ से मैनेजर, रिसेप्शन, टिकट काउंटर, रेस्टोरेंट, दुकानें, वाहन, लिफ्ट, साफ-सफाई, सुरक्षा गार्ड्स आदि के लिए नियुक्त किए जाएंगे।

 

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