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कर्नाटक में वोक्कालिगा समुदाय का प्रभाव कम करने की साजिश, कांग्रेस विधायक जमीर खान के ‘वोक्कालिगा से ज्यादा मुस्लिम’ बयान पर विवाद

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कांग्रेस चुनाव में ‘हिंदू तोड़ो-मुस्लिम जोड़ो’ की रणनीति पर काम करती है। जहां मुस्लिमों को एकजुट करने और रिझाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाती है, वहीं हिन्दुओं को जाति के आधार पर तोड़ने का प्रयास करती है। इसके लिए कभी आरक्षण तो कभी जाति या समुदाय से मुख्यमंत्री बनाने का प्रलोभन देती है। इस तरह कांग्रेस समुदाय आधारित राजनीति को बढ़ावा दे रही है। कर्नाटक में वोक्कालिगा समुदाय से अधिक मुसलमानों की संख्या होने संबंधी कांग्रेस विधायक जमीर अहमद खान के बयान से विवाद पैदा हो गया है।

जमीर खान के बयान पर वोक्कालिगा संत नाराज

दरअसल वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने हाल में इस समुदाय से मुख्यमंत्री बनने के उनके प्रयास में समर्थन करने की अपील की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जमीर खान ने सवाल किया था, ‘‘मेरी भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा है, मेरे समुदाय का प्रतिशत वोक्कालिगा से अधिक है। क्या मेरे लिए बस अपने समुदाय का समर्थन पाकर मुख्यमंत्री बनना संभव है?’’ जमीर खान के इस बयान के बाद वोक्कालिगा संत निर्मलानंदनाथ स्वामीजी ने कांग्रेस नेताओं को अपनी नाखुशी से अवगत कराया।

समुदाय को छोटा दिखाने और प्रभाव कम करने का प्रयास

सत्तारूढ़ बीजेपी ने जमीर खान के बयान को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय को छोटा दिखाने और उसके प्रभाव को कम करने का प्रयास करार देते हुए उन पर निशाना साधा। बीजेपी नेताओं ने खान की आलोचना करते हुए अपनी महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ाने के लिए समुदाय को बीच में लाने को लेकर शिवकुमार पर भी निशाना साधा और कहा कि वोक्कालिगा किसी एक पार्टी से संबद्ध नहीं हैं।

समुदाय को कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति में घसीटने का विरोध

मंत्री और सत्तारूढ़ बीजेपी में एक प्रमुख वोक्कालिगा चेहरे आर अशोक ने कहा कि यह समुदाय कांग्रेस को माफ नहीं करेगा और उसे ऐसी बातें बंद करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ पार्टी के अंदर अपने मुद्दे निपटाइए, समुदाय को बीच में मत लाइए, यह देश संविधान के अनुसार चलता है, मुख्यमंत्री पूरे राज्य के लिए होता है, न कि किसी समुदाय के लिए।’’

तुष्टिकरण की राजनीति का वक्त चला गया,जमीर भाई-सी टी रवि

बीजेपी महासचिव सी टी रवि ने कहा कि एक वक्त था जब यह भावना थी कि चुनाव बस मुस्लिम मतों की मदद से चुनाव जीते जा सकते हैं, जिससे तुष्टिकरण की राजनीति आई थी। उन्होंने कहा, ‘‘वह वक्त बहुत पहले चला गया, जमीर भाई (खान)….. वोट बैंक के नाम पर धमकाने और ब्लैकमेल करने की बात बहुत पहले बीत गयी। जमीर भाई याद रखिए कि आज कोई ‘भारत माता की जय’ बोलकर एवं लोगों के लिए काम करके ही राजनीति कर सकता है।’

राज्य की राजनीति में लिंगायत और वोक्कालिगा का दबदबा

गौरतलब है कि कर्नाटक में लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय की आबादी क्रमश 17 और 12 प्रतिशत मानी जाती है। राज्य में करीब 17 प्रतिशत अल्पसंख्यक भी हैं जिसमें 13 प्रतिशत मुसलमान और चार प्रतिशत ईसाई हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग की तादाद काफी अधिक है। ये पूरी आबादी का 32 प्रतिशत हैं। राज्य की राजनीति में लिंगायत और वोक्कालिगा दोनों जातियों का दबदबा है।

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