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महिला विरोधी कांग्रेस सरकार : राजस्थान के 68,000 स्कूलों में लाखों महिला शिक्षकों और छात्राओं के लिए नहीं बना पाई अलग टॉयलेट, आपबीती सुन रह जाएंगे हैरान

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उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा दिया था। लेकिन महिलाओं को सिर्फ चुनावी मोहरा बनाने का खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा, क्योंकि महिलाओं ने कांग्रेस के इस नारे पर भरोसा नहीं किया। कांग्रेस ने इससे सबक नहीं लिया और राजस्थान में महिलाओं को अपने हाल पर छोड़ दिया है। अशोक गहलोत सरकार 68,000 स्कूलों में लाखों महिला शिक्षकों और छात्राओं के लिए अलग टॉयलेट नहीं बना पाई। इससे महिला शिक्षकों और छात्राओं को जो परेशानियां उठानी पड़ रही हैं, उसे सुनकर आप हैरान रह जाए्ंगे।

कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार राज्य के 68 हजार स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवार रहीं प्रदेश की 1.34 लाख से ज्यादा महिला शिक्षकों को अलग टॉयलेट तक नहीं दे पाई। उन्हें छात्राओं के टॉयलेट में जाना पड़ता है। 6803 स्कूलों में तो टॉयलट तक नहीं है। कई महिला टीचर्स ने लिखकर अपनी परेशानी बताई। एक प्राधानाचार्य ने तो प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखा है। अखिल राजस्थान महिला शिक्षक संघ की प्रदेशाध्यक्ष कमला लांबा ने राज्य सरकार पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया है। 

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने दैनिक भास्कर की एक खबर को शेयर करते हुए राजस्थान की गहलोत सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि “लड़की हूं, लड़ सकती हूं” का नारा देने वाली कांग्रेस राजस्थान में 1.34 लाख महिला शिक्षकों के लिए 68,000 स्कूलों में अलग टॉयलेट नहीं बना पाई है। 6,803 स्कूलों में तो लड़कियों के लिए ही टॉयलेट नहीं हैं। इतनी अमानवीय स्थिति में भला कोई कैसे पढ़ या पढ़ा सकता है? गहलोत सरकार जवाब दे।

कई स्कूलों में टॉयलेट तो है, लेकिन गंदगी से अटे पड़े हैं। सफाई कर्मी तक नहीं है। राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल सरस्वती कुंड जयपुर, राजकीय प्राथमिक स्कूल तीतरवाला की ढाणी जयपुर, राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल बरतानियों की ढ़ाणी ओसियां लूणी, राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल थोब कल्याणपुर जोधपुर में भी टॉयलेट टूटे फूटे हैं। न पानी की व्यवस्था है न कोई सफाईकर्मी।

एक महिला प्राधानाचार्य प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख कर गुहार लगाई है। इसमें उन्होंने लिखा, “सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के लिए ही पर्याप्त अलग टॉयलेट नहीं हैं। महिला टीचर्स के लिए तो हैं ही नहीं। महिला टीचर्स कम पानी पीती हैं। पीरियड के दौरान छात्राएं तो स्कूल ही नहीं आतीं। महिला टीचर्स को आना पड़ता है, क्योंकि पढ़ाई बाधित होगी। आज ही कुछ करें।”

“पीरियड्स के दौरान मुंह में पानी भर कर ले जाती हूं”

  • जयपुर के नजदीक गांव की शिक्षक ने लिखा कि ज्यादा आयु के कारण बैठ नहीं पाती। स्कूल में न अलग टॉयलेट हैं और न कमोड। छात्राओं के टॉयलेट जाना शर्मिंदगी भरा है।
  • जोधपुर में मंडोर के स्कूल की शिक्षक ने कहा कि टॉयलेट से बचने को हम पानी कम पीते हैं। लगातार वर्षों तक ऐसा करने से कई महिला टीचर्स को तरह-तरह की बीमारियां हो गई हैं।
  • फलौदी के स्कूल की शिक्षक ने बताया कि पीरियड के दौरान वे छात्राओं के टॉयलेट में मुंह में पानी भरकर टॉयलेट जाती हैं, ताकि टॉयलेट में खून के धब्बे न रह जाएं। कुल्ला कर धो दें।

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