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जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक विकास की तेज होगी रफ्तार, मोदी सरकार ने 28,400 करोड़ रुपये की योजना को दी मंजूरी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जम्मू-कश्मीर के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिनसे केन्द्र शासित प्रदेश के विकास को गति मिल रही है। इसी क्रम में मोदी सरकार ने गुरुवार (7 जनवरी)को औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 28,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी।

मोदी सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए केंद्र क्षेत्र की योजना के रूप में जम्मू-कश्मीर के लिए नई औद्योगिक विकास योजना (जेएंडकेआईडीएस, 2021) तैयार की है। योजना का उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में ब्लॉक स्तर तक औद्योगिक विकास को ले जाना है। इसके तहत नए निवेश आकर्षित करने के साथ ही कौशल विकास और रोजगार सृजन करना है, जिससे क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास हो सके। 

योजना छोटी और बड़ी दोनों तरह की इकाइयों के लिए आकर्षक बनायी गई है। इसके तहत कई प्रोत्साहन दिए गए हैं। संयंत्र और मशीनरी में 50 करोड़ रुपये तक निवेश करने वाली छोटी इकाइयों को 7.5 करोड़ रुपये तक पूंजी प्रोत्साहन मिलेगा।

पूंजी ब्याज सहायता का भी प्रावधान गिया गया है। संयंत्र और मशीनरी (मैन्युफैक्चरिंग में)या भवन निर्माण और अन्य सभी स्थायी भौतिक परिसंपत्तियों में (सेवा क्षेत्र में) निवेश के लिए 500 करोड़ रूपये तक की ऋण राशि पर अधिकतम 7 वर्षों के लिए 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ऋण दी जाएगी।

योजना के तहत जीएसटी से जुड़ा प्रोत्साहन भी शामिल है। जीएसटी से जुड़े प्रोत्साहन को शामिल करके योजना को व्यापार-सुगमता के अनुरूप सहज बनाया गया है। जीएसटी से जुड़ा प्रोत्साहन पारदर्शिता से समझौता किए बिना अनुपालन बोझ को कम करना सुनिश्चित करेगा। यह जीएसटी की अदायगी या वापसी नहीं है बल्कि केंद्र शासित जम्मू और कश्मीर के नुकसान की भरपाई के लिए सकल जीएसटी का इस्तेमाल औद्योगिक प्रोत्साहन की पात्रता निर्धारित करने में होता है।

प्रस्तावित योजना का वित्तीय परिव्यय योजना अवधि 2020-21 से 2036-37 के लिए 28,400 करोड़ रुपये है। अभी तक विभिन्न स्पेशल पैकेज योजनाओं के अंतर्गत 1,123.84 करोड़ रुपये दिए गए हैं। अनुमान लगाया गया है कि इस योजना के तहत किए जाने वाले प्रयास से लगभग 4.5 लाख व्यक्तियों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त कार्यशील पूंजी ब्याज सहायता के कारण योजना लगभग 35,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देगी।

 

 

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