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ताहिर के भाई शाह आलम के साथ दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा पीएफआई का आतंकी

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उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा के मामले में आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शाह आलम पर चाँदबाग में भड़की हिंसा में शामिल होने का आरोप है।

इसके साथ ही दिल्ली पुलिस के हाथ एक बड़ी सफलता तब लगी जब त्रिलोकपुरी इलाके से पुलिस ने दानिश नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया। पुलिस स्पेशल सेल के मुताबिक दानिश, दानिश पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का दिल्ली इंचार्ज है और दिल्ली में 23 से 25 फरवरी के बीच हुई हिंसा से उसका संबंध है।

मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया था शाह आलम

लंबे समय तक दिल्ली हिंसा को लेकर पुलिस का ध्यान शाह आलम पर नहीं गया था, जिसकी वजह से उस पर ना कोई एफआईआर हुई और ना कोई पूछताछ। शाह आलम ने इन परिस्थितियों का फायदा और फरार हो गया।

जानकारी के मुताबिक गवाहों ने अपने बयानों में शाह आलम का नाम लिया था, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने उसकी पूछताछ की तो पता चला कि वो फरार है। चश्मदीदों ने बताया कि हिंसा वाले दिन शाह आलम ताहिर हुसैन की छत पर मौजूद था और हिंसा भड़काने में उसका बहुत बड़ा हाथ है।

क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा PFI का मोहरा

दिल्ली पुलिस ने त्रिलोकपुरी इलाके से दानिश नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है, जो कि आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़ा हुआ है। दानिश पॉपुलर PFI का दिल्ली इंचार्ज है, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी आंदोलन के दौरान से ही लोगों को भड़काने और हिंसा फैलाने का काम कर रहा है।

AAP के कई नेता होंगे बेनकाब

दिल्ली में जिस तरह से दंगाइयों ने सड़कों और घरों पर तांडव किया, उससे बार-बार सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी हिंसा बिना पूर्व तैयारी और साजिश की नहीं हो सकती। फिर सवाल उठता है कि इस साजिश में कौन-कौन लोग शामिल है। इन सवालों का जवाब अभी पूरी तरह से मिलना बाकी है, लेकिन  हिंसा वाली जगहों से मिले गुलेल, पत्थर और पेट्रोल बम स्पष्ट तौर पर साजिश का संकेत दे रहे हैं। आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के घर का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जो पहली नजर में चीख चीख कर हिंसा और उसकी साजिश की कहानी बयां कर रहा है।

ताहिर हुसैन ने अपने बचाव में सफाई दी और वीडियो भी जारी किया। लेकिन उसके द्वारा दी गई दलीलें उसके घर के वायरल वीडियो के सामने कहीं नहीं टिकते। अंकित शर्मा हत्या और दंगा मामले में केस दर्ज होने के बाद से ताहिर हुसैन फरार है। लेकिन जिस तरह ताहिर हुसैन ने दंगे को अंजाम दिया है, उससे पता चलता है कि उसके पीछे बड़ी ताकतें काम कर रही हैं। आम आदमी पार्टी का एक ऐसा पार्षद है, जो एक मजदूर से एक रसूखदार नेता बन गया। उसकी पहुंच सीधे आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं तक है। बीजेपी संवाद ने एक ट्वीट किया है, जिसमें बताया है कि हिंसा के तीन दिन पहले तक ताहिर हुसैन ने अमानतुल्लाह खान को 56 बार, मनीष सिसोदिया को 18 बार और सीएम अरविंद केजरीवाल को 9 बार फोन किया था।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली हिंसा के मुद्दे पर आप प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा प्रहार किया। मिश्रा ने दिल्ली हिंसा के लिए केजरीवाल के साथ ही आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह पर आरोप लगाया है। मिश्रा ने गुरुवार को एक ट्वीट में कहा-
”डंके की चोट पर कह रहा हूं। अगर दंगों के दिनों की ताहिर हुसैन के फोन के कॉल डिटेल्स खुल गई तो दंगों में और अंकित शर्मा की हत्या में संजय सिंह और केजरीवाल दोनों की भूमिका सामने आ जाएगी।”

इस बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्र सरकार से एक गंभीर सवाल किया है। उन्होंने ट्वीट कर सरकार से पूछा है कि अंकित शर्मा की हत्या कहीं आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के इशारे पर इसलिए तो नहीं की गई क्योंकि वह बांग्लादेशी आतंकवादियों के साथ ताहिर हुसैन के संबंधों की जांच कर रहे थे?

सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘सरकार को यह स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा कहीं बांग्लादेशी आतंकियों के साथ ताहिर हुसैन के संबंधों के तार तो नहीं ढूंढ रहे थे और इसीलिए उनकी हत्या ताहिर के इशारे पर कर दी गई। अंकित की हत्या अगर बांग्लादेशी आतंकियों के साथ ताहिर के संबंधों पर नजर रखने के लिए हुई है तो यह बेहद गंभीर मामला है।’

जिस तरीके से अंकित शर्मा की हत्या हुई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जो खुलासा हुआ, उससे सुब्रमण्यम स्वामी के सवालों को बल मिला है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मुताबिक अंकित के शरीर पर चाकुओं के अनगिनत वार के निशान थे। डॉक्टरों के मुताबिक अंकित के शरीर के हर हिस्से पर चाकू से वार किया गया था। यहां तक की उसकी आंत तक को निकाल लिया गया था। अंकित का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के मुताबिक किसी के शरीर में इतने ज़ख्म उन्होंने कभी नहीं देखे थे। दंगे में किसी की मरना और एक जानबूझकर किसी को मारने में बहुत फर्क होता है और इस मामले में ये फर्क स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

सुब्रमण्यम स्वामी के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि उन्होंने यह आरोप ऐसे ही नहीं लगाए होंगे। पिछले वर्ष जाफराबाद में NIA ने जब कई सर्च अभियान चलाया था तब NIA को आंतकी सुराग मिले थे जिसमें दिल्ली और UP में कई आतंकी हमले करने का प्लान शामिल था। इस छापे में NIA ने बम बनाने के लिए भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की थी। वहीं पिछले महीने 9 जनवरी को, दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में एक इस्लामिक स्टेट (IS) के आतंकी मॉड्यूल का भी पता लगाया था, जिसमें दिल्ली के वज़ीराबाद इलाके में तीन आतंकी संदिग्धों की गिरफ़्तारी हुई थी। इसके साथ ही कई मामले देश में ऐसे भी हैं जिसमें बांग्लादेशी घुसपैठियों आतंकियों के साथ लिंक सामने आये हैं। ऐसे में अगर दिल्ली में बांग्लादेशी आतंकवादियों का साथ देने और अंकित शर्मा की हत्या में में कहीं से भी ताहिर हुसैन की भूमिका सामने आती है तो यह मामला आम आदमी पार्टी के लिए और बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है। 

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