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मोदी सरकार के प्रयासों से मिला एग्री एक्सपोर्ट को बढ़ावा, गेंहू, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश हर चुनौती से टकराते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में सुधार दिखाई दे रहा है। इसमें कृषि क्षेत्र का भी महत्वपूर्ण योगदान है। मोदी सरकार के प्रोत्साहन से गेंहू, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात में जबरदस्त वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2021-22 के दस महीने में भारत के कृषि‍ न‍िर्यात में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एपीडा के तहत निर्यात 15.59 बिलियन डॉलर से बढ़कर 19.71 बिलियन डॉलर हुआ। चावल निर्यात में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई,जिससे 7,696 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कमाई हुई। प‍िछले साल की तुलना में व‍िदेशी बाजारों में भारतीय गेंहू की मांग में जबरदस्‍त उछाल आया है। 

अप्रैल-जनवरी 2021-22 के दौरान गेहूं के निर्यात में 1,742 मिलियन डॉलर की भारी वृद्धि दर्ज की गई, जो 2020-21 की इसी अवधि में 387 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जब यह 340.17 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। भारत ने पिछले तीन वर्षों में 2352.22 मिलियन डॉलर मूल्य का गेहूं निर्यात किया है, जिसमें चालू वित्तवर्ष 2021-22 के पहले 10 महीने भी शामिल हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि 2019-20 में गेहूं का निर्यात 61.84 मिलियन डॉलर था, जो 2020-21 में बढ़कर 549.67 मिलियन डॉलर हो गया।

वैश्विक गेहूं निर्यात में भारत की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम है। हालांकि, इसका हिस्सा 2016 में 0.14 प्रतिशत से बढ़कर 2020 में 0.54 प्रतिशत हो गया। 2020 में विश्व के कुल उत्पादन में लगभग 14.14 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ भारत गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। हालांकि भारत वैश्विक व्यापार में शीर्ष 10 गेहूं निर्यातकों में से नहीं है, लेकिन निर्यात में इसकी वृद्धि दर अन्य देशों से आगे निकल गई है, जो दुनियाभर में नए बाजारों तक पहुंचने में तेजी से कदम उठा रही है। 

चालू वित्त वर्ष 2021-22 (अप्रैल-जनवरी) के पहले दस महीनों में मक्का निर्यात 816.31 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान अर्जित 634.85 मिलियन डॉलर से अधिक है। वित्त वर्ष 2019-20 में 142.8 मिलियन डॉलर का निर्यात हासिल करने के बाद से मक्का निर्यात लगभग छह गुना बढ़ गया, जिससे कोविड-19 महामारी के प्रकोप से उत्पन्न लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियों के बावजूद पिछले तीन वर्षों में निर्यात का कुल मूल्य 1593.73 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी देश भारत से मक्का के प्रमुख आयातक हैं। बांग्लादेश ने चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-जनवरी) में 345.5 मिलियन डॉलर का मक्का आयात किया है, जबकि नेपाल ने इस अवधि के दौरान 132.16 मिलियन डॉलर मूल्य का मक्का आयात किया है। वियतनाम मक्का के निर्यात के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरा है। भारत ने चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों (अप्रैल-जनवरी 2021-22) में वियतनाम को 244.24 मिलियन डॉलर का मक्का निर्यात किया। अन्य प्रमुख आयातक देश मलेशिया, म्यांमार, श्रीलंका, भूटान, ताइवान, ओमान आदि हैं।

अन्य मोटे अनाजों के निर्यात में 66 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इससे सरकार को 869 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आय हुई। इसके अलावा मांस, डेयरी और पोल्ट्री के निर्यात में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो 3,408 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। फलों और सब्जियों के निर्यात में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे 1,207 मिलियन अमेरिकी डॉलर अर्जित किया गया है। वहीं प्रसंस्कृत फल और सब्जियों के निर्यात में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो बढ़कर 1,269 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।

गौरतलब है कि कृषि निर्यात में यह वृद्धि विभिन्न देशों में एपीडा द्वारा बी2बी प्रदर्शनियों के आयोजन और विपणन अभियानों के माध्यम से नए संभावित बाजारों की खोज से संभव हो पाया है। इसके अलावा क्रेता-विक्रेता बैठक के माध्यम से पंजीकृत उत्पादों के भौगोलिक संकेतों का प्रचार किया गया है।कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए एपीडा द्वारा देश भर में 220 प्रयोगशालाओं को मान्यता दी गई है। एपीडा बुनियादी ढांचे के विकास और गुणवत्ता में सुधार के माध्यम से प्रयोगशालाओं का उन्नयन और सुदृढीकरण में सहायता प्रदान कर रहा है। वहीं मोदी सरकार कृषि निर्यात में बढ़ोतरी के साथ किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

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