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बिजली संकट पर ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ की कहावत चरितार्थ कर रही है राजस्थान सरकार

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरह राजस्थान सरकार भी कोयले की कमी का रोना रो रही है। सरकार भी केजरीवाल की उसी राह पर है कि प्राब्लम तो अपनी वजह से है और इसका ठीकरा केंद्र सरकार और कोल इंडिया के सिर मढ़कर खुद पाक-साफ हो लें। कोरोनाकाल में राजस्थान सरकार ने कोल इंडिया और पीकेसीएल का करोंड़ों का बकाया तो अदा किया नहीं…अलबत्ता उन पर ही कोयले की कम आपूर्ति का आरोप लगा रही है।

राजस्थान की छह बड़ी बिजली उत्पादन कंपनियों के पास सोमवार तक 2.17 लाख मीट्रिक टन कोयले का स्टॉक है। दरअसल, राज्य के कुछ पावर प्लांट कोयले की कमी और कुछ तकनीकी खराबी से जूझ रहे हैं। ऐसे में बिजली संकट तो खड़ा होना ही था। वर्तमान में बिजली की डिमांड 12500 मेगावाट है और उपलब्ध 8500 मेगावाट ही हो पा रही है।

600 करोड़ चुकाए नहीं, और मांग रहे कोयला
कोयले की कमी को लेकर राजस्थान सरकार ‘उल्टा तोर कोतवाल को डांटे’ की कहावत ही चरितार्थ कर रहा है। राजस्थान ने कोल इंडिया को पिछली खरीद के ही 600 करोड़ नहीं चुकाए हैं। बकाया अदा करना का बजाए वह कोल इंडिया पर आरोप लगा रहा है कि वह कोयले की आपूर्ति नहीं कर रहा है। इसके चलते राजस्थान में बिजली संकट उत्पन्न हो रहा है। इसी प्रकार पीकेसीएल (अडानी) के भी 1700 करोड़ रुपए बकाया चल रहे हैं।

साढ़े 14 हजार करोड़ सब्सिडी के भी नहीं दिए
दरअसल, कांग्रेस ने लोक-लुभावन में सब्सिडी देने की घोषणाएं तो कर दीं, लेकिन अब इनकी भरपाई नहीं कर पा रही है। राजस्थान सरकार ने कृषि और बीपीएल कनेक्शनों की सब्सिडी के करीब 14000 करोड़ रुपए जयपुर, जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम को जारी नहीं किए हैं। सरकारी विभाग भी बिल के डिस्कॉम को 1900 करोड़ रुपए नहीं दे रहे हैं। इससे डिस्कॉम बिजली कंपनियों के 30 हजार करोड़ रुपए नहीं चुका पा रही हैं।

एक साल से कोयले की डिमांड ही जेनरेट नहीं कीं
राजस्थान सरकार बिजली संकट के लिए कोयले की कमी को जिम्मेवार मान रही है और इसके लिए कोल इंडिया को दोषी ठहरा रही है कि उसे वहां से कोयला समय पर नहीं मिल रहा। इसके चलते ही समुचित बिजली उत्पादन नहीं हो पा रहा और राज्य में बिजली संकट खड़ा हो गया है। हैरानी की बात है कि राजस्थान सरकार ने पूरे साल न डिमांड जेनरेट की और न ही कोल इंडिया से कोयला लिया।

राजस्थान की खुद की माइंस, इनमें भी उत्पादन नहीं
कोयले को लेकर राजस्थान सरकार की लापरवाही का आलम यह है कि उसने न तो साल भर से कोल इंडिया से कोयला लिया है और अब बारिश के मौसम में अचानक डिमांड खड़ी कर दी। कोल इंडिया ने वाजिब सवाल उठाया है कि जब राजस्थान के पास कोल माइंस हैं तो इनमें कोयला का समुचित उत्पादन क्यों नहीं हो रहा है ?

एक्शन में केन्द्र सरकार, बनाई कोर मैनेजमेंट टीम
केन्द्र सरकार इसके लिए पूरे प्रयास कर रही है कि राज्यों में कोयले की कमी न आने पाए। इसके लिए केंद्र सरकार ने शनिवार को कोर मैनेजमेंट टीम का भी गठन किया है। यह टीम कोयले की रोजाना की आपूर्ति पर नजर रखेगी। कोल इंडिया लिमिटेड और रेलवे के साथ मिलकर सभी राज्यों में कोयले की उचित आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगी और इसके लिए राज्यों के संपर्क में रहेगी।

फोटो सौजन्य

संकट बढ़ा तो अफसरों से एसी न चलाने की अपील
समय रहते कोयले की आपूर्ति को सुनिश्चित करने में विफल रही गहलोत सरकार अब प्रदेश में बिजली संकट का होव्वा खड़ा कर शहरों और गांवों में बिजली कटौती करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने भी अपनी बैठक में अधिकारियों को एयर कंडीशनर न चलाने की अपील की। लेकिन सारे पावर प्लांट कैसे चलें और कोयले की खरीद कैसे हो, इस पर कोई बड़ा निर्णय नहीं लिया है। यह दीगर है कि एसी न चलाने की सीएम की अपील का अफसरों पर कोई असर नहीं हुआ।

सरकार ने न कोयले की डिमांड की, न बकाया दिया
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी गहलोत सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने एक बयान में कहा है कि राज्य में बिजली संकट के लिए पूरी तरह गहलोत सरकार दोषी है। दरअसल, सरकार न तो कोयला की डिमांड करती है और न ही बकाया पैसा अदा कर पा रही है। ऐसे में कोयला कहां से आएगा ? बारिश का बहाना भी गलत है, क्योंकि यह तो हर बार आती है और हर बार खानों में पानी भरता है। सरकार को इससे पहले ही यथोचित इंतजाम करने चाहिए थे।

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