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सावधान!, भारत में ‘रिजीम चेंज’ के लिए खूनी क्रांति की धमकी, बांग्लादेश जैसा हिंदू जेनोसाइड की खौफनाक प्लानिंग

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में विकास हो रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी और भारत का दबदबा बढ़ रहा है। यही वजह है कि अमेरिका जैसा शाक्तिशाली देश भारत को उभरती हुई महाशक्ति और प्रतिद्वंदी मानने लगा है। अमेरिका को लग रहा है कि अगर भारत को अभी रोका नहीं गया तो आने वाले कुछ ही वर्षों में वो चीन की तरह उसको चुनौती दे सकता है। इसलिए अमेरिका भारत में एक ऐसी कठपुतली सरकार चाहता है, जो उसके इशारों पर काम कर सके। इस मकसद को पूरा करने के लिए विपक्ष दलों को आर्थिक मदद देकर उनका इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके माध्यम से देश में रिजीम चेंज की कोशिश की जा रही है।

भारत में ‘खूनी क्रांति’ के जरिए रिजीम चेंज की कोशिश
विदेशी फंडिंग पर पलने वाले कांग्रेस और तमाम विपक्षी दल के सामने मुश्किल यह है कि वो संवैधानिक तरीके से प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार को हटा नहीं सकते, क्योंकि उन्हें पता है कि संसद में उनके पक्ष में संख्या बल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से उन्हें उम्मीद नहीं है, क्योंकि ‘वोट चोरी’ का कोई ठोस सबूत नहीं है। इसलिए वो लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकार को संसद की जगह सड़क से अपदस्त करना चाहते हैं। विदेशों से सुपारी लेकर सड़क पर ‘लोकतंत्र की डकैती’ करना चाहते हैं। इसके लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। ‘वोट चोरी’ के नाम पर सड़क पर अराजकता फैलाकर खूनी क्रांति करना चाहते हैं।

सड़क पर अराजकता और ‘लोकतंत्र की डकैती’ की कोशिश 
विपक्षी दलों ने सड़क पर ‘लोकतंत्र की डकैती’ को अंजाम देने के लिए एक टूलकिट तैयार किया है, जिसमें एक-एककर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता खत्म करना शामिल है। यह साबित करना है कि देश की सभी संस्थाएं सरकार की कठपुतली बन चुकी हैं। इसका मकसद जनता में असंतोष पैदा कर उनका समर्थन हासिल करना है। कॉकरोच जनता पार्टी को मोहरा बनाकर युवाओं खासकर ‘जेन-जी’ को भड़काना है, ताकि बांग्लादेश और नेपाल की तरह सड़क पर अराजकता पैदा किया जा सके। पुलिस पर हमला, सुरक्षा एजेंसियों और राष्ट्रवादी मीडिया को बदनाम करना इनकी रणनीति का हिस्सा है।

प्रशांत भूषण की रिजीम चेंज करने की खुलेआम धमकी
15 अक्टूबर,2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने खुले तौर पर रिजीम चेंज का एलान किया। उन्होंने कहा,
“हां, हम चाहते हैं सत्ता परिवर्तन हो, खुले तौर पर कह रहा हूं ये सत्ता परिवर्तन की लड़ाई है। हम लोग सत्ता परिवर्तन कराकर रहेंगे “

प्रशांत भूषण की खूनी क्रांति के जरिए रिजीम चेंज की योजना
इससे पहले 13 अक्टूबर,2026 को प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया ग्रुप में बातचीत के दौरान खूनी क्रांति की बात कही थी। उन्होंने कहा, “हमारे सामने विकल्प क्या है ? हमारे पास विकल्प है कि क्रांति के जरिए कुछ करा लें। अब उस क्रांति में बहुत खून-खराबा होगा। क्योंकि ये लोग अभी पुलिस इस्तेमाल कर रहे हैं। अर्धसैनिक बल इस्तेमाल कर रहे हैं। इन लोगों ने अभी बंदूकें इस्तेमाल नहीं की है। वो सभी यूज करेंगे। आर्मी को भी बुला सकते हैं।”

सोशल और विदेशी मीडिया के माध्यम से प्रोपेगैंडा
सोशल मीडिया के माध्यम से मोदी सरकार के खिलाफ नैरेटिव चलाना शामिल है, ताकि दुनिया को दिखाया जा सके कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार अलोकप्रिय और तानाशाही हो चुकी है। उसका जनाधार खत्म हो चुका है। इससे उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाना और आसान हो जाएगा। इसमें अंतर्राष्ट्रीय मीडिया गिद्ध की तरह नजर गड़ाए बैठी हैं। अंतर्राष्ट्रीय मंचों से सरकार के खिलाफ बयान जारी होंगे। इससे मोदी सरकार पर देश के बाहर से भी दबाव बनेगा और सत्ता परिवर्तन करना और आसान हो जाएगा।

12 अक्टूबर,2026 को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा था, “हम चाहते हैं कि सड़कों पर 20,000 से 30,000 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं।

अक्टूबर 2026
जो भी कहना होता है, सड़क पर कहता हूं- राहुल गांधी

जुलाई 2026 में आंदोलनजीवी प्रशांत भूषण ने कहा कि था इस देश का फ्यूचर संसद से नहीं सड़क से तय होगा।

हर्ष मंदर, 2020, CAA के दौरान

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