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राजनीतिक गिद्ध फिर बेनकाब, गंगा किनारे शव दफनाने के मामले में योगी और मोदी सरकार के साथ देश को किया बदनाम

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उत्तर प्रदेश के सियासी संग्राम में सभी पार्टियां एक-दूसरे पर वार-पलटवार कर रही हैं। लेकिन समाजवादी पार्टी, कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष और उनके समर्थक गंगा नदी के किनारे दफनाये गए शवों को लेकर सियासत करने से बाज नहीं आ रहे हैं। आज भी वो योगी और मोदी सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार करने में लगे हैं। इसी बीच तीर्थराज प्रयाग से आई तस्वीर ने विपक्ष की साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका खत्म हो गई है। कोरना की दूसरी लहर को गए दस महीने हो गए। लेकिन आज भी गंगा किनारे शवों को दफनाया जा रहा है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब कोरोना की कोई लहर नहीं है, तो गंगा किनारे शव क्यों दफनाये जा रहे हैं ?

राजनीतिक गिद्धों द्वारा हिन्दू परंपरा का अपमान

स्थानीय लोगों ने इस सवाल का जवाब देकर शव पर सियासत करने वाले राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, अखिलेश यादव को बेनकाब कर दिया है। साथ ही संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति कर हिन्दू परंपरा का अपमान करने का आरोप लगाया है। दरअसल तीर्थराज प्रयाग में पीढ़ि से कई हिंदू परिवारों में शवों को गंगा नदी के तीरे रेती में दफनाने की परंपरा है। यहां के फाफामऊ के साथ ही श्रृंगवेरपुर में ऐसे हजारों शव दफन हुए होंगे। पहले लोग गंगा में शव बहा देते थे, लेकिन बहाने पर पाबंदी लगने के बाद लोग गंगा के किनारे शव दफन करने लगे हैं।

सियासी भूख मिटाने के लिए आपदा को अवसर में बदला

गौरतलब है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान राजनीतिक गिद्धों ने रेत में दफन पुराने शव देखकर अपनी सियासी भूख मिटाने के लिए आपदा को अवसर में बदल दिया। रेत में दफन शवों को कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौत से जोड़ा दिया। उन्हें हिन्दू परंपरा और देश की खराब होती छवि की भी परवाह नहीं थी। यूपी की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए विपक्षी नेताओं ने जमकर राजनीति की। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इनका भरपूर साथ दिया। गंगा के किनारे दफनाये गए शवों की तस्वीरें न्यॉयार्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट और गार्जियन जैसे अंतरराष्ट्रीय अखबारों में छपीं, और सोशल मीडिया पर वायरल हुईं।

क्यों नहीं मिला पॉलीथिन में लपेटा हुआ शव ?

स्थानीय लोगों के मुताबिक परिजनों द्वारा अपने प्रियजनों के शवों को गंगा में बहा देना या नदी किनारे रेत में दफना कर कब्र पर ‘रामनामी’ ओढ़ा देना काफी पुरानी परंपरा का हिस्सा है। लेकिन दफन हुए और नदी में उतराता हुआ कोई शव कोविड प्रोटोकॉल के मुताबिक पॉलीथिन में लपेटा हुआ नहीं मिला। दरअसल शासन की रोक के बाद भी शैव सम्प्रदाय के अनुयायी यहां शव दफनाने आते हैं। इसे रोका नहीं जा सकता। इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होंगी। यही वजह है कि प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर घाट पर शव दफनाने की परंपरा जारी हैं। इसकी तस्वीरें 2018 और 2021 के बाद 2022 में भी मीडिया में सामने आई हैं।

अखिलेश सरकार में गंगा में उतराते मिले थे सैकड़ों शव

  • 13 जनवरी, 2015 को उन्नाव जिले के परियर स्थित गंगा घाट के पास 104 से अधिक शव गंगा में उतराते मिले थे।
  • 23 जनवरी, 2015 को उन्नाव के फतेहपुर चौरासी के सरैया घाट पर करीब 30 शव गंगा में उतराते हुए मिले।
  • फरवरी 2015 में उन्नाव के जाजमऊ के चंदन घाट पर नदी में आधा दर्जन से ज्यादा शव मिले।
  • अगस्त 2015 में हाजीपुर चौकी क्षेत्र के रौतापुर कच्चे घाट पर शवों को उतराता देख लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी।

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