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पीएम मोदी ने की ‘मन की बात’, लॉकडाउन के दौरान लोगों को हो रही परेशानियों के प्रति जतायी संवेदना

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ में कोरोना वायरस से जुड़े ख़तरों पर बात की और देश में चल रहे लॉकडाउन को लेकर जनता से अपनी बात साझा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस की गंभीरता और दुनियाभर के विकसित देशों की त्रासदी को देखते हुए हमने रिस्क लेते हुए लॉकडाउन का बड़ा फैसला लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को हो रही परेशानियों के लिए संवेदना जताते हुए कहा कि इसके लिए वह देशभर की जनता से माफी मांगते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “दुनिया के हालात देखने के बाद लगता है कि आपके परिवार को सुरक्षित रखने का यही एक रास्ता बचा है। बहुत से लोग मुझसे नाराज भी होंगे कि ऐसे कैसे सबको घर में बंद कर रखा है। आपको जो असुविधा हुई है, इसके लिए क्षमा मांगता हूं।”

लॉकडाउन के बात देशभर से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो कि किसी का भी दिल पिघला सकती हैं। शहरों में दिहाड़ी मजदूरी पर काम करने वाले लोग गांवों की तरफ पलायन कर रहे हैं। लोग हजार किलोमीटर की भी दूरी की परवाह किए बिना छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ पैदल ही निकल पड़े हैं। ऐसे में मीडिया में लगातार ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं जो बेहद संवेदनशील हैं।

शनिवार से ही दिल्ली के आनंदविहार और धौला कुआं में लोगों का बड़ा हुजूम देखने को मिला। उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों ने कुछ बसों का इंतजाम किया है जिससे कि लोगों को उनके गांवों तक पहुंचाया जा सके। हालांकि इसमें खतरा यह है कि भीड़ की वजह से संक्रमण आक्रामक हो सकता है। राज्य सरकारें लगातार लोगों को समझा रही हैं कि जहां हैं वहीं रहें क्योंकि लोगों के भोजन और रहने का प्रबंध किया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मैं आपकी परेशानी समझता हूं देश को कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई के लिए ये कदम उठाये बिना कोई रास्ता नहीं था। कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई, जीवन और मृत्यु के बीच की लड़ाई है और इस लड़ाई में हमें जीतना है।’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘बीमारी और उसके प्रकोप से शुरुआत में ही निबटना चाहिए, बाद में रोग असाध्य हो जाते हैं तब इलाज भी मुश्किल हो जाता है। आज पूरा हिंदुस्तान, हर हिन्दुस्तानी यही कर रहा है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ लोग जो कोरोना के संदिग्ध हैं उनके साथ भी बुरा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग बनाने की जरूरत है न कि इमोशनल डिस्टेंस बनाने की। वे लोग आपको बचाने के लिए ही क्वारंटाइन में हैं। इसलिए उनके प्रति हमारी भी जिम्मेदारी है। उनका सहयोग करने की आवश्यकता है। कोरोना से लड़ने का तरीका सोशल डिस्टेंसिंग है लेकिन इसका मतलब सोशल इंटरैक्शन को खत्म करने का नहीं है। यह समय रिश्तों को तरोताजा करने का है। यह समय हमें बताता है कि सोशल डिस्टेंसिंग बढ़ाओ और इमोशनल डिस्टेंस घटाओ।

प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन के दौरान समय का सदुपयोग करने वाले लोगों के अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर देश के विभिन्न इलाकों के लोगों द्वारा बताये जा रहे उनके अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि कोटा के यशवर्धन ने ‘नरेंद्र मोदी एप’ पर लिखा है कि वे लॉकडाउन में पारिवारिक संबंधों को मजबूत बना रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक तरफ लॉकडाउन में लोग अपने घरों तक सीमित हैं, वहीं लॉकडाउन ने ऐसे तमाम कामों को करने का अवसर भी दिया है जो कामकाज की व्यस्तताओं के कारण लोग नहीं कर पाते हैं। इस अवधि में आप संगीत, बागवानी और अन्य शौक पूरे कर सकते हैं, साथ ही बचपन के मित्रों से भी बात कर इस समय का सदुपयोग कर सकते हैं। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में लगे दवा, दूध, सब्जी और किराना विक्रेताओं के सहयोग की भी सराहना करते हुए कहा कि ये लोग संकट के इस दौर में जोखिम लेकर भी सभी देशवासियों को जरूरत की वस्तुएं मुहैया करा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान संचार एवं बैंकिंग सेवाओं में लगे कर्माचारियों के सहयोग के लिये आभार प्रकट किया। इससे पहले मोदी ने आगरा के 73 वर्षीय अशोक कपूर से भी फोन पर बात की जिनका पूरा परिवार कोरोना के संक्रमण की चपेट में आ गया था।

अशोक कपूर ने प्रधानमंत्री को बताया कि कारोबार के सिलसिले में उनके दो बेटे और दिल्ली निवासी दामाद इटली गये थे। उन्होंने बताया कि वापस लौटने पर दामाद को दिल्ली में बुखार की शिकायत होने पर कोरोना का परीक्षण कराने पर संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद आगरा में उनके दोनों बेटे, पोते, बहू सहित सभी छह परिजनों का भी टेस्ट कराने पर संक्रमण की पुष्टि होने के बाद इलाज के लिए दिल्ली लाया गया जहां उनके पूरे परिवार का सफल इलाज हुआ।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बीमारी के संक्रमण को परास्त करने में अशोक सहित समूचे परिवार की सराहना करते हुए देशवासियों से कोरोना वायरस के प्रति भयभीत होने के बजाय चिकित्सा निर्देशों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘समय पर डाक्टरों से संपर्क कर और उनके निर्देशों का पालन करके हम इस बीमारी को परास्त कर सकते हैं।’

इस दौरान उन्होंने कोरोना के संक्रमण के खिलाफ जारी जंग में सक्रिय सहयोग कर रहे दिल्ली के डा. नीतीश गुप्ता से भी फोन पर बात की। डा. गुप्ता ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि हम सैनिकों की तर्ज पर पूरी तरह से मुस्तैद हैं। हमारा एक ही ध्येय है कि प्रत्येक मरीज ठीक होकर घर जाए।

डा. गुप्ता ने इस काम में पेश आ रही चुनौतियों के बारे में प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि घबराये हुए मरीजों को शुरू में बहुत समझाना होता है कि वे ठीक हो जायेंगे। डा. गुप्ता ने कहा, ‘हम मरीजों की कांउसलिंग करके समझाते हैं कि वे कैसे जल्द ठीक होंगे। मरीजों से हम बार बार बात करते हैं और जब मरीज ठीक होने लगते तो फिर उनमें आत्मविश्वास आता है।’ डा. गुप्ता ने बताया कि वह अब तक 16 मरीजों को ठीक करके अस्पताल से घर भेज चुके हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डा. नीतीश गुप्ता जैसों के प्रयासों से भारत इस लड़ाई में अवश्य जीतेगा। दुनिया का अनुभव बताता है कि इस बीमारी से बीमार होने वालों की संख्या अचानक बढ़ती है। भारत में यह स्थिति न आए इसके लिए सरकार पूरा प्रयास कर रही है।

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