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टीके को पेटेंट मुक्त करने के प्रस्ताव को व्यापक समर्थक, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- भारत जी-7 का स्वभाविक सहयोगी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के ‘आउटरीच सेशंस’ के दूसरे दिन दो सत्रों में हिस्सा लिया। ये दोनों सत्र ‘बिल्डिंग बैक टूगैदर–ओपन सोसायटीज एंड इकोनॉमिक्स’ और ‘बिल्डिंग बैक ग्रीनरः क्लाईमेट एंड नेचर’ थे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तानाशाही, आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद, झूठी सूचनाओं और आर्थिक जोर-जबरदस्ती से उत्पन्न खतरों से साझा मूल्यों की रक्षा करने में भारत जी-7 का एक स्वाभाविक साझेदार है। विदेश मंत्रालय के अनुसार जी-7 शिखर सम्मेलन में कोविड टीकों पर पेटेंट छूट संबंधी भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव को व्यापक समर्थन मिला।

मुक्त समाज वाले सत्र में प्रमुख वक्ता के रूप में आमंत्रित प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया किया कि किस तरह लोकतंत्र और स्वतंत्रता भारत की सभ्यता में रची-बसी है। उन्होंने तमाम शीर्ष नेतृत्व की चिंता से सहमति जताई की मुक्त समाज गलत सूचनाओं और साईबर-हमले का आसानी से निशाना बन जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने और उन्हें किसी भी तरह ठेस न पहुंचे, इसके लिये साइबर स्पेस को हमेशा एक मंच बना रहना चाहिए। अलोकतांत्रिक और असमान प्रकृति वाले वैश्विक शासन संस्थानों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बहुस्तरीय प्रणाली में सुधार ही मुक्त समाजों के अस्तित्व को कायम रखने की गारंटी है।

जलवायु परिवर्तन के सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पृथ्वी के वातावरण, जैव-विविधता और महासागरों की सुरक्षा वे देश नहीं कर सकते, जो अलग-अलग इकाइयों के रूप में प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर एक साथ मिलकर कार्रवाई करनी चाहिए। जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत की अटल प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय रेल विभाग ने तय किया है कि 2030 तक शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य पूरा कर लिया जाए। उन्होंने जोर दिया कि जी-20 देशों में केवल भारत ही पेरिस समझौते की प्रतिबद्धता पूरी कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत द्वारा शुरू की गई दो प्रमुख वैश्विक पहलें बहुत प्रभावशाली साबित हो रही हैं। इन दोनों पहलों में सीडीआरआई (को-एलीशन फॉर डिसास्टर रेज़ेलियंट इंफ्रास्ट्रक्चर) और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकासशील देशों की जलवायु वित्त तक अच्छी पहुंच हो। वैश्विक एकजुटता और एकता, खासतौर से मुक्त और लोकतांत्रिक समाजों व अर्थव्यवस्थाओं के लिए स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक बहाली की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री के संदेश का सभी राष्ट्र प्रमुखों ने स्वागत किया।

इसके एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के पहले आउटरीच सत्र में भाग लिया। ‘बिल्डिंग बैक स्ट्रॉन्गर-हेल्थ’ शीर्षक वाला यह सत्र कोरोनावायरस महामारी से दुनिया को निजात दिलाने और भविष्य में आने वाली महामारियों के खिलाफ सहनशक्ति को मजबूत बनाने पर केंद्रित था। सत्र के दौरान, प्रधानमंत्री ने भारत में कोविड संक्रमण की हालिया लहर के दौरान जी-7 और अन्य अतिथि देशों द्वारा दिए गए समर्थन की सराहना की। उन्होंने महामारी से लड़ने की दिशा में सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के सभी स्तरों के प्रयासों के तालमेल के साथ भारत के ‘समग्र समाज’ के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री मोदी ने संपर्कों का पता लगाने और वैक्सीन प्रबंधन के लिए ओपन सोर्स डिजिटल टूल्स के भारत के सफल उपयोग के बारे में भी जानकारी दी और अन्य विकासशील देशों के साथ अपने अनुभव और विशेषज्ञता को साझा करने की भारत की इच्छा से अवगत कराया। प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्वास्थ्य की व्यवस्था में सुधार लाने के लिए किए जा रहे सामूहिक प्रयासों के लिए भारत के समर्थन की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कोविड संबंधित प्रौद्योगिकियों पर टीआरआईपीएस छूट के लिए भारत और दक्षिण अफ्रीका द्वारा डब्ल्यूटीओ में प्रस्तावित प्रस्ताव पर जी-7 का समर्थन मांगा।

सात देशों के समूह जी-7 में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल हैं। जी-7 के अध्यक्ष के रूप में ब्रिटेन ने भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका को शिखर सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था।

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