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ममता के गुंडों ने 6 साल के पोते के सामने 60 साल की दादी से किया रेप, बंगाल हिंसा की पीड़िताओं ने सुप्रीम कोर्ट को सुनाया दर्द

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पश्चिम बंगाल में तीसरी बार ममता सरकार बनने के लगभग डेढ़ महीने के बाद हिंसा न केवल जारी है, बल्कि पीड़ितों की एक-एक कर खौफनाक आपबीती भी सामने आ रही है। रेप, यौन प्रताड़ना और पुलिस की उदासीनता से बंगाल की महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया है। सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं पर गैंगरेप के आरोप लगाते हुए इन महिलाओं ने शीर्ष अदालत से एसआईटी जांच की गुहार लगाई है।

एक 60 वर्षीय महिला ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 4-5 मई को पूर्व मेदिनीपुर में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद टीएमसी के पांच कार्यकर्ता उसके घर में जबरन घुस गए। लूटपाट करने से पहले 6 साल के पोते सामने ही उसका गैंगरेप किया। पीड़ित महिला ने बताया है कि 3 मई को खेजुरी विधानसभा सीट से बीजेपी की जीत के बाद 100-200 टीएमसी कार्यकर्ताओं की भीड़ ने उसके घर को घेर लिया था और उसे बम से उड़ाने की धमकी दी थी। इस डर से उसकी बहू अगले दिन घर छोड़कर चली गई थी। 

पीड़ित महिला ने बताया कि वारदात के दूसरे दिन वह अचेत अवस्था में पड़ोसियों को मिली। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनका आरोप है कि पुलिस ने एफआईआर लिखने से भी मना कर दिया था। पीड़िता का कहना है कि विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के कार्यकर्ता बदला लेने के लिए रेप को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।

पीड़िता ने मामले की जांच एसआईटी या सीबीआई से कराने की मांग करते हुए कहा कि लोकल पुलिस की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पांच नामजद आरोपितों द्वारा गैंगरेप किया गया। इसकी पुष्टि मेडकल रिपोर्ट में भी हुई थी। बावजूद इसके पुलिस ने जानबूझकर एफआईआर में केवल एक ही आरोपित का नाम लिखा, क्योंकि वे सत्ताधारी दल (टीएमसी) से जुड़े हैं।

अनुसूचित जाति की एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने भी अपने साथ टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित गैंगरेप के मामले की सीबीआई या एसआईटी से जांच करवाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। पीड़िता ने मामले का ट्रायल राज्य से बाहर करवाने की भी मांग की। पीड़िता ने आरोप लगाया कि टीएमसी के गुंडों ने उसे घसीटने के बाद न केवल उसका गैंगरेप किया, बल्कि उसे जंगल में मरने के लिए फेंक दिया था। वारदात के अगले दिन सत्ताधारी पार्टी के एक स्थानीय नेता ने पीड़िता के घर आकर शिकायत नहीं करने के लिए परिजनों को धमकी भी दी थी।

पिछले एक महीने में यह मांग उठती रही है कि सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में होने वाली इस तरह की हिंसा, लूटमार, बलात्कार वगैरह की घटनाओं का स्वतः संज्ञान ले। सामूहिक बलात्कार की जो पीड़िता सुप्रीम कोर्ट गई है उनकी इस मांग से किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए कि बलात्कार और हिंसा की इन घटनाओं की जांच कोर्ट की देखरेख में एसआईटी से करवाई जाए। जब पुलिस सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता की तरह काम कर रही हो, तो ऐसे में न्याय की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट से ही की जा सकती है। 

 

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