Home विचार व्यंग्य : विपक्ष की राजनीति है या ‘कन्फ्यूजन का म्यूजियम’!

व्यंग्य : विपक्ष की राजनीति है या ‘कन्फ्यूजन का म्यूजियम’!

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18 जून को दिल्ली हाई कोर्ट ने जैसे ही केजरीवाल सरकार से पूछा कि ये बताइये कि आप धरना कर रहे हैं या हड़ताल? अदालत के इस सवाल से पूरा कोर्ट रूम भौंचक्क रह गया।  दरअसल ये बड़ा कन्फ्यूजन है, क्योंकि आज तक अरविंद केजरीवाल भी खुद समझ नहीं पाए हैं कि वे हड़ताल पर हैं या धरने पर।

बहरहाल दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के साथ ही पॉलिटिकल पॉल्यूशन भी बढ़ता जा रहा है और चारों तरफ एक धुंध सी है। धुंध माने सीधे शब्दों में समझिये तो… कन्फ्यूजन! आइये दिल्ली की राजनीतिक फिजा में मंडरा रहे ओवरऑल कन्फ्यूजन के बारे में जानते हैं!

आईएएस कह रहे हड़ताल नहीं, केजरीवाल कर रहे हड़ताल तुड़वाने के लिए हड़ताल

दिल्ली सरकार के अधीन कार्यकरत आईएएस अधिकारी कह रहे हैं कि हम हड़ताल पर नहीं हैं और हम रोज काम कर रहे हैं। वे अपने दफ्तरों की छतों पर चढ़कर बैनर और पोस्टर लगा रहे हैं। बता रहे हैं कि हमने तो सिर्फ मुख्यमंत्री और मंत्रियों के आवास पर जाना बंद किया है, वह भी इनके खौफ से। कृप्या इसे हड़ताल न कहिए।

दूसरी ओर दिल्ली के सीएम केजरीवाल आईएएस का हड़ताल तुड़वाने के लिए हड़ताल पर हैं। वह भी एलजी के घर में घुसकर, सोफे पर लेट कर और सात दिनों में वजन बढ़ाकर हड़ताल कर रहे हैं। गजब कनफ्यूजन है…!!!

चार सीएम का केजरीवाल को समर्थन, पीएम से मिले तो मुस्कुराहट ने कह दी कहानी

16 जून की रात को ममता बनर्जी, चंद्रबाबू नायडू, पिनाराई विजयन और कुमारस्वामी सहित चार राज्यों के मुख्यमंत्री जब अरविंद केजरीवाल से मिलकर उन्हें समर्थन देने पहुंचे तो लगा की राजनीति का नया समीकरण तैयार हो गया। उन्होंने केजरीवाल के घर पहुंचकर उनकी पत्नी से मुलाकात की। इन मुख्यमंत्रियों ने कहा कि केजरीवाल के मुद्दे को वे पीएम मोदी के समक्ष रखेंगे।

हालांकि 17 जून को ये तस्वीर बदल गई। केजरीवाल के हड़ताल को अपना समर्थन देने की बात कहने के बाद जब ये सभी सीएम  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिले तो इनकी मुस्कुराहट कुछ और ही बात कह रही थी। जाहिर है गजब कनफ्यूजन है…!!!

कांग्रेस के केजरीवाल विरोध के बीच कुमारस्वामी के समर्थन की सियासत समझिये

ध्यान देने वाली बात यह है कि जिन चार राज्यों के सीएम ने केजरीवाल को समर्थन दिया है उनमें कर्नाटक के नये-नवेले सीएम कुमारस्वामी भी शामिल हैं। अब सवाल उठता है कि जब कांग्रेस ने केजरीवाल के धरने का समर्थन नहीं किया तो कांग्रेस की कृपा से कर्नाटक के सीएम बने जेडीएस नेता कुमारस्वामी ने केजरीवाल का समर्थन क्यों कर दिया? यह सवाल तब और उलझ जाता है जब कुमारस्वामी यहां तक कह चुके हैं कि वे राहुल गांधी की कृपा से ही मुख्यमंत्री हैं। जाहिर है यहां भी गजब कनफ्यूजन है…!!!

बीमारी के नाम पर केजरीवाल के मंत्रियों ने हड़ताल से ले ली छुट्टी, केजरीवाल भी करेंगे धरने से कुट्टी!

दिल्ली में सात दिनों से चल रहे ड्रामे के बीच एक के बाद एक दिलचस्प नजारे सामने आ रहे हैं। चार दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सत्येंद्र जैन का वजन बढ़ने की खबर पर लोग चटखारे ले ही रहे थे कि सत्येंद्र जैन बीमार पड़ गए। अब भला वजन बढ़ने के बाद भी वे कैसे बीमार पड़ गए इस बात की जानकारी तो उन्हें ही होगी, लेकिन हाई कोर्ट ने जैसे ही केजरीवाल सरकार को हड़ताल पर लताड़ लगाई तो सिसोदिया भी बीमार पड़ गए। भाई सच में बीमार पड़ रहे हैं या फिर हड़ताल से छुट्टी चाह रहे हैं। कपिल मिश्रा के ट्वीट ने तो और भी उलझा दिया है। जाहि है यहां भी गजब कनफ्यूजन है…!!!

कांग्रेस को दो सीटों की पार्टी कह कर रामगोपाल यादव की सिसोदिया से मुलाकात ने उलझा दिया सिचुएशन

खबरें हैं कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी सूत्रों के मुताबिक पार्टी साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें ही देना चाहती है। कहा जा रहा है  कि इसलिए ही समाजवादी पार्टी राहुल की इफ्तार पार्टी में शामिल नहीं हुई थी। दूसरी ओर 18 जून को कोर्ट की लताड़ के बाद जब दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को देखने सपा के रामगोपाल यादव पहुंचे तो वहां भी एक अजीब सिचुएशन उत्पन्न हो गई। हुआ यह कि रामगोपाल यादव को देखते ही बीमार मनीष सिसोदिया मुस्कुरा उठे… साफ है राजनीति की इस मुस्कुराहट का उलझन साधारण व्यक्ति की समझ ऊपर की चीज है। जाहिर है यहां भी गजब कनफ्यूजन है…!!!

नीतीश कुमार को महागठबंधन में शामिल होने का कांग्रेस का जबरदस्त ऑफर

17 जून के ऐसी धमाकेदार खबर आई जिसकी लोगों ने कल्पना भी नहीं की थी। कांग्रेस ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को महाऑफर देते हुए कहा कि वे एनडीए छोड़ दें तो उन्हें कांग्रेस महागठबंधन में ले लेगी। कांग्रेस के प्रवक्ता और बिहार मामलों के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कहा, “अगर ऐसी संभावना उभरी तो हम निश्चित तौर पर अपने सहयोगी दलों से विचार-विमर्श करेंगे।” अब नीतीश कुमार यह ऑफर स्वीकार करेंगे या फिर ठुकराएंगे, यह तो आने वाले वक्त बताएगा, लेकिन यहां भी गजब कनफ्यूजन है…!!!

विपक्ष को राहुल गांधी का नेतृत्व मंजूर नहीं, परन्तु थोपना चाहती है कांग्रेस

दरअसल इन सभी कनफ्यूजन का कारण राहुल गांधी को माना जा रहा है। एक ओर जहां कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को देश का भविष्य बता रहे हैं, वहीं विपक्षी एकता का खाका तैयार कर रहे अन्य दलों को राहुल की अगुआई में अंधकार नजर आ रहा है। अब सवाल उठता है कि क्या विपक्षी दलों का गठबंधन कांग्रेस के लिए कोई जगह देख भी रहा है या नहीं? सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस के बीना तीसरा मोर्चा बन पाएगा? इसके अतिरिक्त सवाल यह कि विपक्षी गठबंधन के 11 प्रधानमंत्री उम्मीदवारों में असली प्रधानमंत्री प्रत्याशी कौन होगा?  बहरहाल आगे जो भी हो, लेकिन इतना तय है कि विपक्षी एकता की राह में कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन है भाई…!!!

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