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कांग्रेस में कलह: कर्नाटक में चुनाव अगले साल मगर सत्ता को लेकर खींचतान शुरू, मुख्यमंत्री उम्मीदवारी को लेकर जुबानी जंग तेज

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आजादी के बाद से भारत में सबसे लंबे समय तक सत्ता संभालने वाली और देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस एक परिवार तक सिमट जाने और भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे होने की वजह से मौजूदा राजनीतिक हालात में अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। पिछले दो लोकसभा चुनावों में बुरी तरह पराजित हुई और अब सिर्फ़ दो राज्यों की सत्ता तक सिमटी कांग्रेस आज भी ऐसा लगता है कि आत्मविवेचन करने को तैयार नहीं है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद मई 2022 में पार्टी ने उदयपुर में तीन दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया जिसमें पार्टी को मजबूत करने का संकल्प व्यक्त किया गया। इस शिविर में पार्टी ने देशव्यापी पद-यात्रा निकालने, कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने, ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नियम लागू करने, मंडल कांग्रेस समितियों का गठन करने और संगठन में रिक्त पदों को समय पर भरने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा पार्टी में युवाओं को 50 फ़ीसदी आरक्षण देना भी तय किया गया। लेकिन पिछले 70 साल से भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी कांग्रेस के नेता इस शिविर से कोई सबक लेंगे ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। कर्नाटक में विधनासभा चुनाव अगले साल है लेकिन वहां अभी से जिस तरह मुख्यमंत्री उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस नेताओं में होड़ मची है और जुबानी जंग शुरू हो गई है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि चिंतन शिविर से उन्होंने कोई सबक नहीं लिया है।

सीएम पद को लेकर अभी से तकरार

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव तो अभी दूर है लेकिन कांग्रेस में इस बात को लेकर कलह शुरू हो गई है कि पार्टी में किसकी चलेगी सिद्धारमैया या डीके शिवकुमार की। मुख्यमंत्री उम्मीदवारी को लेकर पार्टी में दो फाड़ हो गई है और दोनों नेताओं के समर्थकों में जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद को लेकर प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार और विधायक दल के नेता सिद्धरमैया के समर्थकों के बीच खींचतान इस कदर बढ़ गई है कि दोनों गुटों के समर्थक नेता कांग्रेस के सत्ता में आने पर अपने-अपने नेता को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश कर रहे हैं, जिससे घमासान तेज होता जा रहा है।

तकरार यहां से बढ़ा

पिछले दिनों डीके शिवकुमार ने खुलेआम अपने सीएम बनने की इच्छा जाहिर की। शिवकुमार ने एक कम्युनिटी फंक्शन में कहा, ‘एसएम कृष्णा के बाद, वोक्कालिगा के लिए अपनी बिरादरी से मुख्यमंत्री चुनने का मौका है। यह आप पर निर्भर करता है कि आप (वोक्कालिगा) इस मौके को कैसे इस्तेमाल करते हैं?’ इस पर सिद्धारमैया के करीबी कांग्रेस पार्टी के विधायक बी जेड जमीर अहमद खान ने कहा कि राज्य के लोग अगले मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धरमैया को चाहते हैं। जमीर ने कहा, “आप सिर्फ एक समुदाय के समर्थन से मुख्यमंत्री नहीं बन सकते।” उन्होंने कहा, “मैं भी मुख्यमंत्री बनना चाहता हूं और वोक्कालिगा से ज्यादा मुसलमान हैं। क्या मैं सिर्फ मुस्लिम वोटों से मुख्यमंत्री बन सकता हूं? नहीं। हमें सभी समुदायों की जरूरत है।”

बंद करें व्यक्ति पूजा: शिवकुमार

तब शिवकुमार ने सभी से अपना मुंह बंद रखने और पार्टी को सत्ता में लाने के लिए काम करने का आह्वान किया। खान के बयान पर शिवकुमार ने मीडिया से कहा, ”मैं केवल उनकी बातों पर बोलूंगा जो मेरे स्तर के हैं। सभी को अपना मुंह बंद कर पार्टी को सत्ता में लाने के लिए काम करना चाहिए।” शिवकुमार से जब पूछा गया कि क्या वे खान के लिए निर्देश जारी कर रहे हैं तो उन्होंने कहा ‘मैं यह सभी से कह रहा हूं। पहले आप पार्टी को सत्ता में लाइए। सभी समुदायों के लोगों को पार्टी से जोडि़ए और पहले अपने समुदाय को संगठित कीजिए। नेता के तौर पर यदि पार्टी को लेकर आप चिंतित हैं तो सबसे पहले व्यक्तियों की पूजा करना बंद कीजिए और लोगों को पार्टी से जोड़िए। उन्होंने कहा कि यदि राज्य के सभी 224 विधायकों के मन में मुख्यमंत्री बनने की इच्छा है तो उसमें गलत कुछ नहीं है।

व्यक्ति और पार्टी, दोनों की पूजा जरूरी: जमीर

शिवकुमार के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जमीर ने बेलगावी में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत शिवकुमार ने खुद की है। शिवकुमार ने ही एक सार्वजनिक मंच पर अपने लिए समर्थन की मांग कर पार्टी में चर्चा शुरू की। उन्होंने कहा, ‘बहस किसने शुरू की? वोक्कालिगा समुदाय के एक कार्यक्रम में उन्होंने खुद अपने समुदाय के लोगों से एक मौका देने का आह्वान किया। उनके बयान के बाद हम बात करने लगे। तब तक किसी ने भी यह मुद्दा नहीं उठाया था। खान ने कहा कि मुस्लिम नेता सिद्धरामय्या को पसंद करते हैं और उन्हें फिर मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। लेकिन, कांग्रेस आलाकमान आधारित पार्टी है। यहां कोई दूसरा निर्णय नहीं कर सकता है। सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी को छोड़कर कोई और निर्णय नहीं ले सकता है। उन्होंने अपनी निजी राय दी है। अपनी निजी राय बताने में कुछ गलत नहीं है। चामराजपेट के विधायक ने कहा कि हर किसी की मुख्यमंत्री बनने की इच्छा होती है, लेकिन केवल वही व्यक्ति राज्य का नेतृत्व कर सकता है जो सभी समुदायों को साथ लेकर चल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के साथ-साथ व्यक्ति पूजा दोनों की जरूरत है।

आलाकमान तय करेगा सीएम: खरगे

उधर पार्टी के दिग्गज नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आंतरिक कलह पर एक सवाल के जवाब में कहा कि अगले मुख्यमंत्री के मुद्दे पर फैसला पार्टी आलाकमान करेगी। प्रदेश इकाई में कलह पर कहा कि यह कोई मैं और आप नहीं हैं, जो तय करें कि कौन अगला मुख्यमंत्री होना चाहिए। यह पार्टी आलाकमान का विशेषाधिकार है। पहले यह सुनिश्चित करने के लिए पार्टी को मजबूत करना होगा कि वह फिर सत्ता में आए। खरगे ने कहा कि भावी मुख्यमंत्री की उम्मीदवारी को लेकर सार्वजनिक मंचों पर चर्चा अनुचित है। विधायकों की राय के आधार पर पार्टी आलाकमान मुख्यमंत्री के बारे में निर्णय लेगा। पहले पर्याप्त सीटों के साथ पार्टी को सत्ता में आना चाहिए, उसके बाद मुख्यमंत्री पद का सवाल आएगा। राज्य की राजनीति में वापस लौटने से जुड़े सवाल पर खरगे ने कहा कि यदि मौका मिला तो वे इसके बारे में विचार करेंगे।

एमबी पाटिल ने भी शिवकुमार के खिलाफ मोर्चा खोला

साल 2023 के चुनाव के लिए कांग्रेस अभियान समिति के अध्यक्ष एमबी पाटिल ने भी शिवकुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऐसा लग रहा है कि उनको अध्यक्ष शिवकुमार पर अंकुश लगाने के लिए ही बनाया गया है। इसके अलावा वह शिवकुमार के धुर विरोधी सिद्धारमैया के करीबी भी हैं। उन्होंने कहा कि कोई किसी का पंसदीदा नहीं है और कोई भी मुख्यमंत्री बन सकता है। वो चाहे दलित हो, पिछड़ा हो या फिर लिंगायत नेता हो। कांग्रेस अगर सत्ता में आती है तो सभी नेताओं से विचार विमर्श किया जाएगा।

हाईकमान का निर्णय अंतिम होगा

एमबी पाटिल ने कहा कि हम कोई दोयम दर्जे को नागरिक नहीं हैं। हमें अपनी ताकत के दम पर सत्ता में आना है फिर उसके बाद निर्वाचित विधायकों की राय के आधार पर हाईकमान निर्णय लेगा और वही अंतिम होगा। हम सभी की इच्छा है कि मुख्यमंत्री बनें लेकिन सभी की इच्छाएं पूरी नहीं हो सकती है। पाटिल इससे पहले भी एक बार मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने एक बार पहले भी कहा था कि सिद्धारमैया के बाद वो मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। मुझे आशा है लेकिन मैं लालची नहीं हूं।

कौन हैं डीके शिवकुमार

सिद्धारमैया के बाद कर्नाटक कांग्रेस में बड़े चेहरे के रूप में डीके शिवकुमार का नाम आता है। वे दक्षिणी कर्नाटक में पार्टी का चेहरा हैं। कांग्रेस आलाकमान के करीबी माने जाते हैं। कर्नाटक में कांग्रेस के सबसे अमीर नेताओं में उनका नाम आता है। वे करीब 840 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं। डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। कर्नाटक की सियासत में वोक्कालिगा समुदाय को लिंगायत के बाद दूसरी किंगमेकर मानी जाती है। जेडीएस प्रमुख देवगौड़ा इसी समुदाय से आते हैं। कर्नाटक में अब तक 6 मुख्यमंत्री वोक्कालिगा समुदाय के बने हैं। वोक्कालिगा समुदाय को कांग्रेस के खेमे में लाने की जिम्मेदारी डीके शिवकुमार पर है।

राज्‍य की सियासत में लिंगायत और वोक्‍कालिगा समुदाय का दबदबा

राज्‍य की सियासत में लिंगायत और वोक्‍कालिगा समुदाय का दबदबा रहा है। दरअसल वर्ष 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर कन्नड़भाषी क्षेत्रों को मिलाकर कर्नाटक राज्य की स्थापना की गई। इससे पहले इस राज्य के कई हिस्से बॉम्बे प्रेसिडेंसी और हैदराबाद के निजाम के अधीन थे। पूर्ववर्ती मैसूर राज भी वर्तमान कर्नाटक राज्य का हिस्सा था। लेकिन एक भाषा के आधार पर समानता के बावजूद यह राज्य शुरुआत से ही जातीय और सांप्रदायिक रूप से बंटा हुआ है। राज्य में लिंगायत और वोक्कालिगा दो प्रमुख जातियां हैं जिनका राजनीतिक प्रभाव है। राज्य में सबसे बड़ा समुदाय लिंगायत विधानसभा की 224 सीटों में से 90 सीटों पर उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करता है।

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