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मोदी राज में लगातार मजबूती हो रही अर्थव्यवस्था, जनवरी में पीएमआई 8 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में काफी तेजी आयी है। नए ऑर्डर मिलने से उत्पादन में आए उछाल के चलते जनवरी 2020 में पीएमआई 8 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। एक निजी सर्वे में सामने आया है कि मांग में आई उछाल से कारखानों में मजदूरों की मांग बढ़ गई है। जिस रफ्तार से कारखानों में नए मजदूरों की भर्ती की गई, वह पिछले आठ सालों में सबसे अधिक है।

आईएचएस मार्किट का निक्केई मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स (PMI) जनवरी 2020 में बढ़कर 55.3 पर पहुंच गया है। एक महीना पहले दिसंबर 2019 में यह 52.7 था। फरवरी 2012 के बाद PMI की यह सबसे मजबूत ग्रोथ है। सूचकांक का 50 से ऊपर होना उत्पादन में विस्तार का सूचक है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र का पीएमआई लगातार 30वें महीने 50 अंक से ऊपर रहा।

डिमांड ट्रैक करने वाले एक सब-इंडेक्स की ग्रोथ दिसंबर 2014 के बाद सबसे ज्यादा रही। वहीं आउटपुट की ग्रोथ पिछले साढ़े सात साल में सबसे ज्यादा रही। इसकी वजह से मैन्युफैक्चर कंपनियों को अगस्त 2012 के बाद सबसे ज्यादा हायरिंग करनी पड़ी।

रॉयटर्स ने पिछले महीने एनालिस्ट पर एक पोल किया था। इस पोल के मुताबिक अगर यह स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था में काफी तेजी देखने को मिलेगी। जीएसटी कलेक्शन, कोर सेक्टर इंडस्ट्रीज, ऑटो सेल और नॉन-ऑयल मर्केंडाइज एक्सपोर्ट्स के बेहतर आंकड़ों से जनवरी में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार देखने को मिला।

आईएचएस मार्किट की प्रधान अर्थशास्त्री पोलियाना डी लीमा ने कहा, “पीएमआई के नतीजे बताते हैं कि नए ऑर्डर मिलने से उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा मिलता है, क्योंकि फर्मों ने अपने स्टॉक को फिर से बढ़ाने और कारोबार में वृद्धि को देखते हुए अपनी क्षमताओं के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया है।” आईएचएस मार्किट के मुताबिक दिसंबर 2014 के बाद से मांग अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा है, जबकि अगस्त 2012 के बाद से उत्पदान  में तेजी आई है।

एक नजर डालते हैं उन संकेतों पर, जिनसे साफ जाहिर होता कि मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही है।

एफपीआई ने 2019 में किए 1.3 लाख करोड़ रुपए निवेश

मोदी सरकार की नीतियों की वजह से प्रभावित होकर अनुकूल आर्थिक परिस्थितियों और पर्याप्त तरलता के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने 2019 में भारतीय पूंजी बाजार में 1.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरीज लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने 2019 में घरेलू पूंजी बाजार में अब तक 1,33,074 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया। एफपीआई ने इक्विटी में 2019 में 97,251 करोड़ रुपए का निवेश किया, जबकि 26,828 करोड़ रुपए के ऋणपत्रों की शुद्ध खरीदारी की। एफपीआई ने हाइब्रिड प्रतिभूतियों में 999 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की।

नवंबर 2019 में हुआ 22,872 करोड़ का एफपीआई निवेश

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने नवंबर महीने में घरेलू पूंजी बाजार में 22,872 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने एक नवंबर से 29 नवंबर के दौरान ऋणपत्रों से 2,358.2 करोड़ रुपये निकाले, जबकि इक्विटी में उन्होंने 25,230 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस तरह वे 22,871.8 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे। इससे पहले एफपीआई ने घरेलू पूंजी बाजार में अक्टूबर में 16,037.6 करोड़ रुपये और सितंबर में 6,557.8 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था।

अक्टूबर 2019 में 3.31 अरब डॉलर रहा पीई-वीसी निवेश

पीई-वीसी निवेश यानी प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश में स्थिरता बनी हुई है। मूल्य और मात्रा के हिसाब से अक्टूबर में उद्यम-पूंजी निवेश 91 सौदों में 3.31 अरब डॉलर रहा। सौदों पर परामर्श देने वाली कंपनी ईवाई के अनुसार सितंबर में 98 सौदों में निजी इक्विटी और उद्यम पूंजी कोषों का निवेश 3.74 अरब डॉलर रहा था। अक्टूबर, 2018 में यह आंकड़ा 64 सौदों में 3.33 अरब डॉलर का रहा था। ईवाई के मुताबिक मोदी सरकार की नीतियों की वजह से ही पीई-वीसी गतिविधियों ने लगातार तीन अरब डॉलर के मासिक ‘रन रेट’ को कायम रखा है। यह चालू चाल के पहले दस महीनो में 16.5 अरब डॉलर बढ़कर 43.7 अरब डॉलर पर पहुंच गई हैं।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन वृद्धि भारत में होगी

जहां कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, वहीं कर्मचारियों की सैलरी भी निरंतर बढ़ रही है। प्रमुख वैश्विक एडवाइजरी, ब्रोकिंग और सोल्यूशंस कंपनी विलिस टॉवर्स वॉटसन की ताजा तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 में कर्मचारियों के वेतन में रिकॉर्ड 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ये वेतन वृद्धि पूरे एशिया-पैसिफिक में सबसे अधिक होगी। विलिस टॉवर्स वॉटसन ने अपनी यह रिपोर्ट विभन्न औद्योगिक क्षेत्रों और कंपनियों की प्रगति का अध्ययन और सर्वे करने के बाद तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में वेतन वृद्धि 8 प्रतिशत, चीन में 6.5 प्रतिशत, फिलीपींस में 6 प्रतिशत और हांगकांग व सिंगापुर में 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। जाहिर है कि मोदी सरकार की सफल आर्थिक नीतियों की वजह से ही वर्ष 2019 में भारत में औसत वेतन वृद्धि 9 प्रतिशत से अधिक रही।

आईएमएफ को भरोसा, वैश्विक अर्थव्यवस्था की अगुवाई करेगा भारत
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने कहा है कि भारत की अगुवाई में दक्षिण एशिया वैश्विक वृद्धि का केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है और 2040 तक वृद्धि में इसका अकेले एक-तिहाई योगदान हो सकता है। आईएमएफ के हालिया शोध दस्तावेज में कहा गया कि बुनियादी ढांचे में सुधार और युवा कार्यबल का सफलतापूर्वक लाभ उठाकर यह 2040 तक वैश्विक वृद्धि में एक तिहाई योगदान दे सकता है। आईएमएफ की एशिया एवं प्रशांत विभाग की उप निदेशक एनी मेरी गुलडे वोल्फ ने कहा कि हम दक्षिण एशिया को वैश्विक वृद्धि केंद्र के रूप में आगे बढ़ता हुए देख रहे हैं।

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