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पीएम मोदी के नेतृत्व में विश्व गुरु बनता भारत, सुझावों और घोषणाओं को बेहद गंभीरता से लेता है वैश्विक समुदाय

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किताबों में पढ़ाया जाता है कि अतीत में भारत विश्व गुरु था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासनकाल में इतिहास को फिर से दोहराया जा रहा है। आज भारत विश्व गुरु बनकर दुनिया का मार्गदर्शन करता नजर आ रहा है। हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज को गंभीरता से सुना जाता है और उसके दिए सुझावों पर अमल किया जाता है। वैश्विक घोषणापत्रों में भारत के विकास के मंत्र को जगह मिलती है।अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रधानमंत्री मोदी की दमदार उपस्थिति का नतीजा है कि विश्व के दिग्गज नेताओं के साथ उनकी बेहतर केमिस्ट्री देखने को मिलती है। वहीं आयोजक देश भी उन्हें विशेष प्रोटोकाल प्रदान करने लगे है। इसका प्रमाण रोम में जी-20 सम्मेलन और ग्लास्गो में कॉप-26 वर्ल्डलीडर समिट के दौरान देखने को मिला।

भारत जी-20 शिखर सम्मेलन में अन्य विकासशील देशों के साथ जलवायु और ऊर्जा विशिष्ट के लक्ष्यों को पाने के लिए क्या एक्शन लिया जाए इस मुद्दे को समझाने में सफल रहा। सतत जीवनशैली पर प्रधानमंत्री मोदी का मंत्र सतत खपत और जिम्मेदार उत्पादन पैटर्न पर जी-20 का रोम घोषणा पत्र में परिलक्षित होता है। वहीं जी-20 नेता इस बात पर सहमत हुए कि विश्व स्वास्थ्य संगठन कोविड-19 टीके को आपात मंजूरी देने की प्रक्रिया को तेज करने से मजबूत होगा। इसके बाद 3 नवंबर, 2021 को दीपावली से ठीक एक दिन पहले विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने भारत में निर्मित कोरोना वैक्‍सीन कोवैक्सनी को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी दी। जी-20 देशों की बैठक में जहां कारपोरेट टैक्स समेत भारत द्वारा उठाए कई मुद्दों को स्वीकार किया गया और भारत के वन हेल्थ वन वर्ड जैसे सुझावों की सराहना हुई।

ग्लासगो की COP-26 ग्लोबल क्लाइमेट समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु पर पांच मंत्र दिए। जिन्हें उन्होंने पंचामृत कहा। भारतीय परंपरा में अमृत उसे कहते हैं जो जीवन देता है। वहीं, पंचामृत पांच मीठे पदार्थों का मिश्रण होता है, जो पूजा-अर्चना के दौरान देवताओं को अर्पित किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी इससे बेहतर शब्द नहीं चुन सकते थे। हमारी जलवायु के संरक्षण और बचाव के लिए प्रधानमंत्री मोदी के पांचों मंत्र शिखर सम्मेलन के लिए अमृत जैसे ही थे। जलवायु को समृद्ध बनाने के लिए भारत का पंचामृत प्रस्ताव लक्ष्य, कार्ययोजना और उपलब्धियों की एकरूपता को व्यक्त करता है। उन्होंने दुनिया के सामने ऋग्वेद के एक मंत्र के माध्यम से विश्व को जलवायु संकट के समाधान की राह दिखाई। अपने संबोधन में उन्होंने धरती को बचाने के लिए विश्व जगत से साथ चलने, संवाद करने और एकीकृत होने का आह्वान किया।

COP-26 ग्लोबल क्लाइमेट समिट में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण से महज एक दिन पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने समिट के असफल होने की चेतावनी दी थी। निराशा के इस माहौल में प्रधामंत्री मोदी ने समिट को नेतृत्व, दिशा और उम्मीदें दीं। उन्होंने साल 2070 तक नेट-जीरो इमिशंस का कमिटमेंट किया। 2030 के कार्बन कटौती के लक्ष्यों में बढ़ोत्तरी के ऐलान से भारत ने दुनिया में बढ़त हासिल कर ली। प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत जैसा विकासशील देश सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि सबके लिए सोचने को तैयार है। प्रधानमंत्री मोदी का रुख अब दुनिया के लिए एक स्पष्ट खाका तैयार करेगा कि जलवायु के लिए प्रतिबद्ध रहते हुए भी संतुलित विकास कैसे किया जाए।पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए भारत ने जहां स्वयं के लिए पंचामृत के पांच प्रस्ताव तय किए, वहीं विकासशील देशों की मजबूत आवाज बनकर धनी देशों को साहसिक शब्दों में उनकी जिम्मेदारियों का भान भी कराया।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का कद भी काफी बढ़ गया है। इसका प्रमाण भी दोनों सम्मेलनों में देखने को मिला, जब आयोजक देशों की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी को विशेष प्रोटोकाल प्रदान किया गया। खासकर प्रधानमंत्री के साथ गए प्रतिनिधिमंडल के ठहरने, आयोजन स्थल तक काफिले के आवागमन तथा सम्मेलन में बोलने के स्लॉट के आवंटन में प्रधानमंत्री की जरूरत के मुताबिक निर्धारित किया गया। इटली और ब्रिटेन दोनों देशों ने इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के डेलीगेशन के ठहरने का इंतजाम एक ही होटल में किया। रोम में प्रधानमंत्री वेस्टिन एक्सलसिओर होटल और ग्लास्गो में मार हल होटल में रुके। जबकि दूसरे राष्ट्रों के प्रमुख और डेलीगेशन को अलग-अलग कई होटलों में रुकना पड़ा।

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह रही कि प्रधानमंत्री मोदी के सम्मेलन स्थल और अन्य कार्यक्रमों के बीच भी तालमेल बिठाने का कार्य आयोजक देशों ने किया। इसे उनकी जरूरत के हिसाब से समायोजित किया गया। इसी प्रकार दोनों सम्मेलनों में प्रधानमंत्री के बोलने के स्लाट को भी उनकी आवश्यकता और अन्य द्विपक्षीय बैठकों के समय को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया गया।

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