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धारचूला – लिपुलेख लिंक रोड का हुआ उद्घाटन, चीन से सामरिक संतुलन कायम करने में मोदी सरकार को मिली कामयाबी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने पड़ोसी देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करने के साथ ही अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए भी लगातार कदम उठा रहे हैं। इससे चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ सामरिक संतुलन स्थापित करने में काफी सफलता मिली है। धारचूला को लिपुलेख दर्रा से जोड़ कर भारत ने एक और बड़ी सामरिक कामयाबी हासिल की है। इससे न सिर्फ चीन सीमा तक भारतीय सेना की आसान पहुंच संभव हो सका है, बल्कि कैलाश-मानसरोवर का अध्यात्मिक रास्ता भी सुगम हुआ है। ये ऐसा इलाका है जहां भारत, नेपाल और चीन की सीमाएं लगती हैं।

रक्षा मंत्री ने इंजीनियरों और कर्मियों को दी बधाई

शनिवार को भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रिमोट से धारचूला (उत्तराखंड) से लिपुलेख दर्रा (चीन सीमा) तक सड़क मार्ग का उद्घाटन किया। इसके बाद पिथौरागढ़ से गुंजी तक वाहनों का एक काफिला रवाना हुआ। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस महत्वपूर्ण सड़क संपर्क के पूरा होने के साथ, स्थानीय लोगों और तीर्थ यात्रियों के दशकों पुराने सपने और आकांक्षाएं पूरी हुई हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस सड़क के परिचालन के साथ, क्षेत्र में स्थानीय व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस मौके पर रक्षा मंत्री ने सीमा सड़क संगठन के इंजीनियरों और कर्मियों को बधाई दी, जिनके समर्पण ने इस उपलब्धि को संभव बनाया। उन्होंने इस सड़क के निर्माण के दौरान हुए लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने बीआरओ कर्मियों के योगदान की प्रशंसा की जो कोविड-19 के कठिन समय में भी सुदूर स्थानों में रहते हैं, और अपने परिवारों से दूर हैं।

चीन की सीमा तक युद्ध सामग्री पहुंचाना आसान

धारचूला और लिपुलेख दर्रा को जोड़ने से अब सैनिकों के लिए भारतीय चौकियों तक पहुंचना बेहद आसान हो गया है। साथ ही 17000 फुट की ऊंचाई पर स्थित लिपुलेख दर्रा तक भारतीय थल सेना के लिए रसद और युद्ध सामग्री को पहुंचाया जा सकता है। 80 किलोमीटर लम्बी इस सड़क की ऊंचाई 6,000 से 17,060 फीट तक है

कैलाश-मानसरोवर जाने में सिर्फ सात दिन लगेंगे

मानसरोवर लिपुलेख दर्रे से करीब 90 किलोमीटर दूर है। पहले वहां पहुंचने में तीन हफ्ते का समय लगता था। अब कैलाश-मानसरोवर जाने में सिर्फ सात दिन लगेंगे। बूंदी से आगे तक का 51 किलोमीटर लंबा और तवाघाट से लेकर लखनपुर तक का 23 किलोमीटर का हिस्सा बहुत पहले ही निर्मित हो चुका था लेकिन लखनपुर और बूंदी के बीच का हिस्सा बहुत कठिन था और उस चुनौती को पूरा करने में काफी समय लग गया।

चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर लगेगी रोक

लद्दाख के पास अक्साई चीन से सटी सीमा पर अक्सर चीनी सैनिक घुसपैठ करते आए हैं। अगर तुलना की जाए तो लिंक रोड के बनने से लिपुलेख और कालापानी के इलाके में भारत सामरिक तौर पर भारी पड़ सकता है। दो साल पहले चीनी सेना ने पिथौरागढ़ के बाराहोती में घुसपैठ की कोशिश की थी। इस लिंक रोड के बनने के बाद चीनी सेना ऐसी गुस्ताखी नहीं कर पाएगी।

सामरिक तौर पर मजबूत हुआ भारत

भारतीय सेना के लिए चीन पर निगाह रखना जरूरी है। इस लिहाज से कालापानी सामरिक तौर पर बहुत ही अहम है। 1962 की लड़ाई के बाद से ही यहां इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) पेट्रोलिंग करती है। चीन बहुत पहले ही अपनी सीम तक सड़क बना चुका है। हिमालय को काट कर सीमा तक बुनियादी संरचना विकसित करने पर चीन ने काफी पैसा बहाया है।

भारत ने नेपाल के दावे को किया खारिज

आपको बता दें कि लिपुलेख दर्रे को मानसरोवर रूट से जोड़ने पर नेपाल ने ऐतराज जताया है। नेपाल सरकार ने लिपुलेख पर फिर अपना दावा किया है। हालांकि भारत ने नेपाल के इस दावे को खारिज कर दिया है। यह इलाका उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा है। हालांकि नेपाल इसका विरोध करता रहा है। गौरतलब है कि भारत के साथ दोस्ती के बावजूद हाल के दिनों में नेपाल और चीन करीब आए हैं। ऐसी स्थिति में कालापानी पर मजबूत पकड़ भारत के लिए और जरूरी है।

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