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मोदी राज में नौकरियों की बहार: मार्च में हायरिंग मोमेंटम ने 2.9 लाख के स्तर को छुआ

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में रोज रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। मोदी राज में कोरोना संकट काल में भी रिकॉर्ड रोजगार सृजित हुए हैं। कोरोना महामारी का असर रोजगार के मोर्चे पर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है। रोजगार के मोर्चे पर अच्छी खबर यह है कि मार्च में हायरिंग मोमेंटम 2.9 लाख के स्तर पर पहुंच गया है। जबकि फरवरी में यह 2.6 लाख के स्तर पर था। इस साल मार्च में हायरिंग मोमेंटम पिछले साल से 18 प्रतिशत अधिक है। डेटा को ट्रैक करने वाली स्टॉफिंग कंपनी एक्सफेनो के अनुसार मार्च में हायरिंग मोमेंटम की गति में बढ़ोतरी लगातार जारी है क्योंकि एक्टिव जॉब्स की संख्या बढ़ी है। एक्सफेनो के आंकड़ों के अनुसार इंट्री स्तर के पदों के लिए ओपनिंग लगातार जारी है और फरवरी में ओपनिंग में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

कोरोना काल में मनरेगा से मिला रिकॉर्ड 11 करोड़ मजदूरों को काम
हाल ही में आई एक रिपोर्ट के आंकड़े से पता चलता है कि मुश्किल समय में मनरेगा गरीब मजदूरों के लिए संजीवनी बन गई। पिछले एक साल में करोड़ों लोगों ने इस योजना का फायदा उठाया है।लॉकडाउन की घोषणा के बाद जब बड़ी संख्या में मजदूर सड़कों पर आ गए, तो सरकार के सामने इनको जीविका के साधन उपलब्ध कराने की चुनौती थी। ऐसे कठिन समय में महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्पलॉयमेंट गारंटी स्कीम काफी मददगार साबित हुई। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल, 2021 का डेटा बताता है कि 2020-21 में 11.17 करोड़ लोगों को इस योजना के तहत काम मिला। खास बात है कि 2006-07 में शुरुआत के बाद पहली बार एक साल में यह आंकड़ा पार किया है।

केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद मनरेगा के तहत हर साल 6.21 करोड़ लोगों को रोजगार मिला। मौजूद डेटा के मुताबिक 2013-14 और 2019-20 के बीच योजना का फायदा उठाने वाले लोगों की संख्या 6.21 से लेकर 7.88 करोड़ लोगों तक रही है। लेकिन महामारी के कारण बढ़ी बेरोजगारी के चलते 3 करोड़ अतिरिक्त लोग इस ग्रामीण योजना का हिस्सा बने।

डेटा के अनुसार 2020-21 में रिकॉर्ड 7.54 करोड़ ग्रामीण परिवारों ने मनरेगा के तहत काम किया। यह आंकड़ा 2019-21 के 5.48 करोड़ के आंकड़े से 37.59 प्रतिशत ज्यादा है। इससे पहले रिकॉर्ड आंकड़ा 2010-11 में 5.5 करोड़ के साथ दर्ज किया गया था। अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च के अंतिम सप्ताह का मस्टर रोल अपडेट होने के बाद लोगों और परिवारों की संख्या में इजाफा हो सकता है।

इस योजना के तहत अनस्किल्ड काम करने वाले ग्रामीण परिवार वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का वेतन पाने के हकदार हैं। 2006-07 में देश के अति पिछड़े 200 ग्रामीण इलाकों में शुरू हुई इस योजना को 2007-08 में 130 जिलों तक बढ़ा दिया गया था। बाद में 2008-09 के बाद इसे पूरे देश के लिए शुरू किया गया था। 2020-21 में 100 दिनों का काम पूरा करने वाले परिवारों का आंकड़ा भी रिकॉर्ड 68.58 लाख पर पहुंच गया। यह आंकड़ा 2019-20 के 40.60 लाख परिवारों से 68.91 प्रतिशत ज्यादा है।

कोरोना महामारी के मद्देनजर आर्थिक पैकेज में सरकार की तरफ से मनरेगा के लिए अतिरिक्त 40 हजार करोड़ रूपये के फंड का ऐलान किया गया। साथ ही केंद्रीय बजट 2020-21 में 61 हजार 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। मार्च 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज का ऐलान किया, जिसमें ग्रामीण इलाकों में मनरेगा के तहत मजदूरी करने वालों की दिहाड़ी 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये कर दी गई।

गौरतलब है कि इस साल 16 जनवरी से शुरू हुए कोरोना टीकाकरण अभियान से लोगों में कोरोना से बचाव की उम्मीद जगी है। लेकिन इसी बीच कोरोना एक बार फिर सिर उठा रहा है और 6 महीने पहले जितने केस आ रहे थे, उतने ही आने लगे हैं। इसने लोगों को फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में लोगों को शहरों में ज्यादा रोजगार की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। लोग अपने घर और गांव के करीब रोजगार की तलाश कर रहे हैं। इस कठिन समय में मनरेगा गांव के लोगों के लिए बहुत बड़ा सहारा बना है।

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