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भारत में आधी आबादी को लग गई कोरोना वैक्सीन की पहली डोज़, केरल में कोरोना विस्फोट, अमेरिका के फ्लोरिडा में हालात बेकाबू, शवों को रखने के लिए फ्रिजर ट्रकों का इस्तेमाल

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भारत में दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना टीकाकरण अभियान तेजी से चल रहा है। इसके तहत मोदी सरकार और स्वस्थ्यकर्मियों के अथक प्रयास से नए-नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक 26 अगस्त, 2021 तक देश में 61 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज दी जा चुकी है। इसके साथ ही भारत ने वैक्सीनेशन योग्य देश की आधी आबादी को पहला टीका लगाकर अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। वहीं कोरोना वायरस का प्रकोप अभी थमा नहीं है। पूरी दुनिया में अभी कोरोना का डेल्टा वेरिएंट तेजी से पैर पसार रहा है। इसकी वजह से भारत का सबसे शिक्षित राज्य केरल और अमेरिका का फ्लोरिडा कोरोना संक्रमण के सबसे बड़े केंद्र बन गए हैं, क्योंकि कोरोना के सबसे ज्यादा मामले यहीं से आ रहे हैं। इससे दूसरे राज्यों में भी संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। केरल में नए मामलों के बढ़ने से केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ विशेषज्ञों को भी परेशानी में डाल दिया है।

केरल में कोरोना का कहर

  • देश में कोरोना संक्रमित लोगों में से 68 प्रतिशत केरल के हैं, जहां देश की सिर्फ 2.6 प्रतिशत आबादी है।
  • केरल में 90 प्रतिशत केस डेल्टा वैरिएंट के आ रहे है। 35 प्रतिशत मरीज घरों के भीतर ही संक्रमित हो रहे हैं।
  • देश में संक्रमण की दर 2 प्रतिशत और केरल में 20 प्रतिशत हो चुकी है। वर्तमान में दुनिया के किसी देश में इतनी ऊंची दर नहीं है।
  • केरल में स्थिति बेकाबू हो रही है। क्योंकि, वहां होम क्वारेंटाइन की योजना पूरी तरह फेल साबित हुई है।
  • केरल में पिछले दो हफ्ते में टेस्टिंग 1.7 लाख से घटाकर 1 लाख कर दी गई। इससे संक्रमण की दर ऊंची हुई और केस बढ़ने लगे।

फ्लोरिडा में हालात भयावह, मुर्दाघरों में शव रखने की जगह नहीं

  • अस्पतालों में कोरोना मरीजों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। 26 अगस्त, 2021 को 16,550 मरीजों की भर्ती की गई।
  • अस्पतालों में कोरोना मरीजों के बढ़ने से ऑक्सीजन की मांग बढ़ गई है, इससे ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
  • डेल्टा वैरिएंट के कहर के कारण काफी तादाद में लोगों की मौत हो रही है। इस सप्ताह रिकॉर्ड 1,486 लोगों की मौत हो गई।
  • मुर्दाघरों में शवों को रखने की जगह नहीं है। शवों को स्टोर करने के लिए रेफ्रिजेरेटेड मोबाइल मुर्दाघरों या फ्रिजर ट्रकों का उपयोग हो रहा है।
  • शवों को दफनाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कब्रिस्तान में बने मकानों की छत पर शवों के ढेर लग गए हैं।
  • मृतकों का शव ले जाने के लिए कैदियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्हें 2 डॉलर प्रति घंटे का भुगतान किया जा रहा है।

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