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राममंदिर आंदोलन के 500 सालों के संघर्ष को सहेजा जाएगा, युवाओं और भावी पीढ़ी को संघर्ष और बलिदान याद रहे इसके लिए मंदिर आंदोलन के इतिहास पर बनेगी डॉक्यूमेंट्री

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 अगस्त को अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन करने के ऐतिहासिक अवसर पर कहा था कि सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है। आज पूरा भारत, राममय है। पूरा देश रोमांचित है, हर मन दीपमय है। आज पूरा भारत भावुक भी है। करोड़ों लोगों को आज ये विश्वास ही नहीं हो रहा कि वो अपने जीते-जी इस पावन दिन को देख पा रहे हैं। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का संघर्ष पांच सौ साल पुराना है। साधु-संतों के साथ बीजेपी ने इस संघर्ष को साकार करने में महती भूमिका निभाई है। इस संघर्ष की यादों को संजोकर रखने और भावी पीढ़ी को संघर्ष से रू-ब-रू कराने के लिए अब एक डॉक्यूमेंट्री बनाने का निर्णय लिया गया है।

अयोध्या में आज जो राम मंदिर निर्माण हो रहा है यह सदियों के संघर्ष का प्रतिफल
अयोध्या में आज जो मंदिर निर्माण हो रहा है यह सदियों के संघर्ष का प्रतिफल है। इसीलिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 500 सालों तक चले मंदिर आंदोलन की एक-एक कड़ी को सहेजते हुए डॉक्यूमेंट्री फिल्म (वृत्तचित्र) बनाने की योजना तैयार की है। इस फिल्म में मंदिर के लिए कब-कब संघर्ष हुए, क्या-क्या मुसीबतें आई सहित बलिदानियों की गाथा भी दर्शायी जाएगी। ट्रस्टी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कामेश्वर चौपाल का कहना है कि राममंदिर आंदोलन की गाथा को एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म (वृत्तचित्र) के जरिए सहेजा जाएगा। मंदिर आंदोलन के संघर्ष की जानकारी हर किसी को होनी चाहिए। खासकर युवा पीढ़ी को जरूर यह ज्ञात होना चाहिए कि अपनी अस्मिता व सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए कितना बड़ा संघर्ष हुआ है।

राममंदिर के लिए 1528 से शुरू संघर्ष का सुखद परिणाम आया
राममंदिर आंदोलन के 500 सालों के संघर्ष को सहेजा जाएगा। इसके लिए ट्रस्ट ने एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म (वृत्तचित्र) बनाने की योजना तैयार की है। फिल्म में मंदिर निर्माण की जानकारी सहित 500 सालों तक चले संघर्ष की गाथा को दर्शाया जाएगा। यह निर्णय विगत दिनों अयोध्या में हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में लिया गया है। इसके लिए कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि को जिम्मेदारी दी गई है। राममंदिर के लिए 1528 से शुरू हुए संघर्ष का प्रतिफल 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचे के ध्वस्तीकरण के बाद आया। इस संघर्ष की सुखद परिणति 9 नवंबर 2019 को भी हुई, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर-मस्जिद विवाद में राममंदिर के हक में फैसला सुनाया। ट्रस्ट का मानना है कि राममंदिर निर्माण के लिए हुए विराट संघर्ष व लाखों बलिदान के बारे में युवा पीढ़ी को भी जानकारी होनी चाहिए।राम मंदिर परिसर में संग्रहालय के लिए शीघ्र तैयार होगा प्रोजेक्ट
राम जन्मभूमि परिसर में एक संग्रहालय भी बनाया जाएगा। इस संग्रहालय में राम, रामायण व अयोध्या को लेकर अनसुनी जानकारियां होंगी। इसको लेकर एक उपसमिति बनाई गई है। जो परिसर में बनने वाले म्यूजियम को लेकर अपनी राय देगी। समिति राम से जुड़े तथ्य, साहित्य व पुरातत्व महत्व के अवशेषों पर काम करने वाले विद्वानों, इतिहासकार व लोगों को जोड़ेगी। रामकथा के मर्मज्ञ व अयोध्या के इतिहास के जानकारों से राय लेकर म्यूजियम के विस्तार के बारे में मंथन कर प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। दूसरी ओर राममंदिर निर्माण के हर एक चरण की ट्रस्ट द्वारा पहले से ही वीडियोग्राफी कराई जा रही है। डॉक्यूमेंट्री फिल्म में मंदिर निर्माण के प्रत्येक पहलू का जिक्र किया जाएगा। फिल्म के निर्माण की जिम्मेदारी हैदराबाद तेलंगाना के निवासी विराट याज्ञिक को सौंपी गई है। इसकी मॉनीटरिंग ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि करेंगे। डॉक्यूमेंटी पर शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा।

राममंदिर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कही दस बड़ी बातें

  1. राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था, तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था।
  2. राम मंदिर के लिए कई-कई सदियों तक, कई-कई पीढ़ियों ने अखंड, अविरत, एकनिष्ठ प्रयास किए हैं। राम मंदिर उसी तप, त्याग और संकल्प का प्रतीक है।
  3. बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा। सदियों का इंतजार समाप्त हुआ।
  4. राम मंदिर के निर्माण की यह प्रक्रिया राष्ट्र को जोड़ने का उपक्रम है। यह महोत्सव है- विश्वास को विद्यमान से जोड़ने का, नर को नारायण से जोड़ने का, लोक को आस्था से जोड़ने का, वर्तमान को अतीत से जोड़ने का, और स्व को संस्कार से जोड़ने का।
  5. श्रीराम की ही नीति है- “भय बिनु होइ न प्रीति”॥ इसलिए हमारा देश जितना ताकतवर होगा, उतनी ही प्रीति और शांति भी बनी रहेगी।
  6. जिस तरह गिलहरी से लेकर वानर और केवट से लेकर वनवासी बंधुओं को भगवान राम की विजय का माध्यम बनने का सौभाग्य मिला, उसी तरह देशभर के लोगों के सहयोग से राम मंदिर निर्माण का यह पुण्य-कार्य प्रारंभ हुआ है।
  7. अलग अलग रामायणों में, अलग अलग जगहों पर राम भिन्न-भिन्न रूपों में मिलेंगे, लेकिन राम सब जगह हैं, राम सबके हैं। इसीलिए, राम भारत की ‘अनेकता में एकता’ के सूत्र हैं।
  8. मुझे विश्वास है कि श्रीराम के नाम की तरह ही अयोध्या में बनने वाला भव्य राममंदिर भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का द्योतक होगा और अनंतकाल तक पूरी मानवता को प्रेरणा देगा।
  9. राम समय, स्थान और परिस्थितियों के हिसाब से बोलते हैं, सोचते हैं, करते हैं। राम हमें समय के साथ बढ़ना सिखाते हैं, चलना सिखाते हैं।
  10. राम परिवर्तन के पक्षधर हैं, राम आधुनिकता के पक्षधर हैं। उनकी इन्हीं प्रेरणाओं और आदर्शों के साथ भारत आगे बढ़ रहा है।

 

 

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