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बहुरूपिया है दिल्ली का सीएम अरविंद केजरीवाल, मौका देखकर बदलता है रंग

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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के कई रूप हैं। वह कभी कट्टर हिन्दू बन जाते हैं, तो कभी मुस्लिम धर्म के कट्टर हिमायती। उनके इस रूप के दर्शन अक्सर होते रहते हैं। खासकर कर चुनाव के समय तो खुद को बहुरूपिया साबित करने में केजरीवाल कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते। आजकल दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर काफी सरगर्मी है। बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच शाहीन बाग को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। ऐसे में बीजेपी से मिल रही चुनौती को देखते हुए केजरीवाल हिन्दू कार्ड खेलने से भी नहीं चूके। एक न्यूज चैनल से खास बातचीत में केजरीवाल हनुमान भक्त के रूप में नजर आए। उन्होंने कहा कि मैं हनुमानजी का कट्टर भक्त हूं और बीजेपी मुझे हिंदू विरोधी कहती है। इस दौरान दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। 

रामनवमी जुलूस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश

हनुमान भक्त केजरीवाल ने अप्रैल 2018 में दिल्ली में रामनवमी जुलूस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की थी। 5 अप्रैल, 2018 को दिल्ली विधानसभा में रामनवमी जुलूस के नाम पर माहौल खराब करने के विषय पर चर्चा होनी थी, लेकिन विधायक कपिल मिश्रा और बीजेपी विधायकों के मुखर विरोध के कारण चर्चा नहीं हो सकी।

 बीजेपी ने केजरीवाल के एजेंडे का किया विरोध  

केजरीवाल के एजेंडे में “रामनवमी जुलूस के बहाने कथित साम्प्रदायिक उपद्रव भड़काने के प्रयास” पर चर्चा शामिल थी। ओखला से विधायक अमानतुल्लाह खान को इस चर्चा की शुरुआत करनी थी। कपिल मिश्रा ने इस मुद्दे पर विरोध किया था और एजेंडे की कॉपी वेल में फाड़ दी थी। विधानसभा अध्यक्ष ने कपिल मिश्रा को मार्शलों से बाहर निकलवा दिया था। इस एजेंडे के खिलाफ बीजेपी ने भी बॉयकॉट किया था।

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कपिल मिश्रा ने सवाल उठाया था कि दूसरे मजहबों के जुलूस पर सवाल खड़े नहीं किए जाते तो फिर रामनवमी को बदनाम करने की कोशिश क्यों की जा रही है?

न दंगा – न फसाद, फिर क्यों राजनीति कर रहे थे केजरीवाल

केजरीवाल सरकार ने राशन घोटाले से ध्यान भटकाने के लिए बहुत घिनौना प्लान बनाया था। आप सरकार विधानसभा में सांप्रदायिक मुद्दे को तूल देने की योजना पर काम कर रही थी, ताकि मीडिया का ध्यान उनके भ्रष्टाचार और घोटालों से हट जाए। आप पार्टी के विधायक अमानतुल्ला के इस प्रस्ताव में लिखा गया, ‘रामनवमी जुलूस के बहाने कथित साम्प्रदायिक उपद्रव भड़काने के प्रयास’ के संबंध में चर्चा। अमानतुल्ला खान के अलावा विधायक नितिन त्यागी और प्रवीण कुमार का नाम इसमें शामिल थे।

हिंदू आस्था पर कुठाराघात था अमानतुल्ला का प्रस्ताव

अब सवाल ये है कि जब दिल्ली में किसी भी तरह का सांप्रदायिक उपद्रव नहीं हुआ, तो केजरीवाल इस पर राजनीति क्यों कर रहे थे? दरअसल आप विधायक अमानतुल्ला खान द्वारा विधानसभा में ‘रामनवमी के जुलूस’ के ख़िलाफ़ जो प्रस्ताव लाया जा रहा था, वह काफी विवादास्पद था । इसके तहत दिल्ली में मस्जिदों के सामने से रामनवमी और रामलीला के जुलूस निकालने पर पाबंदी का कानून बनाने की तैयारी की जा रही थी। यही नहीं हिन्दू धार्मिक जुलूसों में धनुष बाण, गदा और तलवार लेकर चलने पर प्रतिबंध का भी प्रस्ताव किया जा रहा था। इससे पता चलता है कि केजरीवाल वोट को लेकर किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है।

देश का हिंदू चुपचाप खड़ा देख रहा है : कपिल मिश्रा

विशेष समुदाय की राजनीति करने पर कपिल मिश्रा नो केजरीवाल को घेरते हुए कहा कि ध्रुवीकरण की राजनीति बीजेपी नहीं कर रही बल्कि केजरीवाल कर रहे हैं। केजरीवाल एक खास समुदाय के लोगों को तो मुआवजा भी देते हैं और उनके साथ भी खड़े होते हैं जबकि देश का हिंदू चुपचाप खड़ा देख रहा है। उसको सब समझ में भी आ रहा है कि कौन कर रहा है ध्रुवीकरण की राजनीति।

केजरीवाल ने मुस्लिमों का वोट हासिल करने के लिए तुष्टिकरण का सहारा लिया है, आइए देखते हैं केजरीवाल ने किस तरह दिल्ली सरकार का खजाना मुस्लिमों के लिए खोल दिया… 

प्रदर्शन में मारे गए लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए देने की घोषणा

सीएए और एनआरसी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों के लिए दिल्ली वक्फ बोर्ड ने बड़ी घोषणा की। आम आदमी पार्टी के विधायक और बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्ला ने कहा कि हर एक मृतक के परिवार को वक्फ बोर्ड की ओर से 5-5 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। अमानतुल्ला ने देशभर में हो रहे सीएए और एनआरसी के विरोध-प्रदर्शन में मारे गए 20 लोगों की एक सूची जारी की। जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा में अपनी एक आंख गंवाने वाले छात्र मिन्हाजुद्दीन को अमानतुल्ला खान ने 5 लाख रुपए की सहायता राशि का चेक और वक्फ बोर्ड में पक्की नौकरी का नियुक्ति पत्र सौंपा।

मस्जिदों के इमामों के वेतन में दोगुनी बढ़ोतरी

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले दिल्ली की केजरीवाल सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण में जुटी थी। मुसलमानों को लुभाने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की मस्जिदों के इमाम और मोअज़्ज़िन का वेतन करीब दोगुना करने का एलान किया। दिल्ली के 185 मस्जिदों के इमामों को 18 हज़ार रुपये वेतन दिया, पहले ये वेतन 10 हज़ार रुपये हुआ करता था। वही मुअज़्ज़िन को अब 16 हज़ार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जबकि अब तक मुअज़्ज़िन को 9 हज़ार रुपये मिला करता था।

देश में ऐसा पहली बार हुआ

इतना ही नहीं, दिल्ली सरकार ने दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के तहत ना आने वाली मस्जिदों के इमाम और मुअज़्ज़िन को भी वेतन देने का एलान कर दिया। ऐसा देश में पहली बार हुआ है कि वक्फ़ बोर्ड के दायरे के बाहर की मस्जिदों के इमाम और मुअज़्ज़िन को भी सरकार की जेब से तनख्वाह दी जा रही है।

मौलवियों के लिए खोला खजाना

दिल्ली में अब वक़्फ़ बोर्ड के दायरे के बाहर की मस्जिदों के इमामों को 14 हज़ार और मुअज़्ज़िन को 12 रुपये महीने वेतन मिलेगा। केजरीवाल ने दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए ये ऐलान किया। इसमें सीएम अरविंद केजरीवाल के अलावा उनके मंत्री इमरान हुसैन और दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के अध्य्क्ष अमनातुल्ला खान मौजूद थे।

मुसलमानों को दिखाया मोदी का खौफ

वक़्फ़ बोर्ड के इस कार्यक्रम में दिल्ली की सभी मस्जिदों के इमामों और मुअज़्ज़िन को बुलाया गया था। दरअसल इसके पीछे शुद्ध राजनीति थी। उन्होंने मुस्लिमों को मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने का भी डर दिखाया। उन्होंने एक और चारा भी फेंका। उन्होंने कहा कि “मैं मोदी और अमित शाह को हराने के लिए किसी भी हद तक जा सकता हूं। अगर आपके वोट विभाजित होते हैं, तो देश को भारी नुकसान होगा। केजरीवाल ने कहा कि आप लोकसभा चुनाव में सभी सात सीटों पर जीत हासिल करेगी।केजरीवाल ने कार्यक्रम के दौरान मुसलमानों से आम आदमी पार्टी को वोट देने की भी अपील की। इस दौरान अमानतुल्लाह ने कहा कि अगर केंद्र में मोदी सरकार को रोकने के लिए कांग्रेस को भी समर्थन देना पड़ा तो आम आदमी पार्टी, कांग्रेस को भी समर्थन देगी।

मुस्लिम वोट बैंक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार

केजरीवाल की नजर मुस्लिम वोट बैंक पर है। इस वोट बैंक को पाने के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उनका हमेशा प्रयास रहा है कि मुस्लिम वोट नहीं बंटे और पूरे वोट उसे ही मिले। लोकसभा चुनाव-2019 के दौरान केजरीवाल ने सिविल लाइन स्थित अपने निवास पर ऑल इंडिया शिया सुन्नी फ्रंट के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस मौके पर केजरीवाल ने कहा कि मुस्लिम वोट बैंक नहीं बंटे इसके लिए हम कांग्रेस से गठबंधन करना चाहते थे। गठबंधन के लिए हर संभव प्रयास किए। मगर कांग्रेस ने गठबंधन नहीं किया। 

दिल्ली में करीब 20% वोटर मुस्लिम

गौरतलब है कि दिल्ली में मुसलमानों का वोट पहले कांग्रेस को मिलता था, लेकिन 2014 के बाद कांग्रेस की हालत पतली देख मुसलमानों ने आम आदमी पार्टी को वोट देना शुरू कर दिया। इन्हीं वोटों के कारण आम आदमी पार्टी ने 2015 के विधानसभा चुनाव में 67 सीट हासिल की। दिल्ली में करीब हर पांचवां वोटर मुसलमान है और केजरीवाल इतनी बड़ी आबादी को लुभाने के लिए सारे हथकंडे आजमा रहे हैं।

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