Home समाचार संविदाकर्मियों की बहाली के मामले में कांग्रेसी नेताओं का दोहरा मानदंड, राजस्थान...

संविदाकर्मियों की बहाली के मामले में कांग्रेसी नेताओं का दोहरा मानदंड, राजस्थान में लागू नहीं होता प्रियंका गांधी का यूपी फॉर्मूला

525
SHARE

कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं का नजरिया किसी एक मुद्दे पर राज्य देखकर बदल जाता है। जिन मुद्दों को लेकर वो बीजेपी शासित राज्यों और उनके मुख्यमंत्रियों की आलोचना करते हैं, वहीं मुद्दा जब कांग्रेस शासित राज्यों में सामने आता है, तो चुप्पी साध लेते हैं। अब राजस्थान में संविदा पर कर्मचारियों की बहाली को लेकर मुद्दा गर्माया हुआ है, लेकिन इस मामले में प्रियंका गांधी का यूपी फॉर्मूला लागू नहीं हो सकता, क्योंकि राजस्थान में कांग्रेस का शासन है। वहां पर ना तो संविदाकर्मियों और बेरोजगारों का अपमान नजर आता है और ना ही उनकी आवाज सुनाई देती है।

राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन ने सालों से अपनी सेवाएं दे रहे संविदा UTB नर्सेज कर्मचारियों को सेवा मुक्त करने के विरोध में दो घंटे गेट मिटिंग कर कार्य बहिष्कार किया। साथ ही संविदा UTB नर्सेज कर्मचारियों को फिर से बहाल करने व बकाया वेतन देने की मांग की। राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष गंगा शरण जाटव व नर्सिंग भर्ती 2018 के प्रदेश संयोजक पवन मीणा ने बताया कि लगभग 3 माह पहले 9अप्रैल 2021 को 10 संविदा UTB नर्सेज कर्मचारियों को सेवाओ से कार्यमुक्त कर दिया। यह 10 यूटीबी नर्सेज कर्मचारी लगभग 10 से 12 साल से अल्प वेतन में प्रदेश के मरीजों की सेवा में लगे हुए थे।

संविदा UTB नर्सेज कर्मचारियों ने स्वाइन फ्लू जैसी महामारी और कोविड 19 जैसी विश्व महामारी में बढ़-चढ़कर अपनी सेवाएं दीं। लेकिन गहलोत सरकार और प्रशासन ने इनके साथ सौतेला व्यवहार करते हुए इनकी रोजी-रोटी छीनने का काम कोरोना काल में किया। जहां एक तरफ नर्सेज का कोरोना योद्धा के रूप में सरकार सम्मान कर रही है और यूटीबी पर भर्ती निकालकर नर्सेज को रोजगार देने की वादे कर रही है। नर्सेज समुदाय कांग्रेस सरकार के ऐसे दोहरे चरित्र को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

उधर खबर के अनुसार, राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने निर्णय लिया है कि शिक्षा विभाग में कुल 9862 बेसिक कम्प्यूटर शिक्षकों तथा 591 वरिष्ठ कम्प्यूटर शिक्षकों के पद सृजित किए जाएंगे। बेसिक कम्प्यूटर अनुदेशक की सैलरी सूचना सहायक पद के समकक्ष और और वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक का वेतनमान सहायक प्रोग्रामर के पद के बराबर होगा।कम्प्यूटर वाली संविदा की बहाली में भी यही सैलरी होगी।

राज्य में स्थायी भर्ती के लिए बेरोजगार कम्प्यूटर शिक्षक लम्बे समय से आंदोलन चला रहे हैं और अभी भी सोशल मीडिया के जरिए अभियान निरंतर जारी है। ऐसे में इस फैसले के बाद राज्य के ‘बेरोजगार महासंघ’ ने संविदा पर बहाली का विरोध किया है। महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव ने इसे गलत निर्णय करार देते हुए कहा कि नियमित आधार पर भर्तियां निकाल कर बेरोजगारों को राहत दी जाए।

जब उत्तर प्रदेश में संविदा पर बहाली हो रही थी तो प्रियंका गांधी ने बयान दिया था कि अगर योगी सरकार युवाओं के दर्द पर मरहम लगाने की जगह उनका दर्द बढ़ाने की तैयारी कर रही है। लेकिन प्रियंका गांधी को राजस्थान के UTB नर्सेज कर्मचारियों और बेरोजगार कम्प्यूटर शिक्षक की आवाज सुनाई नहीं दे रही है। उत्तर प्रदेश की तरह इन लोगों के आवाज नहीं उठा सकती है, क्योंकि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है। 

गौरतलब है कि सितंबर 2020 में योगी सरकार समूह ‘ख’ व समूह ‘ग’ की भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही थी। इसके तहत प्रस्ताव लाया गया था कि चयन के बाद शुरुआती 5 वर्ष तक कर्मियों को संविदा के आधार पर नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद परफॉर्मेंस के आधार पर छंटनी होगी और जो बचेंगे, उन्हें स्थायी नियुक्ति दी जाएगी। 

लेकिन, तब प्रियंका गांधी ने इसका विरोध करते हुए कहा था, “संविदा = नौकरियों से सम्मान विदा। 5 साल की संविदा = युवा अपमान कानून। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी इस तरह के कानून पर अपनी तीखी टिप्पणी की है। इस सिस्टम को लाने का उद्देश्य क्या है? सरकार युवाओं के दर्द पर मरहम न लगाकर दर्द बढ़ाने की योजना ला रही है। नहीं चाहिए संविदा।” अफ़सोस कि राजस्थान वाले मुद्दे पर उनका कोई ट्वीट नहीं आया है।

ये गांधी परिवार का दोहरा मापदंड है। प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में ऐसा प्रस्ताव भर आता है तो इसे ‘5 साल युवाओं का अपमान’ बताते हुए ‘बंधुआ मजदूरी’ से संविदा की तुलना करती है, जबकि राजस्थान में पूरा फैसला ही लागू हो जाता है फिर भी चूं तक नहीं करतीं। उन्होंने तब गुजरात में यही सिस्टम होने की बात कहते हुए कहा था कि इससे युवाओं का आत्मसम्मान छिन जाता है। फिर, क्या राजस्थान के युवाओं का उनकी नजर में कोई आत्मसम्मान नहीं?

चुनाव पूर्व कांग्रेस ने वादा किया था कि सरकार बनने पर संविदा कर्मियों को स्थायी करेगी। सरकार बनने के बाद समिति भी बनी। 8 बैठकें हो गई हैं लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात। प्रदेश के 11,000 स्कूलों में कम्प्यूटर लैब हैं, ऐसे में मामला संवेदनशील है। लेकिन ये सब प्रियंका गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को दिखाई नेता है। बेरोजगारी और रोजगार को लेकर ट्विटर पर ट्रेंड चलाने वाले भी इस मामले में चुप्पी साध रखी है, उन्हें राजस्थान के बेरोजगारों और संविदाकर्मियों का दर्द दिखाई नहीं देता। 

 

Leave a Reply