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कांग्रेसी नेताओं के बिगड़े बोल

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शीला दीक्षित के बेटे और और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने सेना प्रमुख के खिलाफ एक बयान देकर कांग्रेस पार्टी के चरित्र का बखान कर दिया है। कांग्रेसी नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि हमारी फौज जितनी सशक्त है और जिस तरह सीमाओं की सुरक्षा करती है और जब भी पाकिस्तान वहां हरकत करता है वो उसका जवाब देती है वो सबको मालूम है। ये दूसरी बात है कि आज के प्रधानमंत्री आज के लोग इस बात को ज्यादा जोर से चिल्लाते हैं। लेकिन हमारी सेना सशक्त है। हमने हमेशा सीमा पर पाकिस्तान को सशक्त जवाब दिया है। आज की बात नहीं ये पिछले 70 साल से चला आ रहा है। पाकिस्तान एक ही चीज कर सकता है कि जाकर इस तरह की हरकतें करे और ऊल जुलूल बयान दे। खराब तब लगता है जब हमारे भी थल सेनाध्यक्ष एक सड़क के गुंडे की तरह बयान देते हैं।

ऐसा पहली बार नहीं है कि कांग्रेसी नेता लोकतंत्र की मर्यादा को तार-तार करने में जुटे हैं। जिस तरीके से भाषा की मर्यादा को तोड़ने में लगे हैं, उससे लगता है कि उन्हें लोकतंत्र पर भी भरोसा नहीं है। कांग्रेसी नेता उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं जिसकी शुरुआत सोनिया गांधी ने की थी। आज हम ऐसे ही कांग्रेसी नेताओं के कारनामे आपको बताते हैं

जब सोनिया ने मोदी को कहा था-‘मौत का सौदागर’
कौन भूल सकता है सोनिया गांधी का वो बयान, जिसने वास्तव में गुजरात की जनता को झकझोर कर रख दिया था। तब सोनिया ने गुजरात के तत्कालीन और बेहद लोकप्रिय मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘मौत का सौदागर’ बताया था। 31 मई, 2007 को नवसारी में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सोनिया ने कहा था- “गुजरात की सरकार चलाने वाले झूठे, बेईमान, मौत के सौदागर हैं।“ बहस छिड़ गयी थी कि मौत का सौदागर कौन?- वो, जिसने भूकंप से त्राहि-त्राहि कर रहे गुजरात को इस भीषण आपदा के बाद फिर से खड़ा कर दिया। दोबारा नेस्तनाबूत हो चुके शहरों को बसाने में जी-जान कर एक दी। या वो जो संसद पर हमला करने वालों को फांसी की सजा से बचाती रही, इशरत जैसी आतंकी को शहीद बनाने की कोशिश में जुटी रही।

सोनिया का ‘ज़हर की खेती’ वाला बयान
ऐसा नहीं है कि इमरान मसूद को नरेन्द्र मोदी की बोटी-बोटी काट देने का बयान देने का सपना आ गया हो। इसी लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस का आलाकमान मोदी के खिलाफ जो विषवमन कर रहा था, उसी को आगे बढ़ा रहा था इमरान मसूद। याद कीजिए सोनिया गांधी का वो बयान, जो 1 फरवरी, 2014 को उन्होंने कर्नाटक के गुलबर्ग में नरेन्द्र मोदी के खिलाफ दिया था। सोनिया ने कहा था, “मेरा पूरा भरोसा है कि आप ऐसे लोगों को मंजूर नहीं करेंगे जो जहर का बीज बोते हैं।“ ‘मौत का सौदागर’ के बाद ‘ज़हर की खेती’ के इस बयान ने इस बार गुजरात ही नहीं देश की जनता की भावना को जगा दिया। नतीजा लोकसभा चुनाव में सामने आया- बीजेपी 278, कांग्रेस-45.

राहुल का ‘खून की दलाली’ वाला बयान
बात 6 अक्टूबर, 2016 की है जब देश सर्जिकल स्ट्राइक पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जय-जयकार कर रहा था। विरोधी भी चुप रहने को मजबूर थे। हां, केजरीवाल जरूर सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांग रहे थे। तभी यूपी चुनाव की तैयारी कर रहे राहुल गांधी किसान यात्रा से लौटने के बाद आत्मघाती हमला कर बैठे। उस सर्जिकल स्ट्राइक पर, जिसमें पहली बार पाकिस्तान में घुसकर हिन्दुस्तान ने आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था, जिसकी दुनिया में सबने सराहना की, पाकिस्तान उफ तक नहीं कर पाया; राहुल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर ‘खून की दलाली’ करने का आरोप लगा डाला।

राहुल ने कहा- ‘हमारे जवानों ने जम्मू-कश्मीर में अपना खून दिया, जिन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक किया, आप उनके खून के पीछे छिपे हुए हो। आप उनकी दलाली कर रहे हो।‘

जाहिर है देश गुस्से में आ गया। हर मोर्चे पर राहुल के बयान की आलोचना होने लगी, पप्पू-पप्पू का शोर मच गया। तभी तो लोगों ने इसे फिदायीन हमला करार दिया, जिसमें निशाने पर रहे मोदी को तो कुछ नहीं हुआ, उल्टे राहुल राजनीतिक रूप से बुरी तरह घायल हो गये।

कांग्रेसी जलील मस्तान ने प्रधानमंत्री को नक्सली, उग्रवादी और डकैत कहा
बिहार सरकार में कांग्रेस पार्टी के मंत्री जलील मस्तान ने अभद्रता की सारी हदें ही पार कर दी। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान अपनी पार्टी के कार्यकर्ता से नरेंद्र मोदी की तस्वीर पर जूते मरवाए और जब इस कांग्रेसी मंत्री का मन नहीं भरा तो उन्होंने प्रधानमंत्री को नक्सली, उग्रवादी और डकैत तक कह डाला। आखिर जलील की जुबां पर ताला लगता भी कैसे जब खुद पार्टी की मुखिया सोनिया गांधी प्रधानमंत्री को मौत का सौदागर कह चुकी है।

कांग्रेसी नेता ने खुलेआम मोदी को दी बोटी-बोटी काटने की धमकी
तब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार थे, जब उन्हें बोटी-बोटी काट देने की धमकी खुलेआम दी गयी। लोकसभा चुनाव के दौरान सहारनपुर में कांग्रेस के उम्मीदवार इमरान मसूद ने 28 मार्च, 2014 को ये बयान देकर यूपी ही नहीं पूरे देश में नफरत की सियासत को हवा देने की कोशिश की। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने तो इस बयान का कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन जनता ने इसका जवाब दिया। नरेन्द्र मोदी को न सिर्फ भारी बहुमत से देश का प्रधानमंत्री बनाया, बल्कि इमरान मसूद की रखवाली कर रही कांग्रेस को धूल चटा दी। खुद इमरान की हार तो जिक्र करने वाली बात भी नहीं। कांग्रेस फिर भी जनता के फैसले से सबक लेने को तैयार नहीं दिखती।

हिटलर, मुसोलिनी, गद्दाफी से तुलना
नोटबंदी को लेकर जहां पूरा देश नरेन्द्र मोदी के साथ खड़ा है। कालाधन और भ्रष्टाचार पर ऐसी चोट कभी नहीं पड़ी थी। पर, विपक्ष को काले कारोबारियों के साथ खड़ा होने में जरा भी शर्म नहीं आई। विपक्ष ने दुनिया के कुख्यात रहे तानाशाह हिटलर, मुसोलिनी, कर्नल गद्दाफी से प्रधानमंत्री की तुलना कर डाली। राज्यसभा में प्रमोद तिवारी ने ये शर्मनाक बयान दिया जिस पर खूब हंगामा मचा। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश की जनता की फिक्र थी, चंद विरोधियों की नहीं। हर सर्वे में लोगों ने पीएम के एक्शन को सही ठहराया और ‘थोड़ी परेशानी बड़ा मकसद’ से जुड़े रहे।

कोरबा में कांग्रेस विधायक ने पीएम को दी गाली
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गाली देने की जो परिपार्टी बड़े नेताओं ने शुरू की है, उसका असर ये है कि छोटे स्तर पर भी मर्यादा टूट रही है। छत्तीसगढ़ के कोरबा में 29 नवम्बर, 2016 को कांग्रेस की रैली में बड़े नेताओं की मौजूदगी में विधायक श्याम लाल कंवर अपना मानसिक संतुलन खो बैठे। उन्होंने प्रधानमंत्री को बुरा-भला कहने के बाद उनके लिए अपशब्दों की लड़ियां ही लगा दीं। कांग्रेस की ये ‘आक्रोश रैली’ नोटबंदी के खिलाफ कर रही थी, लेकिन रैली पीएम मोदी के खिलाफ गाली-गलौच में बदल गयी।

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