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कोरोना महामारी से जंग के बजाय मोदी सरकार से लड़ने में व्यस्त है कांग्रेसी; झूठ, अफवाह, फेक न्यूज बना हथियार

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लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष के बीच जिस समन्वय की बात अक्सर की जाती है, वह सरल नहीं होता, लेकिन इतना कठिन भी नहीं होता जितना आए दिन हम अपने देश की राजनीति में देखते हैं। आज हालात की मांग है कि विपक्ष दल और उनकी राज्य सरकारें राजनीति छोड़कर केंद्र सरकार से बेहतर तालमेल के साथ लोगों की जान बचाने में एक दूसरे का सहयोग करें। लेकिन आज विपक्ष महामरी को अपने लिए राजनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है। कोरोना से लड़ने के बजाय मोदी सरकार के खिलाफ लड़ने में अपनी पूरी ऊर्जा लगा रहा है। इसके लिए झूठ, अफवाह और फेक न्यूज को हथियार बना लिया है।

राजनीतिक मकसद से समन्वय की जगह बाधाएं खड़ी कीं

देश में कोरोना के राज्यवार बढ़ते मामलों और आंकड़ों पर गौर करते है तो ये बात स्पष्ट हो जाती है कि कांग्रेस शासित राज्यों में कोरोना के मामलों में लगाता बढ़ोतरी होती रही। इसका मुख्य वजह केंद्र और राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारों का होना है और इनके बीच समन्वय का अभाव है। लॉकडाउन पर हुए फ़ैसले से लेकर टीकाकरण और मूलभूत सुविधाएं बनाने की बात पर सरकारों के बीच कई बिंदुओं पर सहमति की कमी नज़र आई। कई राज्यों से प्रवासी मजदूरों का पलायन राजनीतिक समन्वय की इसी कमी का नतीजा था जिसमें कई राज्य सरकारें प्रवासी मजदूरों से अपना पल्ला झाड़ते नजर आईं।

कांग्रेस शासित राज्यों में कोरोना संक्रमण को बढ़ने दिया

कोरोना से लड़ने के बजाय कांग्रेस शासित राज्यों ने मामले को बढ़ने दिया। आइए उन आंकड़ों पर एक नजर डालते हैं, जो कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों और उनके बड़े नेताओं के झूठ और राजनीति का नतीजा है। पूरे देश में सक्रिय मालमों की संख्या 27,65,490 और मौतों का आंकड़ा 1,93,055 है, जिनमें यूपीए शासित राज्यों में सक्रिय मामले 16,42,080 (59 प्रतिशत) और मौतों के आंकड़े 1,27,250 (66 प्रतिशत) है। इनमें कांग्रेस शासित राज्यों में कोरोना के सक्रिय मामले 10,46,302 (38 प्रतिशत) और मौतों के आंकड़े 84, 884 (44 प्रतिशत) है। जबकि एनडीए शासित राज्यों में सक्रिय मामलों की संख्या 11,23,410 (41 प्रतिशत) और मौतों की संख्या 65, 805 (34 प्रतिशत) है। हैरानी की बात है कि यूपीए शासित राज्यों में जनसंख्या 44 प्रतिशत और कांग्रेस शासित राज्यों की जनसंख्या 22 प्रतिशत है, जबकि एनडीए शासित राज्यों की जनसंख्या 56 प्रतिशत है।

कोरोना के मामलों की सही तस्वीर छिपाने का आरोप

जब आंकड़ों के जरिए कांग्रेस शासित राज्यों पर हमले होने लगे तो, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आंकड़ों पर ही सवाल उठा दिया और कहा कि सरकार सही आंकड़े नहीं दे रही है। राहुल गांधी ने ट्वीट कर सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि, “रोजगार और विकास की तरह केंद्र सरकार कोरोना का असली डेटा भी जनता तक नहीं पहुंचने दे रही। महामारी ना सही, महामारी का सच तो नियंत्रण में कर ही लिया।” पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने रविवार को अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट को टैग करते हुए ट्वीट कर कहा था कि ऑक्सीजन की कमी से इन्कार कर तथा कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या कम बताकर केंद्र सरकार अपनी झूठी छवि के आवरण को बचाने के सारे प्रयास कर रही है। 

ऑक्सीजन निर्यात को लेकर प्रियंका वाड्रा ने फैलाई फेक न्यूज

कोरोना संकटकाल में भी कांग्रेस नेता फेक न्यूज फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। कोरोना इलाज को लेकर अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि कोरोना महामारी के बीच देश के बाहर ऑक्सीजन निर्यात दोगुनी कर दी गई है। उन्होंने अपने ट्वीट में आॉक्सीजन निर्यात का ऑकड़ा जारी कर कहा कि ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों का जिम्मेदार कौन है? कांग्रेस के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से भी फेक न्यूज शेयर कर सनसनी फैलाने की कोशिश की गई। सच्चाई यह है कि ऑक्सीजन दो तरह के होते हैं औद्योगिक ऑक्सीजन और मेडिकल ऑक्सीजन। देश से सिर्फ औद्योगिक ऑक्सीजन का ही निर्यात किया गया है। 


टीके पर संदेह व्यक्त कर लोगों में भ्रम पैदा किया

कांग्रेस शासित राज्योंं ने टीके को लेकर राजनीति की। भारत में बनने वाले टीकों के प्रति देश के नागरिकों के मन में अपने बयानों से संदेह पैदा करने का काम किया। ऐसा भी हुआ कि विपक्ष के कई नेताओं ने कोरोना रोकने के लिए आविष्कार किए गए इन टीकों को बीजेपी का टीका तक बता डाला। कई नेता अफ़वाहें फैलाते दिखे जिसका जिक्र केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भूतपूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को लिखे गए अपने पत्र में भी किया।

टीकाकरण की दर राष्ट्रीय औसत से भी कम रही

कांग्रेस पार्टी के नेताओं के गैर जिम्मेदाराना बयानों की वजह से कुछ कांग्रेस शासित राज्यों में वरिष्ठ नागरिकों और फ्रंट लाइन वर्कर्स को टीकाकरण की दर राष्ट्रीय औसत से भी कम रही। ऐसा करने वाले राज्यों से जो कोरोना के मामले सामने आए हैं उनकी वजह से देश के कोरोना मामलों में ज्यादा बढ़ोतरी हुई है और ऐसे राज्यों में कोरोना टेस्टिंग के बाद पॉजिटिव होने की दर भी ज्यादा है।

टीके के मूल्य को लेकर विवाद शुरू किया गया 

कांग्रेस द्वारा टीके के निर्धारित मूल्यों को लेकर बहस और अफवाहें उड़ाई जा रही हैं तो कभी टीके बनाने वाली कम्पनियों पर आम भारतीय से अनुपयुक्त प्रॉफिट कमाने का आरोप लगाया जा रहा है। भारत बायोटेक की स्वदेशी ‘कोवैक्सीन’ पर भ्रम फैलाने के बाद राहुल गांधी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के सीईओ अदार पूनावाला के पीछे पड़ गए हैं। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने अपनी वैक्सीन की कीमतों का निर्धारण किया। इस पर राहुल गांधी ने ट्वीट करके अदार पूनावाला को ‘मोदी का दोस्त’ बताया और यह कहा कि केंद्र सरकार कुछ उद्योगपतियों को लाभ कमाने में सहायता कर रही है। 

वैक्सीन निर्माताओं को लाभ प्रदान करने का आरोप

केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन कार्यक्रम को और तेज करने के लिए कोविड-19 वैक्सीन की बिक्री से संबंधित नियमों में कुछ ढील प्रदान की है जिसके बाद राहुल गांधी ने यह आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने यह निर्णय वैक्सीन निर्माताओं को लाभ प्रदान करने के लिए लिया है। जबकि CNBC-TV18 को दिए गए एक इंटरव्यू में अदार पूनावाला ने कहा था कि कंपनी महामारी का कोई लाभ नहीं लेना चाहती है और प्रति डोज में कंपनी 150 रुपए का नुकसान ही सहन कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआई को AstraZeneca को 50 प्रतिशत रॉयल्टी के रूप में देना होता है।

टीकाकरण के तृतीय चरण से अलग हुए कांग्रेस शासित राज्य

कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने टीकाकरण के तृतीय चरण के अभियान में अपने राज्यों की भागीदारी से इंकार कर दिया है। तृतीय चरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें अट्ठारह से लेकर पैंतालीस वर्ष तक के नागरिकों को टीका लगेगा। इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों का कहना है कि वे अपने राज्य में तृतीय चरण इसलिए शुरू नहीं कर सकते क्योंकि टीका निर्माता कंपनियों ने उन्हें टीके का स्टॉक उपलब्ध न होने की जानकारी दी है। इन राज्यों ने केंद्र पर यह आरोप लगाया कि केंद्र ने पहले से ही सारे टीके खरीद लिए हैं जिसके चलते इन राज्यों के लिए टीके बचे ही नहीं हैं। 

टीका कंपनियों पर समय पर टीके नहीं देने का लगाया आरोप

जिन भारतीय टीकों के निर्माताओं द्वारा समय पर टीके न दिए जाने का आरोप कांग्रेस शासित राज्यों के नेता लगा रहे हैं, उन्हीं टीकों के स्तर को लेकर एक कांग्रेस मुख्यमंत्री और उनके मंत्री पहले बहुत हल्ला मचा चुके हैं। टीके की इस कमी की बात राजस्थान की सरकार ने भी किया है। राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री ने भी तृतीय चरण के टीकाकरण की शुरुआत एक मई से करने में अपनी असमर्थता जताई। अब सवाल उठ रहा है कि टीकों की कमी के आरोप केवल कांग्रेस शासित राज्यों से ही क्यों आ रहे हैं?

 

 

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