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One More SCAM : घोटालों की यूपीए सरकार के दौरान एक और रक्षा सौदे में ली गई थी दलाली, रॉबर्ट वाड्रा के ‘करीबी’ ने खोली पोल, बीजेपी ने सोनिया-प्रियंका से मांगा जवाब

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केंद्र में दस साल तक राज करने वाली कांग्रेस की यूपीए सरकार को घोटालों की सरकार कहें तो कोई अतिश्योक्ति न होगी। क्योंकि इन दस सालों के दौरान कई रक्षा घोटाले सामने आए। इनमें अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदा और फ्रांस से स्कॉर्पीन पनडुब्बी सौदा भी शामिल है। अब एक और बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। फ्रांस में एक मुकदमे में यह सामने आया है कि मनमोहन सरकार के दौरान वायुसेना के मिराज लड़ाकू विमानों के अपग्रेडेशन के मामले में भी दलाली ली गई। ये मुकदमा भी किसी छोटे-मोटे व्यक्ति ने नहीं किया है। जिस व्यक्ति ने फ्रांस की अदालत में मुकदमा किया है, उसका कथित तौर पर संबंध गांधी परिवार के दामाद और प्रियंका गांधी के पति से हैं। बीजेपी ने सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी से इस करोड़ों के घोटाले में चुप्पी तोड़ने की मांग की है। 

भंडारी ने कमीशन की बकाया रकम के लिए कोर्ट में केस किया
ब्रिटेन के अखबार ‘डेली टेलीग्राफ’ की इस खबर को द टाइम्स आफ इंडिया ने भी छापा है। अखबार के मुताबिक संजय भंडारी, थेल्स कंपनी से बकाया रकम मांग रहा है। कंपनी का कहना है कि उस पर कोई बकाया नहीं है। भंडारी ने जो कोर्ट केस किया है, उसमें कहा है कि कंपनी पर उसका कमीशन बनता है। कमीशन की ही इसी बात से साबित हो रहा है कि भारत में रक्षा सौदे में दलाली का खेल खेला गया। भंडारी ने अपने मुकदमे में कहा है कि थेल्स ने भारतीय वायुसेना के मिराज विमानों के अपग्रेडेशन यानी उन्हें उन्नत बनाने के लिए ठेका हासिल करने के वास्ते उसे रखा था। उसका कहना है कि सौदा 2.4 बिलियन यूरो का था।75 करोड़ का कमीशन मिला, 92 करोड़ का बकाया
फ्रांस की अदालत में मुकदमा शख्स संजय भंडारी संजय भंडारी पेशे से चाटर्ड अकाऊंटेंट है। इसके अलावा संजय भंडारी के हथियारों के सौदागरी, कमीशनखोरी या दलाली जैसे कई धंधे हैं। अब ब्रिटेन से राजनीतिक शरण की गुहार लगाने के साथ ही संजय भंडारी ने फ्रांस में वहां की रक्षा सौदे करने वाली कंपनी थेल्स पर बकाया 11 मिलियन यूरो यानी करीब 92 करोड़ के कमीशन के बकाए के लिए मुकदमा किया है।भंडारी का दावा सौदा दिलाने के लिए एक बड़े भारतीय अफसर से थेल्स की मुलाकात कराई
अखबार के मुताबिक संजय भंडारी ने कोर्ट में कहा है कि वो इस मामले में साल 2008 से ही जुड़ा हुआ था और थेल्स ने साल 2011 में सौदा हासिल करने के लिए समझौता किया। भंडारी ने कोर्ट में ये दावा भी किया है कि सौदा दिलाने के लिए उसने एक बड़े भारतीय अफसर से थेल्स के लोगों की मुलाकात भी कराई थी। उसने ये भी कहा है कि काम के एवज में थेल्स से उसे 20 मिलियन यूरो यानी करीब 167 करोड़ रुपए मिलने थे, लेकिन कंपनी ने सिर्फ 9 मिलियन यूरो यानी करीब 75 करोड़ रुपए ही उसे दिए। यानी राबर्ट वाड्रा का कथित करीबी यह खुद स्वीकार रहा है कि उसने 75 करोड़ की तो दलाली खाई ही है। दलाली की बाकी रकम के लिए उसने केस किया है।

कौन हैं संजय भंडारी, बहुधंधी है ये भंडारी
संजय भंडारी पेशे से चाटर्ड अकाऊंटेंट बताया जाता है। अब हथियारों के सौदागर, कमीशनखोर या दलाल कहा जा रहा है। संजय भंडारी ने कई धंधे किए हैं। उसने आफसेट इंडिया सोल्यूशंस नाम की एक कंपनी बनाई थी। उन पर मोदी सरकार-1 के समय में केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आरोप लगाया था कि उनकी (भंडारी) कंपनी 2008 में राफेल लड़ाकू विमानों में भी आफसेट पार्टनर बनना चाहती थी, लेकिन देसाल्ट एवियेशन के विरोध के कारण नहीं बन पाई।

वाड्रा के लंदन में बायंस्टन स्वायर बंगले की खरीद दलाली की रकम से होने के आरोप
संजय भंडारी की इस कंपनी के पीछे कोई बड़ा हाथ (राबर्ट वाड्रा) का बताया जाता है और ऐसे आरोप हैं कि राबर्ट वाड्रा के लंदन में 12, बायंस्टन स्वायर बंगले की खरीद फरोख्त दलाली की रकम से हुई थी। यह एक जटिल फाइनैंशियल ट्रांसैक्शन था। इन सबके परिदृश्य में 2005 में हुए रक्षा सौदे (बेसिक जेट ट्रेनर) और 2009 में हुए एक पेट्रोलियम सौदे को बताया जा रहा है। बताते हैं पहले 12, बायंस्टन स्कावयर का बंगला सिंटेक कंपनी ने खरीदा। इसके बाद इसे संजय भंडारी की वोरटेक्स ने खरीद लिया।

मोदी सरकार के डर से 2016 में भाग गया था संजय भंडारी
संजय भंडारी 2016 में ही चुपके से विदेश भाग गए। बताते हैं भंडारी को अपने उच्चस्तरीय संपर्कों से पता चला कि आयकर विभाग उनके यहां छापा मारने वाला है। आयकर छापा पडऩे के पहले ही वह विदेश भाग गया। आयकर विभाग के इसी छापे में संजय भंडारी और राबर्ट वाड्रा कनेक्शन के कुछ संकेत मिले थे। ई-मेल आदान-प्रदान, लंदन के बंगले की जानकारी समेत कुछ अन्य तथ्य जांच एजेंसी को पता चले थे। इसी क्रम में प्रवर्तन निदेशालय ने पहले राबर्ट वाड्रा के करीबी मनोज अरोड़ा और फिर सीपी थंपी, सुमित चड्ढा तक को जांच के घेरे में लेना शुरू किया था। ज्यूरिख के यूबीएस बैंक से आफसेट इडियन सोल्यूशंस के खाते में ढाई लाख और साढ़े सात लाख स्विस फ्रैंक स्थानांतरित हुए थे।यह है राबर्ट वाड्रा की पृष्ठभूमि
राबर्ट वाड्रा अच्छी साइकिल, मोटर साइकिल और उम्दा कारों के शौकीन हैं। सालसा नृत्य में अच्छी पकड़ है और उनकी यही खूबी उन्हें प्रियंका गांधी के करीब लाई थी। वाड्रा के दादा सियालकोट, पाकिस्तान से भारत आए थे और पीतल के कारोबार में वाड्रा परिवार जुड़ा था। आर्टेक्स एक्सपोर्ट कंपनी के जरिए वाड्रा हैंडीक्राफ्ट आइटम, कस्टम ज्वेलरी का कारोबार करते थे। बाद में वाड्रा ने जमीन, रीयल स्टेट के धंधे में भी कदम रखा। कहा जाता है कि स्काईलाइट एफ जेडई के वह प्रमोटर हैं। राबर्ट वाड्रा को लेकर एजेंसी सूत्रों का आरोप हैं उन्होंने संजय भंडारी से संपर्क साधा था।

कांग्रेस और सोनिया गांधी अब अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए : बीजेपी
दूसरी ओर, बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि संजय भंडारी के केस से यह एक बार फिर से साबित हुआ है कि मनमोहन सरकार घोटालों-घपलों की सरकार थी। वायुसेना के मिराज लड़ाकू विमानों के अपग्रेडेशन के मामले में भी 175 करोड़ का घपला हुआ है। दलाल संजय भंडारी से संबंधों पर सोनिया गांधी, उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी और राबर्ट वाड्रा को चुप्पी तोड़नी चाहिए।

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