Home नरेंद्र मोदी विशेष हिंदुस्तान के ‘पंच’ से ‘ड्रैगन’ परेशान !

हिंदुस्तान के ‘पंच’ से ‘ड्रैगन’ परेशान !

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आक्रामक विदेश नीति ने भारत के विरुद्ध चीन की कई चालों को मात दे दी है। पीएम की नीतियों ने कई ऐसे विषयों में भारत के रुख को साफ कर दिया है जिन पर यूपीए सरकार बोलने तक से हिचकती थी और चीन की घुड़कियों के आगे नतमस्तक थी, उन मुद्दों पर भी सरकार ने एक स्पष्ट रुख रखा और आज भारत, चीन के हर चाल का जवाब देने में सक्षम हो चुका है और इसमें सफलता भी मिल रही है।

ओबीओआर पर चीन को भारत का जवाब
चीन द्वारा PoK से वन रोड वन बेल्ट इनीशिएटिव का भारत ने प्रतिकार किया है और उसकी काट भी खोज ली है। दरअसल वन रोड, वन बेल्ट इनीशिएटिव चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना है, जो चीन को साठ से अधिक देशों से जोड़ेगा। इसी के तहत ये परियोजना चीन को मध्य एशिया के देशों से सीधे सड़क द्वारा जुड़ने के लिए भी एक विकल्प देता है।

दरअसल, वन बेल्ट-वन रोड उस चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कोरिडोर यानि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से गुज़रता है, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पड़ता है। भारत इसे अपना हिस्सा मानता है और इस इलाके में आर्थिक गतिविधियों में चीन के शामिल होने पर ऐतराज जताया है। भारत ने इस मसले पर स्पष्ट रुख अख्तियार किया है और कहा है- ”कोई भी देश ऐसे प्रोजेक्ट को स्वीकार नहीं कर सकता जो संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की उसकी चिंताओं को नकारता हो।” मोदी सरकार के इस रुख से चीन परेशान है। दरअसल चीन यह जानता है कि चीन के इस इनीशिएटिव में बिना भारत के शामिल हुए सफल नहीं हो सकती है।

चीन की चाल को चतुष्कोणीय जवाब
चीन के ओबीओआर का जवाब देने के लिए अब भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और  जापान ने मिलकर एक संयुक्त प्लान बनाया है। ये चारों देश मिलकर संयुक्त क्षेत्रीय बुनियादी ढांचा योजना की तैयारी कर रहे हैं। हाल में ही ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैलकम टर्नबुल अमेरिकी दौरे पर गए थे। टर्नबुल ने यूएस राष्ट्रपति ट्रंप से एस प्रोजेक्ट के एजेंडे पर गंभीर रुप से चर्चा की थी। दरअसल चीन अपने महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट वन वेल्ट वन रोड (OBOR) के जरिए पूरी दुनिया में दबदबा बढ़ाना चाहता है। दक्षिण चीन सागर के इलाके में उसका कई पड़ोसी देशों से विवाद है। हिंद महासागर के क्षेत्र में भी वह अपना प्रभाव बढ़ाने की जुगत में लगा है। ऐसे में यह नया ‘मोर्चा’ काफी महत्व रखता है।

चीन के OBOR  का जवाब SASEK से देगा भारत
चीन के वन बेल्ट-वन रोड (OBOR) के जवाब में भारत पड़ोसी देशों के साथ करीबी बढ़ाने पर जोर दे रहा है। बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और भूटान के साथ सड़क संपर्क बढ़ाने के लिए भारत ने सासेक कॉरिडोर (South Asian Sub-Regional Economic Cooperation-SASEC) परियोजना पर फिर से काम शुरू कर दिया है। कार्यक्रम का उद्देश्य बांग्लादेश, भूटान, भारत और नेपाल (बीबीआईएन-देशों) में सड़क संरचना को बेहतर बनाना है। सरकार ने मणिपुर में 1630.29 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-39 के 65 किलोमीटर लंबे इम्फाल-मोरेह सेक्शन को बेहतर और चौड़ा बनाने के लिए काम शुरू कर दिया है। मोरेह मणिपुर और म्यांमार सीमा पर एक कस्बा है। इस परियोजना से इम्फाल और राज्य के पूर्वी क्षेत्र के बीच संपर्क बढ़ेगा।

दरअसल भविष्य की परिवहन आवश्यकताओं के आधार पर एनएच-39 को लिलोंग गांव तथा वनगिंज गांव के बीच 4 लेन तक चौड़ा बनाया जाएगा। वनगिंज गांव से खोंगखांग तक के हिस्से को पक्के आधार के साथ 2 लेन में बदला जाएगा। इसके साथ ही भारत सरकार ने ‘लुक ईस्ट’ नीति को पूरा करने तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ व्यापार संपर्क प्रोत्साहित करने और बढ़ाने के लिए मणिपुर के मोरेह में एकीकृत सीमा चौकी (आईसीपी) बनाने का फैसला किया है।

ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी पर आगे बढ़ता भारत
आसियान देश (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलयेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम) भारत की विदेश नीति के केन्द्र रहे हैं। 1992 में तत्कालीन पीएम पी वी नरसिम्हा राव ने लुक ईस्ट पॉलिसी लॉन्च किया था। क्षेत्रीय देशों के संगठनों से सहयोग बढ़ाने के लिए पीएम मोदी ने इसे ‘ऐक्ट ईस्ट’ पॉलिसी में बदल दिया।

ASEAN के साथ संबंधों को दिया नया आयाम
26 जनवरी, 2018 को नई दिल्ली के राजपथ पर विश्व ने एक और अनोखा दृश्य तब देखा जब आसियान देशों के 10 राष्ट्राध्यक्ष भारत की जमीन पर एक साथ दिखे। थाइलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और ब्रुनेई आसियान के नेताओं ने भारत को अपनी इस इच्छा से अवगत कराया है कि रणनीतिक तौर पर अहम भारत-प्रशांत क्षेत्र में ज्यादा मुखर भूमिका निभाए। साफ है कि आसियान देशों के नेताओं का पीएम मोदी पर भरोसा व्यक्त किया जाना विश्व राजनीति में भारत के दबदबे को दिखाने के साथ ही चीन को भी बड़ा जवाब माना जा रहा है।

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