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देश में गुजरात बना नजीर, जानिए कैसे?

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एक ऐसा प्रदेश जहां का रेगिस्तान भी अब आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां के खेतों में पानी की कमी नहीं है। यहां के गांवों में भी 24 घंटे बिजली आ रही है और इसकी बिजली से दूसरे राज्य भी रोशन हो रहे हैं। यहां दूध का इतना उत्पादन हो रहा है कि हिंदुस्तान के कई राज्यों में सप्लाई की जा रही है। यहां की कानून व्यवस्था इतनी सुदृढ़ है कि हर आम ओ खास खुद को भयमुक्त और सुरक्षित महसूस करता है। यहां की महिलाएं सशक्त हैं, आम लोग जीवंत हैं और यहां के लोगों का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है।
गुजरात आज राज्य की छह करोड़ जनता की मेहनत और काबिलियत से एक नजीर बन कर उभरा है। सहभागिता के साथ सुशासन और विकास के पैमाने पर कई दूसरे प्रदेश आज गुजरात मॉडल का अनुसरण कर रहे हैं।

हम एक ऐसे विकास के सपने को देखते हैं जो सर्वांगीण हो। विकास वो हो जो सर्व समावेशक हो, विकास वो हो जो सर्व स्पर्शी हो, विकास वो हो जो सर्व सुलभ हो, ऐसा ना हो कि एक कोने में विकास हो रहा हो और बाकी सब जगह पर हम वैसे के वैसे रहें
– नरेंद्र मोदी

प्रदेश आज जिस गति से विकास के नित नये प्रतिमान गढ़ रहा है उसके पीछे राज्य की बेहतरीन कानून व्यवस्था एक बड़ा कारण है।

हर कदम पर कानून का शासन
न्यायपूर्ण सहअस्तित्व की नीति के साथ गुजरात में कानून व्यवस्था परफेक्ट है। गांव से लेकर शहरों तक में सुरक्षा का ऐसा माहौल है जो लोगों को भयमुक्त वातावरण दे रहा है। हर एक नागरिक खुद को संपूर्ण सुरक्षित महसूस कर रहा है।

सीमा सुरक्षित, राज्य सुरक्षित
सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सीमावर्ती गांवों को ‘शक्ति ग्राम’ के रूप में विकसित किया गया है। इससे सीमा पार से हो रही अवैध गतिविधियों पर रोकथाम में सफलता मिली है। इसके साथ ही कच्छ-जामनगर के सीमावर्ती क्षेत्रों तैना सुरक्षा कर्मियों को प्रोत्साहन देकर घुसपैठ और तस्करी पर रोक लगाई गई।

कोस्ट गार्ड स्टेशन से रुकी घुसपैठ
जखौ में कोस्ट गार्ड स्टेशन की स्थापना और पोटा जैसे कानून का समर्थन जैसे काम हुए जिसने राज्य की कानून व्यवस्था को पुख्ता किया। वहीं सेना, नौसेना, वायुसेना के बीच राज्य शासन का तालमेल बिठाकर सीमापार से प्रोत्साहित अपराध पर लगाम लगाई गई है।

गुजकोक से कंट्रोल हुआ संगठित अपराध
कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट यानी ‘गुजकोक’ के आने के बाद संगठित अपराधों को नियंत्रित किया जा सका है। वहीं पोटा जैसे कानून का समर्थन कर राज्य ने अपराधी तत्वों को कड़ा संदेश दिया।

कानून के राज से कम हुआ क्राइम
बीते बारह सालों में तो गुजरात में हत्या, अपहरण, दहेज हत्या और यौन अपराध के मामलों में जबरदस्त कमी आई है। जबकि गुजरात प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स एक्ट के जरिए नॉन बैंकिंग संगठनों में उपभोक्ता सुरक्षा पुख्ता की गई है।

सशक्त महिला, सार्थक विकास
वो शक्ति है, सशक्त है, वो भारत की नारी है, न ज्यादा में, न कम में, वो सबमें बराबर की अधिकारी है।
नरेंद्र मोदी
महिला विकास के क्षेत्र में गुजरात आज उस मुकाम पर खड़ा है जहां से प्रेरणा लेकर देश के दूसरे राज्य भी उसका अनुसरण कर रहे हैं। बेटी बचाओ जैसा अभियान तो अब देशव्यापी बन गया है। आज गुजरात में संगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की संख्या देश में सबसे ज्यादा 57.47 है, जबकि देश में यह प्रतिशत 53.26 प्रतिशत है। वहीं गुजरात के प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 42.53 प्रतिशत है।

‘चिरंजीवी योजना’ से आया बदलाव
पहली बार महिलाओं के जीवन में बदलाव के लिए अस्पताल में उन्हें मुफ्त चिकित्सकीय सेवा उपलब्ध कराई गई। 2005 में लागू इस योजना से माता और शिशुओं की संख्या में बड़ा सुधार आया। 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रति हजार महिला शिशु मृत्यु दर 37 थी जो देश में 42 थी।

‘नारी गौरव नीति’ से बढ़ा महिलाओं का मान
नारी शक्ति को विकास की प्रक्रिया में भागीदार बनाने के लिए 2006 में नारी गौरव नीति लागू की गई। इसमें गर्भ धारण करने वाली महिलाओं की तुरंत देखभाल की व्यवस्था है।

‘मातृ वंदना योजना’ से स्वस्थ हुए बच्चे
जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए चलाई गई योजना के लिए गुजरात सरकार ने कई पुरस्कार भी प्राप्त किए। इस के तहत नवजात शिशुओं के स्वास्थ को लेकर जागरूकता पैदा करना है।

सफल रहा ‘बेटी बचाओ अभियान’
कन्या भ्रूण की हत्या करने के बजाय बेटी के जन्म को परिवार का गर्व मानो।– नरेंद्र मोदी
लिंगानुपात में भारी अंतर को कम करने के लिए गुजरात सरकार ने इस अभियान को चलाया। इसके परिणाम स्वरूप 2001 में जहां गुजरात का लिंगानुपात 1000 बालकों पर 883 था वहीं 2011 में ये बढ़कर 918 हो गया।

बढ़ गई बालिका शिक्षा दर
कन्या केवनी रथयात्रा, विद्यालक्ष्मी बॉंड, कन्या केलवनी निधि जैसी योजनाओं के कारण बालिका शिक्षा दर में 11.88 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

बेटियों के लिए बनी योजनाएं
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, महिला स्वाबलंबन, महिला सुरक्षा, महिला नेतृत्व, महिला आरोग्य, महिला कृषि, महिला शिक्षण, महिला स्वच्छता जागृति, महिला कल्याण, महिला बाल पोषण जागृति, महिला कर्मयोगी, महिला और कानून, महिला श्रमयोगी, महिला शारीरिक सौष्ठव जैसी योजनाएं गुजरात की महिला विकास के हर पहलू को सार्थक कर रही है। अब तो गुजरात में महिलाओं के समेकित विकास के लिए बजट में अलग से रिपोर्ट बनाई जा रही है।

खेती-किसानी में बेजोड़ बना गुजरात
”कृषि क्षेत्र में गुजरात का विकास आंखे खोलने वाला है।”
खेती में गुजरात के विकास की रफ्तार को देखते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की ये टिप्पणी खास है। खेतों को चार घंटे निर्बाध पानी दिए जाने का सिलसिला 2003 से ही शुरू हो गया था। आज हर खेत, हर घर में पानी सहज उपलब्ध है।

कच्छ और सौराष्ट्र की बदली सूरत
कच्छ जिले के रेगिस्तान को ड्रिप एवं स्प्रिंक्लर सिंचाई से हरा भरा कर दिया गया। बूंद-बंद को तरसता कच्छ की सात लाख हेक्टेयर भूमि ड्रिप तकनीक से सिंचित है।

सॉइल हेल्थ कार्ड से स्वस्थ हुई मिट्टी
गुजरात में ही सॉइल हेल्थ कार्ड का पहला प्रयोग हुआ जो आज पूरे देश में लागू हो गया है। इससे किसान अपनी उसी भूमि से साल में एक या दो की जगह तीन या चार उपज ले रहे हैं।

विकास दर की बढ़ी रफ्तार
नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल के 12 सालों में राज्य में खेती का ग्रोथ रेट केंद्र से दोगुनी और तीन गुनी रही है। औसतन 2002-06 तक औसतन 6 फीसदी विकास दर, वहीं 2007-09 तक औसतन 8 प्रतिशत वहीं 2009-12 में औसतन 10 प्रतिशत से ज्यादा रहा है।

बागवानी खेती को मिला बढ़ावा
नेट हाउस, ग्रीन हाउस, पॉली हाउस जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों और विधियों ने बागवानी फसलों की खेती ने किसानों की समृद्धि की राह खोल दी। इस समय देश में सबसे ज्‍यादा पॉली हाऊस गुजरात में हैं।

पशुओं की बीमारियों के मुक्त हुआ प्रदेश
पशुओं की स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल का राज्‍यव्‍यापी नेटवर्क स्‍थापित किया गया। इससे पशुओं में होने वाली 122 तरह की बीमारियों से गुजरात मुक्‍त हो गया है। देश में गुजरात पहला ऐसा राज्य है जहां पशुओं की आंखों में होने वाली मोतियाबिंद की जांच और उनका ऑपरेशन होता है।

श्वेत क्रांति से फैला विकास का उजियारा
गुजरात में ‘श्वेत क्रांति’ ने 2003 के बाद राज्य में दूध उत्पादन 68 प्रतिशत बढ़ा है। आज गुजरात की डेयरियां दिल्ली के लिए 20 लाख लीटर, मुंबई के लिए 8 लाख लीटर और कोलकाता के लिए 5 लाख लीटर दूध रोजाना भेजती हैं। इसके अलावा देश की सेनाओं के लिए मिल्क पाउडर भी भेजा जाता है।

सहभागिता से बढ़ा डेयरी उद्योग
2003 से 2013 के बीच डेयरी उद्योग का व्यापार 2,400 करोड़ रुपये से बढ़कर 12,250 करोड़ रुपये हो गया। इससी दौरान प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों की तादाद 10,000 से बढ़कर 16,000 हो गई है। वहीं, महिलाओं द्वारा गठित व संचालित दुग्ध समितियां 800 से 2,250 हो गईं।

गांवों की समृद्धि से बढ़ा गुजरात
संवेदनशील नेतृत्व, एकीकृत दृष्टि और समेकित विकास के नजरिये से गुजरात गांवों में भी जबरदस्त विकास हुआ है। ढांचागत सुविधाएं बढ़ने के साथ लोगों की आत्मनिर्भरता बढ़ी और सुख शांति की स्थापना हुई।

‘वेस्ट से बेस्ट’ के नारे से बदले गांव
‘विश्व ग्राम’ बनाने की कल्पना के साथ ग्राम सभा की प्रक्रिया को चेतना शील बनाया गया। इसके साथ ही नया नारा भी गढ़ा गया ‘वेस्ट से बेस्ट’ का। इसके तहत गोबर को ऊर्जा के स्त्रोत बदलने का दृष्टिकोण दिया गया। फिर प्राकृतिक खाद, गोबर गैस और बिजली के उत्पादन की प्रक्रिया बनाकर ऊर्जा ग्राम बनाया।

सड़कों से बदली गांवों की सूरत
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण सड़कों का शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने में गुजरात देश का पहला राज्य बना। इससे किसानों के खेतों तक पहुंचना आसान हो गया। किसानो का मंडी तक आना सुलभ हो गया और इसी दौरान पहली बार समर्थन मूल्य पर खरीद की पहल राज्य सरकार ने की और किसानों को सहारा दिया।

सूखे कच्छ में आई हरियाली
2001 तक ड्रिप तकनीक सिर्फ 10,000 हेक्टेयर भूमि पर ही उपलब्ध थी, लेकिन आज सात लाख हेक्टेयर भूमि इससे सिंचित हैं। सदियों से पेयजल संकट से जूझ रहे सौराष्ट्र और कच्छ के कई गांवों को नर्मदा नहर के जरिए पेयजल उपलब्ध कराया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश में आज देश की बागडोर है और वे भारत को विकास की गति देने में लगे हैं। लेकिन 12 वर्षों तक गुजरात का मुख्यमंत्री रहते उन्होंने हुए राज्य के विकास का ऐसा खांका खींचा कि उनके कई कार्य एक लीक बन गई है। गुजरात आज भी उनके बनाए और बताए रास्ते पर चल रहा है और बेहतरीन सुशासन की नजीर पेश कर रहा है।

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