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मोदी राज में अर्थव्यवस्था: डब्ल्यूटीओ ने की पिछले 5 वर्षों में विकास और प्रति व्यक्ति आय में सुधार के लिए भारत की प्रशंसा

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विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले पांच वर्षों में भारत की 7.4 प्रतिशत इकोनॉमिक ग्रोथ, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति को उदार बनाने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की है। विश्व व्यापार संगठन ने कहा है कि भारत ने व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए 2015 से 2020 के बीच कई उपायों को लागू किया है। इसमें गैरजरूरी दस्तावेजों की संख्या में कमी और आयात-निर्यात के लिए सीमा शुल्क निकासी को सरल बनाना शामिल है। डब्ल्यूटीओ ने कहा कि भारत की ओर से 2015 से शुरू की गई व्यापार सुविधा पहलों में भारतीय सीमा शुल्क इलेक्ट्रॉनिक गेटवे (आइसगेट), व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एकल खिड़की इंटरफेस (स्विफ्ट), बंदरगाह पर सीधे डिलीवरी और सीधे एंट्री की सुविधाएं और जोखिम प्रबंधन प्रणाली (आरएमएस) का अधिक इस्तेमाल शामिल है। विश्व व्यापार संगठन में भारत की सातवीं व्यापार नीति समीक्षा (टीपीआर) की रिपोर्ट में इन बातों का जिक्र किया गया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था लंबी अवधि में साबित हो सकती है सबसे अधिक लचीली: संयुक्त राष्ट्र
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि सकारात्मक आर्थिक वृद्धि और बड़े बाजार के कारण भारत निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना रहेगा। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना महामारी के बाद दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशिया के उप-भाग में भारत की अर्थव्यवस्था लंबी अवधि में सबसे अधिक लचीली साबित हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एफडीआई प्रवाह लगातार बढ़ रहा है और यह सकारात्मक है। यह भी कहा गया है कि कोरोना काल में इस दौरान भारत में एफडीआई आवक सबसे अधिक रही। एशिया और प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (यूएनईएससीएपी) की ओर से जारी ‘एशिया और प्रशांत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के रुझान और परिदृश्य 2020/2021′ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान भारत में 51 अरब डॉलर बतौर एफडीआई आए, जो इससे पिछले साल के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है। इस उप-भाग में कुल एफडीआई में उसकी 77 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से अधिकांश प्रवाह सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) और निर्माण क्षेत्र के हिस्से आया।

आइए एक नजर डालते हैं देश की अर्थव्यवस्था एक बार फिर से किस प्रकार पटरी पर लौटने लगी है…

वर्ष 2020 के दौरान उभरते बाजारों के बीच देश को मिला सबसे ज्यादा एफआईआई निवेश
मोदी राज में विदेशी निवेशकों ने भारत पर भरोसा जताया है। भारतीय शेयर बाजारों में 2020 के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) से 23 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश मिला जो कि उभरते बाजारों में सबसे ज्यादा है। साल 2020 में जनवरी से दिसंबर तक एफआईआई ने भारतीय इक्विटी बाजार में कुल 1.6 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया। यह लगातार दूसरा साल है जबकि उभरते बाजारों के बीच भारतीय शेयर बाजारों में सबसे ज्यादा एफआईआई निवेश हुआ। 2019 की तुलना में यह 63 हजार करोड़ रुपए ज्यादा है। उस साल में कुल निवेश 1.01 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया था। जानकारों के अनुसार आने वाले वर्षों में मजबूत आर्थिक सुधार और आय में वृद्धि की उम्मीद ने भारत में एफआईआई को आकर्षित किया है।

दिसंबर, 2020 में एफपीआई ने किया 68,558 करोड़ का रिकॉर्ड निवेश
विदेशी निवेशकों ने कोरोना महामारी के दौरान दिसंबर में भारत में 68,558 करोड़ रुपये निवेश किया। डिपॉजिटरी आंकड़ों के अनुसार,  विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने दिसंबर में शेयरों में रिकार्ड 62,016 करोड़ रुपये, जबकि बांड में 6,542 करोड़ रुपये निवेश किए। नवंबर में एफपीआई का कुल शुद्ध निवेश 62,951 करोड़ रुपये था। भारत कोरोना काल में भी आर्थिक मोर्चे पर कई सुधारों के साथ अन्य उभरते बाजारों की तुलना में निवेश का बड़ा हिस्सा आकर्षित करने में सफल रहा है।

सर्विस सेक्टर ने पकड़ी रफ्तार
सर्विस सेक्टर के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स अक्टूबर में पिछले सात महीने के दौरान पहली बार 54.1 पर रहा है। पीएमआई में 50 से ज्यादा स्कोर कारोबारी गतिविधियों में रफ्तार को दिखाता है, जबकि 50 से कम का स्कोर इसमें गिरावट को दर्शाता है। सर्विस पीएमआई का बढ़ना इकनॉमी को लेकर नई उम्मीद जगाता है। आईएचएस मार्किट की इकॉनोमिक एसोसिएट डायरेक्टर पॉलियाना डि लीमा के मुताबिक इंडेक्स जब 50 से ऊपर रहता है, तो इसका मतलब यह होता है कि संबंधित कारोबारी सेक्टर में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि यह उत्साहजनक है कि भारतीय सेवा क्षेत्र कोविड-19 महामारी के कारण खराब हुई स्थिति से उबर रहा है।

13 साल की ऊंचाई पर मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई
इसके पहले देश का मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अक्टूबर में बढ़कर 58.9 तक पहुंच गया। यह अक्टूबर, 2007 के 56.8 के बाद अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। कोरोना लॉकडाउन में नरमी के बाद अब कंपनियां अपना उत्पादन तेजी से बढ़ाने में लगी हैं। मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई पिछले महीने सितंबर में 56.8 पर रहा था।

जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपये के पार
इस अक्टूबर में वस्‍तु और सेवा कर-जीएसटी कलेक्शन आठ महीने के बाद एक बार फिर 1 लाख करोड़ रुपये के पार हो गया है। इससे पहले एक लाख करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन फरवरी में हुआ था। वित्त मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष अक्‍टूबर में कुल जीएसटी कलेक्शन 1,05,155 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि में प्राप्‍त राजस्‍व से दस प्रतिशत अधिक है। इस दौरान वस्‍तुओं के आयात से प्राप्‍त राजस्‍व में नौ प्रतिशत और सेवाओं के आयात सहित घरेलू कारोबार से प्राप्‍त राजस्‍व में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

अक्टूबर में यात्री वाहनों की बिक्री में भारी तेजी आई है। मारुति सुजुकी ने अक्टूबर में कुल 1,82,448 वाहन बेचे, जो पिछले साल के अक्टूबर के मुकाबले 19 प्रतिशत ज्यादा है। जबकि हुंडई मोटर्स ने अक्टूबर में कुल 68,835 गाड़ियां बेचीं, जबकि अक्टूबर- 2019 में कंपनी ने कुल 63,610 यूनिट्स की बिक्री की थी। दोपहिया वाहनों में हीरो मोटर्स ने 35 प्रतिशत वृद्धि के साथ अक्तूबर में 8 लाख से अधिक, जबकि बजाज ने 11 प्रतिशत वृद्धि के साथ 5 लाख 12 हजार और टीवीएस ने 24 प्रतिशत तेजी के साथ 3 लाख 82 हजार यूनिट्स बेचे हैं।

रिकॉर्ड यूपीआई लेन-देन
यूपीआई ने अक्टूबर में 2 अरब लेन-देन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अक्‍टूबर में देश में कुल 207.16 करोड़ रुपये मूल्‍य के यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए। पिछले साल अक्‍टूबर में यूपीआई के जरिये 114.83 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 3.3 लाख करोड़ रुपये के यूपीआई लेन-देन हो चुके हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया नया रिकॉर्ड
देश का विदेशी मुद्रा भंडार 18 दिसंबर को खत्म हफ्ते में 2.563 अरब डॉलर बढ़कर 581.131 अरब डॉलर हो गया है। यह अबतक का सबसे ऊंचा स्तर है। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस दौरान विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा यानी विदेशी मुद्रा एसेट्स 1.382 अरब डॉलर बढ़कर 537.727 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस सप्ताह में स्वर्ण भंडार में 1.008 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 37.020 अरब डॉलर मूल्य का हो गया। विदेशी मुद्रा भंडार ने 5 जून, 2020 को खत्म हुए हफ्ते में पहली बार 500 अरब डॉलर के स्तर को पार किया था। इसके पहले यह आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

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