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दावोस में मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों और भारतीय अर्थव्यवस्था की गूंज, ईवाई की रिपोर्ट में दावा- 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनेगा भारत, 2047 में होगी 26 ट्रिलियन इकोनॉमी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वर्णिम दौर शुरू हो गया है। मौजूदा बेहतर आर्थिक संकेतों से पता चलता है कि आने वाले समय में इस सुनहरे दौर की चमक और निखरकर ही सामने आएगी। इसकी गूंज स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum) 2023 में सुनाई दी। दावोस में वैश्विक कंसल्टेंसी फर्म ईवाई द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आर्थिक संकट का सामना करने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था साल 2028 में 5 लाख करोड़, 2036 में 10 लाख करोड़ के पड़ाव को पार करते हुए साल 2047 तक 26 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगी। वहीं प्रति व्यक्ति सालाना औसत आय बढ़कर छह गुना हो जाएगी। 

वैश्विक कंसल्टेंसी फर्म ईवाई द्वारा ‘इंडिया एट 100 : रीयलाईजिंग द पोटेंशियल ऑफ 26 ट्रिलियन इकोनॉमी’ नाम से पेश रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2030 तक भारत जर्मनी और जापान को पीछे छोड़ कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बन चुका होगा। 6 प्रतिशत की सालाना औसत वृद्धि दर के आधार पर आंकलन किया गया है कि 2047 में प्रति व्यक्ति सालाना औसत आय 15 हजार डॉलर यानी मौजूदा विनिमय दर के लिहजा से करीब 12.25 लाख रुपये पहुंच जाएगी, यह आज के स्तर से 6 गुना से अधिक होगी। ईवाई के सीईओ कार्मिन डी सिबियो ने दावा किया कि भारत ने भारी क्षमताएं दर्शाई हैं, उसकी प्रगति पूरे विश्व मंच पर असर डालने लगी हैं।

ईवाई की रिपोर्ट में मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों की जमकर तारीफ की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में आर्थिक सुधार तेजी से लागू हो रहे हैं, ऊर्जा के स्रोतों में बदलाव लाए जा रहे हैं और वह डिजिटल रूप में ढल रहा है। 2014-19 में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था 15.6 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी, जो आर्थिक वृद्धि से करीब ढाई गुना है। पिछले 2 दशक में भारत का सेवा संबंधित निर्यात 14 प्रतिशत की दर से बढ़ कर 2021-22 में 25,450 करोड़ डॉलर पहुंच चुका है। इनमें अकेले आईटी और बीपीओ सेवाएं 15,700 करोड़ डॉलर की रहीं। गैर-आईटी क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भारतीय प्रतिभाएं पूरे विश्व की जरूरतें पूरी करेंगी। खासतौर से विकसित अर्थव्यवस्थाओं में क्योंकि वहां कुशल मानव संसाधनों की कमी होने जा रही है। यह सभी बातें लंबे समय तक उसे प्रगति के पथ पर अग्रसर रखेंगी।

फाइनेंशियल टाइम्स के मुख्य अर्थशास्त्री कमेंट्रेटर मार्टिन वुल्फ ने विश्व आर्थिक मंच में दावा किया कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। इसकी ग्रोथ काफी अच्छी रही है। अगले दो दशक में भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनेगा। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव की मौजूदगी में हुए एक विशेष सत्र में कहा कि उन्हें लंबे समय से यह विश्वास रहा है, और जो लोग लंबे समय से भारत के बारे में जानते हैं वे भी यह मानेंगे। अगले 10 से 20 वर्षों में बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनेगा। यह बात पूरी निश्चितता से कही जा सकती है कि वह बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था भी बनेगा। जो इस क्षेत्र से नहीं जुड़ा है या दूसरे क्षेत्रों से ताल्लुक रखता है, वह शायद न समझ पाए कि भारत के मायने क्या हैं। हालांकि आज अधिकतर लोग यह बात जान चुके हैं।

विश्व आर्थिक मंच पर जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने अपने वक्तव्य में बताया कि वे भारत और कुछ अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता(एफटीए) करने के लिए पूरे प्रयास कर रहे हैं। बुधवार शाम एक विशेष संबोधन में चांसलर ने कहा, ‘हमने कनाडा, कोरिया, जापान, न्यूजीलैंड और चिली के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर सफलतापूर्वक बातचीत की है। मैं यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहा हूं कि जल्द ही इसमें नए देश शामिल हों – भारत, इंडोनेशिया और कुछ दक्षिण अमेरिकी देश।’ उल्लेखनीय है कि यूरोपीय संघ में जर्मनी भारत का सबसे बड़ा कारोबारी सहयोगी है और दोनों ने समझौते के लिए पिछले हफ्ते ही बातचीत शुरू की है।  

गौरतलब है कि स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2023 चल रहा है। यह विश्व आर्थिक मंच की 5 दिवसीय 53वीं सालाना बैठक है। इस बार की बैठक में 130 देशों के 2,700 से अधिक नेता शामिल हो रहे हैं। भारत की तरफ से भी कई मंत्री, नेता और कारोबारी शामिल हुए हैं। भारत की तरफ से केंद्रीय मंत्रियों में मनसुख मांडविया, अश्विनी वैष्णव, स्मृति ईरानी और आरके सिंह शामिल हुए हैं। विश्व आर्थिक मंच पब्लिक-प्राइवेट सहयोग के लिए काम करने वाली एक गैर-लाभकारी अंतरराष्ट्रीय संस्था है। इस मंच पर दुनिया भर के तमाम बड़े राजनेता और दिग्गज कारोबारियों समेत संस्कृति और समाज के लिए काम करने वाले लोगों को जगह दी जाती है।

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