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JNU में फिर बौद्धिक आतंकियों और टुकड़े-टुकड़े गैंग ने की नापाक हरकत, ‘भारतीय कब्जे वाला कश्मीर’ को विवादित वेबिनार का टॉपिक बनाकर देश की अखंडता को दी चुनौती

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देश की राजधानी दिल्ली में स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय फिर सुर्खियों में हैं। किसी शैक्षणिक उपलब्धि को लेकर नहीं, बल्कि बौद्धिक आतंकियों और टुकड़े-टुकड़े गैंग की नापाक हरकत को लेकर चर्चा में हैं। शुक्रवार (29 अक्टूबर, 2021) को सेंटर फॉर वूमेन स्टडीज की ओर से कश्मीर को लेकर एक वेबिनार का आयोजन किया गया था। इस वेबिनार का टॉपिक ‘भारतीय कब्जे वाला कश्मीर’ बनाया गया था। जेएनयू के आधिकारिक वेबसाइट पर भी इस इवेंट की जानकारी दी गई थी। शिक्षकों और छात्रों के जबरदस्त विरोध के बाद इस देश विरोधी वेबिनार को रद्द कर दिया गया।

जेएनयू के वीसी एम जगदीश कुमार के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन को जैसे ही इस कार्यक्रम की जानकारी मिली वेबिनार रुकवाने और रद्द करने का निर्देश दिया गया। आयोजकों ने वेबिनार के लिए अनुमति भी नहीं ली थी। सेंटर फॉर वूमेन स्टडीज की ओर से शुक्रवार रात 8:30 बजे वेबिनार का आयोजन किया गया था। वेबिनार में लेखक, कवि और कार्यकर्ता अतहर जिया को मुख्य वक्ता के तौर पर बोलना था। इस आयोजन का विरोध करते हुए दिल्ली के एक वकील ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर विमेन स्टडीज और वेबिनार के आयोजकों के खिलाफ कथित तौर पर ‘जेंडर्ड रेजिस्टेंस एंड फ्रेश चैलेंजेज इन पोस्ट-2019 कश्मीर’ नाम इस्तेमाल करने के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। एबीवीपी ने इसे भारत विरोधी बताकर कार्रवाई की मांग की है। एबीवीपी का कहना है कि शुक्रवार को रात 8:30 बजे “2019 के बाद कश्मीर में लिंग प्रतिरोध और नई चुनौतियां” नामक एक वेबिनार जानबूझकर आयोजित किया गया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वेबिनार वेबपेज ने जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश को ‘भारतीय कब्जे वाले कश्मीर’ के रूप में संबोधित किया। यह इस तथ्य के बावजूद कि भारत सरकार ने बार-बार कश्मीर को भारत गणराज्य का अभिन्न अंग बताया है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कई शिक्षकों ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। शिक्षकों के मुताबिक ऐसा करके जेएनयू को देश विरोधी दर्शाने का प्रयास किया जा रहा था। इस वेबिनार को रद्द करवाने पर शिक्षकों ने संतोष व्यक्त किया है। जेएनयू के हिन्दी विभाग की प्रोप्रोफेसर पूनम कुमारी ने बताया कि कुछ लोग नापाक हरकतों से बाज नहीं आते। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। भला, कोई भारत अधिकृत कश्मीर लिखने या सोचने की कल्पना भी कैसे कर सकता है। ये महिलाओं से संबंधित कार्यक्रम की आड़ में यह सब लिखा गया। इसकी अनुमति कैसे और किसने दी? क्या आयोजक उन महिलाओं की बात करेंगे जिन्हें कश्मीर से बेदखल किया गया था। जिनपर अमानवीय अत्याचार हुए, जो शरणार्थी कैम्प में रह रहीं हैं।

जेएनयू में रूसी भाषा विभाग में प्रोफेसर डॉ. नागेंद्र श्रीनिवास ने कहा कि जेएनयू में भारत विरोधी गतिविधियां आज भी चल रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। वेबिनार की जानकारी जेएनयू वेबसाइट पर भी अपलोड की गई थी। जब शिक्षकों ने विरोध किया तो वेबसाइट से हटा लिया गया। वेबिनार कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग नहीं मानता है और भारत अधिकृत कश्मीर की बात करता है। इस कार्यक्रम के आयोजक भारत की अखंडता और संप्रभुता को सीधी चुनौती दे रहे हैं। यह भारतीय संविधान का अपमान है। शिक्षा मंत्रालय और जेएनयू प्रशासन से अनुरोध है कि घटना का संज्ञान लें और उचित कार्रवाई करें।

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