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चन्नी सरकार के मंत्री राणा का OPEN CHALLENGE, सोनिया गांधी रखे या निकाल दे…कांग्रेसी विधायक चीमा को तड़ीपार करवाकर दम लेंगे, कांग्रेसी दिग्गजों में खिंची तलवारें

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पंजाब में कांग्रेस की सेहत चुनाव से ऐन पहले की खस्ताहाल होने लगी है। सीएम चन्नी और प्रधान सिद्धू की आपसी अदावत पंजाब में कांग्रेस की सियासत पर खासा असर डाल रही है। सियासत के गरमाए माहौल के मध्य कांग्रेसी दिग्गजों के बीच चल रही सियासी रंजिश अब व्यक्तिगत हो गई है। मियान से निकली तलवार की तरह से ज़ुबान से निकले शब्द एक दूसरे को भेद रहे हैं। पंजाब कांग्रेस में नई कलह शुरू हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने चन्नी सरकार में मंत्री राणा गुरजीत सिंह को पार्टी से निकालने की मांग कर डाली है। इसके लिए विधायक नवतेज चीमा, बावा हैनरी, बलविंदर धालीवाल और सुखपाल खैहरा ने सोनिया गांधी को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने कहा कि मंत्री राणा को कपूरथला से टिकट दी जा चुकी है। इसके बावजूद वह अपने बेटे को सुल्तानपुर लोधी से निर्दलीय खड़ा करके कांग्रेस के उम्मीदवार विधायक नवतेज चीमा को हराना चाहते हैं।सोनिया तक पहुंची कांग्रेसी लड़ाई…मंत्री राणा पर अवैध रेत खनन में शामिल होने का आरोप
कांग्रेस विधायकों और नेताओं ने अपनी सरकार के ही मंत्री पर आरोप लगाए कि इससे पहले राणा गुरजीत को 2018 में सरकार से इस्तीफा देना पड़ा था। उन पर अवैध रेत माइनिंग में शामिल होने के आरोप लगे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राणा गुरजीत दोआबा क्षेत्र में सुल्तानपुर लोधी के अलावा फगवाड़ा, भुलत्थ, जालंधर नॉर्थ, बंगा आदि में भी दखल दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राणा की पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ करीबी मित्रता है। इसके अलावा उन्होंने पार्टी के पंजाब प्रधान नवजोत सिद्धू पर आरोप भी लगाए हैं।

 

 

सांसदों के बेटों को टिकट दी जा सकती है तो उनपर परिवारवाद का आरोप क्यों : राणा
दरअसल, राणा गुरजीत सिंह कपूरथला जिला के तहत ही आती सुल्तानपुर लोधी सीट से अपने बेटे राणा इंद्र प्रताप सिंह के लिए टिकट चाहते थे। लेकिन पार्टी ने पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू के खासमखास नवजोत सिंह चीमा को ही इस बार दोबारा फिर से मैदान में उतारा। इससे राणा गुरजीत सिंह भड़क गए। उन्होंने पहले तो अपनी भड़ास यह कहकर निकाली कि यदि सासंदों के बेटों को टिकट दिए जा सकते हैं तो फिर उनके लिए एक परिवार में एक टिकट की शर्त क्यों लगाई जा रही है। इसके बाद राणा इंद्र प्रताप सिंह आजाद प्रत्याशी के तौर पर सुल्तानपुर लोधी से खड़े हो गए।

गुरजीत सिंह पार्टी विरोधी काम कर रहे हैं….उन्हें पार्टी से तत्काल निकाला जाए
इसी दौरान चीमा के साथ जालंधर के विधायक बाबाव हेनरी व अन्य ने एक लिखित शिकायत सोनिया गांधी को भेज दी कि राणा गुरजीत सिंह पार्टी विरोधी काम कर रहे हैं और उन्हें पार्टी से बाहर निकाला जाए। इस चिट्ठी के बाद वह व्यक्तिगत ही हो गए। उन्होंने अब मूंछ का सवाल बना लिया है। अब वह सुल्तानपुर लोधी में ही डेरा जमाकर बैठ गए हैं। उन्होंने अब सीधे ही चैलेंज करना शुरू कर दिया है कि पार्टी अब उन्हें रखे या न रखे लेकिन वह नवतेज चीमा को सबक जरूर सिखाएंगे।

ओपन चैलेंज…बेटे के लिए अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ खुलकर प्रचार
दूसरी ओर राणा गुरजीत सिंह ने अपने बेटे राणा इंद्र प्रताप सिंह के लिए कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ पार्टी लाइन के विपरीत चलते हुए सुल्तानपुर लोधी में प्रचार भी शुरू कर दिया। उन्होंने यहां तक भी कहा कि वह गांव में जमीन भी खरीदने जा रहे हैं। यहां पर वह गौशाला के साथ-साथ घुड़साल भी बनाएंगे। वह गांव में गायें और घोड़े पालेंगे। उन्होंने कहा कि वह लगातार पांच दिन यहीं रहेंगे और बेटे इंद्र के लिए पूरा जोर लगाएंगे। नवतेज चीमा पर तंज कसते हुए कहा कि इससे निम्न स्तर क्या हो सकता है कि वह स्थानीय गौशाला से एक गाय ले गए और गाय की कीमत तक अदा नहीं की। उन्होंने चीमा पर रेत माफिया के साथ-साथ कब्जे करने वाले माफिया से मिले होने का आरोप भी लगाया।

सीएम चन्नी के करीबी विधायक का विरोध, पहले भी सरपंचों ने उठाई आवाज
पंजाब कांग्रेस में विरोध के स्वर कई जगह से उठ रहे हैं । मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बेहद नजदीकी विधायकों में से एक विधायक कुलदीपच सिंह वैद के खिलाफ कांग्रेसियों ने ही मोर्चा खोल दिया है। पहले इलाके के सरपंचों और अब कांग्रेसी गुरसिमरन मंड ने आवाज उठाई है। इस तरह विरोध होना कहीं न कहीं कांग्रेस और चरणजीत सिंह चन्नी के लिए चिंता की बात है। कुलदीप सिंह वैद पूर्व आईएएस अधिकारी हैं और नौकरी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। वे पहली बार चुनाव लड़कर हलका गिल से विधायक बने थे। कांग्रेस की तरफ से जारी पहली 86 उम्मीदवारों की लिस्ट में कुलदीप सिंह वैद को टिकट नहीं दी गई है। इससे पहले विधानसभा क्षेत्र गिल से सरपंच बलवीर सिंह बाडेवाल का कहना है कि उनका उम्मीदवार उनके विधानसभा क्षेत्र से ही होना चाहिए। पिछले विधायक वैद ने उनकी सुनवाई नहीं की है और वह मिलते ही नहीं थे।

नवजोत सिंह सिद्धू के कारण हुआ ज्यादा माहौल खराब
नवतेज सिंह चीमा प्रदेश कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू के खासमखास हैं। जबकि सिद्धू का राणा गुरजीत सिंह के साथ इक्कीस का आंकड़ा है। दोनों एक दूसरे को पसंद नहीं करते और परस्पर धुर विरोधी है। दोनों एक दूसरे को दबाने के लिए मौका ढूंढते हैं। पिछले दिनों नवतेज चीमा ने एक रैली रखी थी। इसमें कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू, सांसद डिंपा विशेष रूप से आए थे। लोगों को संबोधन करते हुए सिद्धू और चीमा ने कई बातें राणा गुरजीत सिंह के खिलाफ बोलीं। नवतेज चीमा ने यहां तक कहा था कि कुछ बाहरी लोग आकर सुल्तानपुर में कब्जा करना चाहते हैं। लेकिन उन्हें सुल्तानपुर लोधी में घुसने नहीं दिया जाएगा। सिद्धू ने भी परोक्ष रूप से तो नहीं लेकिन अपरोक्ष रूप से कई तरह के लांछन राणा पर लगाए थे। इससे राणा की खुन्नस और ज्यादा बढ़ गई। इससे पहले भी जब राणा को मंत्री बनाया जाना था तो नवतेज सिंह चीमा और नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने खेमे के विधायकों को लेकर खूब विरोध किया था। तब खैहरा, चीमा और अन्य. विधायकों से एक चिट्ठी भी सोनिया गांधी को भिजवाई गई थी कि राणा को मंत्री पद की शपथ न दिलाई जाए।

 

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