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GeM पोर्टल से सार्वजनिक खरीद में आई क्रांति, लेन-देन 37,435 करोड़ रुपये के पार

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सरकारी ई-मार्केट पोर्टल GeM के जरिए केंद्र और राज्यों के सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों की ओर से खरीदारी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार GeM पोर्टल के जरिए कुल लेन-देन 37,435 करोड़ रुपये के पार हो गई है। GeM पोर्टल के जरिए 26.79 लाख वस्तुओं की खरीद का ऑर्डर हुआ। 2016 में शुरू हुए पोर्टल पर करीब 40,194 सरकारी संस्थाएं, विभाग और सार्वजनिक उपक्रम बॉयर के रूप में रजिस्टर्ड हैं, जबकि इस पोर्टल पर 14.66 लाख उत्पाद उपलब्ध हैं। इस पोर्टल पर 2.97 लाख से अधिक विक्रेता और सेवा प्रदाता हैं।

GeM विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के उपयोग में आने वाली वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए ऑनलाइन सुविधा प्रदान करता है जिसका मकसद सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाना और उसकी दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ खरीद में तेजी लाना है।  

केंद्र सरकार ने छोटे कारोबार को बढ़ावा देने और सरकारी कंपनियों के लिए स्टार्टअप से 25 फीसदी सामान अनिवार्य रूप से खरीदने के उद्देश्य से सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल शुरू किया है। इससे सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (एमएसई) वाले व्यापारियों को बड़ा फायदा हो रहा है। इस सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद इन कारोबारियों को घर बैठे खरीदार मिलने लगे हैं। यदि आप भी अपना व्यापार कर रहे हैं तो इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराकर घर बैठे खरीदार पा सकते हैं।

 

वित्त वर्ष 2018-19 में इस पोर्टल पर ट्रांजैक्शन वैल्यू में तीन गुना ग्रोथ दर्ज की गई थी। 2018-19 में कुल 17,327 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ है, जो 2017-18 5884.7 करोड़ ही था। 2018-19 में 13,12,240 ट्रांजैक्शन हुए, जो उसके पिछले साल 3,72,528 था। GeM पूरी तरह से कागज रहित, कैशलेस और प्रणाली संचालित ई-मार्केटप्लेस है जो न्यूनतम मानव इंटरफेस के साथ आम उपयोग की वस्तुओं और सेवाओं की खरीदारी में सक्षम बनाता है।

GeM विक्रेता पंजीकरण, खरीद आदि करने और भुगतान प्रोसेसिंग में मानव इंटरफेस को समाप्त करता है। एक खुला मंच होने के कारण GeM सरकार के साथ व्यापार की इच्छा रखने वाले वास्तविक आपूर्तिकर्ताओं के लिए कोई प्रवेश बाधा पैदा नहीं करता है। हर कदम पर खरीदार उसके संगठन के प्रमुख, भुगतान प्राधिकारियों के साथ-साथ विक्रेताओं को ई-मेल अधिसूचनाएं भेजी जाती हैं। रेलवे, रक्षा, प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और राज्य सरकारों को भुगतान प्रणाली के लिए वेब सेवाओं के एकीकरण का विस्तार किया जा रहा है। 

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तकनीकी राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग की तकनीकी मदद से उत्पादों और सेवाओं, दोनों की खरीदारी के लिए जीईएम पोर्टल विकसित किया है। इस पोर्टल का शुभारंभ वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री द्वारा 9 अगस्त, 2016 को किया गया था।

GeM बन सकता है भारत का अमेजन

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का मानना है कि सरकार का पोर्टल जीईएम (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) भारतीय उत्पादों को बेचने में अमेजन और फ्लिपकार्ट की तरह काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि वह जीईएम पोर्टल को निजी कारोबार व निजी क्षेत्र के लिए खोलने पर विचार कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों से भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार बन गया है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी दृष्टिकोण की वजह से आज भारत ई-कॉमर्स मार्केट में डंका बजा रहा है। भारत आज दुनिया का सबसे तेजी से वृद्धि करने वाला ई-कॉमर्स मार्केट बन गया है और इसके 2026 तक 8 गुना बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। CARE Rating की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट की इस बढ़ोतरी के पीछे मोदी सरकार की योजनाएं हैं। बताया जा रहा है कि डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी महात्वाकांक्षी योजनाओं की बदौलत आज भारत ऑनलाइन ई-कामर्स मार्केट का सरताज बनने की ओर अग्रसर है।

भारत में ऑनलाइन ई-कॉमर्स मार्केट 51 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है, जो कि पूरे विश्व में सर्वाधिक है। ASSOCHAM की एक स्टडी के मुताबिक 2018 में भारत में ई-कॉमर्स मार्केट 24 बिलियन डॉलर का था, जिसके 2026 में 200 बिलियन डॉलर के होने का अनुमान है यानी आठ वर्षों में आठ गुनी बढ़ोतरी। 

अमेरिका को पीछे छोड़ भारत  दुनिया का सबसे बड़ा ई-कॉमर्स बाजार बन जाएगा। विश्व की सबसे बड़ी पैकेज डिलीवरी एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट कंपनी यूनाइटेड पार्स सर्विस (यूपीएस) के मुताबिक भारत 2034 तक अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा ई-कॉमर्स बाजार बन जाएगा। ऐसे में आने वाले वर्षों में भारत में इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नौकरियां आने की संभावना है। यूपीएस के प्रबंध निदेशक (भारतीय उपमहाद्वीप) राशिद फागार्टी ने कहा कि भारत का ई-कॉमर्स बाजार बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है। उन्होंने ने कहा कि यूपीएस के ऑननलाइन शॉपर्स नाम से एक शोध कराया है, जिससे यह नतीजा निकला है कि भारत आने वाले समय में दुनिया का सबसे बड़ा ई-कॉमर्स बाजार होगा। स्टडी द्वारा प्रमाणित है कि भारत में ग्राहक सर्विस की क्वालिटी को लेकर बेहद जागरूक हैं।

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