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कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके पुजारी ने किया श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से ईदगाह हटाने का विरोध

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कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि हिंदू धर्म, हिंदू देवी-देवताओं में उनकी कोई आस्था नहीं है। रविवार (सितम्बर 27, 2020) को कांग्रेस नेता की अध्यक्षता वाले एक संगठन ‘अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा’ ने उस याचिका की निंदा की है, जिसमें मथुरा कोर्ट से श्रीकृष्ण जन्मभूमि में अतिक्रमण से मुक्ति की मांग की गई है।

महासभा ने उन लोगों की आलोचना की है, जो 17वीं शताब्दी की मस्जिद को हटाने की मांग लेकर कोर्ट पहुंचे हुए हैं। संगठन ने कहा कि मथुरा के शांति-सद्भाव को बिगाड़ने के लिए इस तरह से मुद्दे उठाए जा रहे हैं। महासभा के अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश पाठक ने दावा किया है कि इस मामले में 20वीं सदी में ही समझौता हो चुका है, इसीलिए मथुरा में मंदिर-मस्जिद का कोई विवाद ही नहीं है।

महेश पाठक ने इस मामले को उठाने वाले लोगों को बाहरी करार दिया। उन्होंने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर हुए अतिक्रमण पर बोलते हुए कहा कि अगल-बगल में मंदिर-मस्जिद होने से भावनात्मक एकता बढ़ती है और साथ ही दावा किया कि यहां दोनों समुदायों में परस्पर सद्भाव है। लखनऊ निवासी रंजना अग्निहोत्री समेत 6 लोगों ने कोर्ट से श्रीकृष्ण जन्मभूमि को अतिक्रमण-मुक्त करने की मांग की है।

मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ भूमि पर मालिकाना हक और वहां से शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की मांग करते हुए मथुरा की अदालत में एक सिविल अर्जी दायर की गई है। श्री कृष्ण विराजमान की ओर से दायर अर्जी को कोर्ट ने शुक्रवार को स्वीकार कर लिया। यह अर्जी सुनवाई योग्य है कि नहीं कोर्ट इस पर 30 सितंबर को सुनवाई करेगा। अदालत में याचिका दायर कर के वकील विष्णु शंकर जैन ने मांग की है कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान एवं शाही ईदगाह प्रबंध समिति के बीच हुआ समझौता पूरी तरह गलत है और उसे निरस्त किया जाए। 

जैन ने बताया कि जिस जमीन पर मस्जिद बनी है, वह श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के नाम पर है। ऐसे में सेवा संघ द्वारा किया गया समझौता गलत है। इसलिए उक्त समझौते को निरस्त करते हुए मस्जिद को हटाकर मंदिर की जमीन उसे वापस करने की मांग की गई है।

बात दें कि महेश पाठक मथुरा से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में उन्हें मात्र 28,084 (2.55%) वोट ही मिले थे और भाजपा की हेमा मालिनी लगातार दूसरी बार विजयी हुई थीं।

 

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