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2022 ने तय कर दिए है 2024 के नतीजे, परिवारवादी राजनीति का होगा सूर्यास्त- प्रधानमंत्री मोदी

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चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार शाम नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इन राज्यों के लोगों और बीजेपी कार्यकर्ताओं को समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और आने वाले वर्षों में और अधिक प्रगति का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि फर्स्ट टाइम वोटर्स ने बढ़-चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया और भाजपा की जीत पक्की की। चुनाव के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मुझसे वायदा किया था कि इस बार होली 10 मार्च से शुरू हो जाएगी। हमारे कर्मठ कार्यकर्ताओं ने इस वायदे को पूरा करके दिखाया है।

उन्होंने कहा कि तीन राज्यों यूपी, गोवा और मणिपुर में सरकार में होने के बावजूद, बीजेपी के वोट शेयर में वृद्धि हुई है। गोवा में भी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 10 साल तक सत्ता में रहने के बाद भी राज्य में बीजेपी की सीटों की संख्या बढ़ी है। उत्तराखंड में भी भाजपा ने नया इतिहास रचा है। राज्य में पहली बार कोई पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में आई है। यानि सीमा से सटा एक पहाड़ी राज्य, एक समुद्र तटीय राज्य, मां गंगा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त एक राज्य और पूर्वोत्तर सीमा पर एक राज्य, भाजपा को चारों दिशाओं से आशीर्वाद मिला है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन चुनाव के नतीजों ने एक बात और साफ कर दी है कि यूपी की जनता को जातिवाद की दृष्टि से देखना, एक तरह से उसका अपमान करना है। कुछ लोग ये कहकर यूपी को बदनाम करते हैं कि यहां के चुनाव में तो जाति ही चलती है। लेकिन हमने 2014 के चुनाव नतीजे देखे, 2017, 2019 के नतीजे देखे और अब फिर बाइस में भी देख रहे हैं, हर बार यूपी के लोगों ने विकासवादी राजनीति को ही चुना है। यूपी के लोगों ने इन लोगों को ये सबक दिया है कि जाति की गरिमा, जाति का मान, देश को जोड़ने के लिए होना चाहिए, देश को तोड़ने के लिए नहीं। वैसे मैं आज ये भी कहूंगा कि 2019 के चुनाव नतीजों के बाद हमारे कुछ पॉलिटिकल ज्ञानियों ने कहा था कि 2017 के नतीजों ने 2019 के नतीजे तय कर दिए। मैं मानता हूं इस बार भी वो यही कहेंगे कि 2022 के नतीजों ने 2024 के नतीजे तय कर दिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का नागरिक तो बहुत जिम्मेदारी के साथ देश के हित में अपना काम कर रहा है, राष्ट्र निर्माण में जुटा है, लेकिन हमारे यहां कुछ लोग, लगातार राजनीति का स्तर गिराते जा रहे हैं। कोरोना के इस समय में भी हमने देखा है कि इन लोगों ने देशवासियों को गुमराह करने की लगातार कोशिश की। वैक्सीनेशन के हमारे प्रयासों की दुनिया प्रशंसा कर रही है लेकिन इस पवित्र कार्य पर, भारत की वैक्सीन पर सवाल उठाए गए। दुर्भाग्य की बात है कि जब यूक्रेन में हजारों भारतीय छात्र, भारतीय नागरिक फंसे हुए थे, तब भी देश का मनोबल तोड़ने की बातें हो रहीं थीं। ये लोग उन बच्चों में असुरक्षा की भावना बढ़ा रहे थे, यहां उनके परिवारवालों की चिंता बढ़ा रहे थे। इतना ही नहीं, इन लोगों ने ऑपरेशन गंगा को भी प्रदेशवाद की बेड़ियों में बांधने की कोशिश की। हर योजना को, हर कार्य को क्षेत्रवाद, प्रदेशवाद, जातिवाद, सांप्रदायवाद का रंग देने का प्रयास, बहुत दुखद है।

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन चुनावों में मैंने लगातार विकास की बात की। गरीबों को घर, गरीबों को राशन, वैक्सीन, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, हर विषय पर भाजपा का विजन लोगों के सामने रखा। इसके साथ ही, जिस एक बात पर मैंने सबसे ज्यादा चिंता जताई थी, वो थी – घोर परिवारवाद। मैंने राज्यों के लोगों को बताया कि कैसे परिवारवाद उनके राज्य को पीछे ले जा रहा है। और मुझे खुशी है कि मतदाताओं ने इस बात को समझते हुए भी अपना वोट दिया है। भारत में परिवारवादी राजनीति का सूर्यास्त एक ना एक दिन जरूर होगा, आज के चुनाव परिणामों ने तय कर दिया है।

उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षा, भ्रष्टाचार पर कठोर से कठोर कार्रवाई की है। लेकिन आज हम देख रहे हैं जो निष्पक्ष संस्थाएं, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करती हैं, ये लोगऔर उनका इकोसिस्टम, उन संस्थाओं को बदनाम करने में जुट जाते हैं। घोटालों से घिरे लोग एकजुट होकर इन संस्थाओं पर ही दबाव बनाने लगते हैं। जांच एजेंसियों को रोकने के लिए ये लोग अपने इकोसिस्टम के साथ मिलकर नए-नए तरीके खोजते हैं। इन लोगों को देश की न्यायपालिका पर भी भरोसा नहीं है। पहले हजारों करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार करो, फिर जांच भी नहीं होने दो और जो जांच करे, उस पर दबाव बनाओ, ये इन लोगों की प्रवृत्ति है। ये लोग किसी भ्रष्टाचारी पर कार्रवाई होते ही उसे धर्म का रंग देने लगते हैं, जाति का रंग देने लगते हैं। किसी माफिया के खिलाफ, अदालत कोई फैसला सुना देती है, तो भी उसे ये लोग धर्म और जाति से जोड़ देते हैं। ऐसे में भारत के हर संप्रदाय हो, हर जाति के लोगों को ये सोचना होगा कि ऐसे भ्रष्टाचारियों और माफियाओं को अपने समाज से, अपनी जाति से, अपने संप्रदाय से दूर रखें। इससे समाज और संप्रदाय का बहुत भला होगा।

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