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ऑक्सीजन संकट दूर करने के लिए पीएम मोदी का महामानव अवतार

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कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से देश आज एक असाधारण परिस्थिति से गुजर रहा है। ऑक्सीजन संकट हो या अस्पतालों की जरूरत, एक प्रकार से चौतरफा स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चौतरफा प्रहार झेलना पड़ रहा है। ऐसे हालात से देश को निजात दिलाने के लिए पीएम मोदी ने खुद को पूरी तरह से झोंक दिया है। ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए अप्रत्याशित कदम उठाए हैं। एक तरफ जहां पीएम केयर्स फंड से 162 ऑक्सीजन प्लांट लगाने की पहल की, वहीं बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांटों को शुरू करने का निर्देश दिया। ‘ऑपरेशन ऑक्‍सीजन’ के तहत सेना को मोर्चे पर लगाया। रेलवे के ‘ऑक्सीजन एक्सप्रेस’ के जरिए देश के भीतर ऑक्‍सीजन आपूर्ति में तेजी लाई गई है। हवाई और जल मार्ग के जरिए विदेशों से ऑक्‍सीजन लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। दुनिया के अधिकांश देशों ने प्रधानमंत्री मोदी की मदद करने के लिए असाधारण एकजुटता दिखाई है।

ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए बड़ी पहल

  • पीएम केयर्स फंड से 1 लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदने और 500 पीएसए संयंत्र लगाने की स्वीकृति
  • मोदी सरकार ने 10 मीट्रिक टन और 20 मीट्रिक टन के 20 क्रायोजेनिक टैंकरों का आयात किया।
  •  देश के इस्पात संयंत्रों ने 4076 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की है।
  • 34 ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों ने 2067 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की है।
  • ‘ऑपरेशन ऑक्सीजन’ के तहत भारतीय वायु सेना की परिवहन विमानों से ऑक्सीजन की आपूर्ति में मदद
  • समुद्र सेतु II अभियान के तहत नौसेन के नौ युद्धपोत ऑक्सीजन और चिकित्सा उपकरणों को विदेश से भारत पंहुचा रहे हैं।
  • ‘ऑक्सीजन मैत्री’ ऑपरेशन के तहत सऊदी अरब से 80 मीट्रिक टन ऑक्सीजन भारत लाई गई।
  • रूस के अलावा अमेरिका ने भारत को 100 मिलियन डॉलर की मेडिकल सहायता उपलब्ध करायी है।
  • फ्रांस ऑक्सीजन के पांच कंटेनर भेज रहा है, जो एक दिन में 10,000 मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति करने में सक्षम है।

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