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राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद की विदाई पर बोलते हुए भावुक हुए प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज, 9 फरवरी को राज्यसभा में कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद की विदाई पर बोलते हुए भावुक हो गए। आजाद के साथ अपने संबंधों की बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के आंसू निकल आए। एक आतंकी घटना के बाद गुलाम नबी आजाद के साथ फोन पर हुई बात का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गुजरात के यात्रियों पर जब कश्मीर में आतंकवादियों ने हमला किया, सबसे पहले गुलाम नबी आजाद जी का उनके पास फोन आया। वो फोन सिर्फ सूचना देने का नहीं था, फोन पर गुलाम नबी आजाद के आंसू रुक नहीं रहे थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय प्रणब मुखर्जी साहब डिफेंस मिनिस्‍टर थे। मैंने उनको फोन किया कि अगर फोर्स का हवाई जहाज मिल जाए… डेड बॉडी लाने के लिए। उन्‍होंने कहा चिंता मत कीजिए, लेकिन रात में फिर गुलाम नबी जी का फोन आया। वे एयरपोर्ट थे। एयरपोर्ट से ही उन्‍होंने मुझे फोन किया और जैसे अपने परिवार के सदस्‍य की चिंता करेंगे, वैसी चिंता इन्होंने की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सत्ता जीवन में आती रहती है, लेकिन उसे कैसे पचाना है वो गुलाम नबी आजाद जी से सीखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि एक मित्र के रूप में मैं गुलाम नबी जी का बहुत आदर करता हूं। इस देश के लिए उनकी कुछ कर गुजरने की कामना उन्हें चैन से बैठने नहीं देगी।

गुलाम नबी आजाद की तारीफ करते हुए कहा कि वो जिस तरह से यहां के घर में बगीचे को संभालते हैं, जो कश्मीर की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि मुझे चिंता इस बात की है कि गुलाम नबी जी के बाद इस पद को जो संभालेंगे, उनको गुलाम नबी जी से मैच करने में बहुत दिक्‍कत पड़ेगी। क्‍योंकि गुलाम नबी जी अपने दल की चिंता करते थे लेकिन देश की और सदन की भी उतनी ही चिंता करते थे। यह छोटी बात नहीं है, यह बहुत बड़ी बात है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुझे याद है कि कोरोना काल में मैं फ्लोर लीडर्स की मीटिंग कर रहा था, उसी दिन गुलाम नबी जी का फोन आया कि सभी पार्टी नेताओं की बैठक जरूर कीजिए। मुझे अच्छा लगा कि उन्होंने मुझे सुझाव दिया और मैंने उनके कहने पर बैठक की भी।

देखिए वीडियो-

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