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दिल्ली में फर्जी किसानों का तांडव, लाल किले पर तिरंगा का अपमान, महिला पुलिस कॉन्स्टेबल से दुर्व्यवहार, पुलिसकर्मियों पर किया पथराव

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गणतंत्र दिवस से मौके पर फर्जी किसानों ने जिस तरह तांडव किया, उसे किसी भी तरीके से उचित नहीं ठहराया जा सकता। आज किसान आंदोलन के नाम पर किसानों ने न सिर्फ देश के सबसे पावन अवसर पर देश को बदनाम किया, बल्कि कानून के विरोध के नाम पर कानून की ही धज्जियां उड़ाकर कर रख दीं। जिस तिरंगे की शान रखने के लिए न जाने कितने लोगों ने अपनी शहादत दी है, उसी झंडे को अपमानित किया गया। बेकाबू प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कर्मियों पर पथराव किया और सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया। ये सब तथाकथित किसान नेताओं के संरक्षण और कांग्रेस के समर्थन से हुआ। 

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान अपनी ट्रैक्टर परेड लेकर नई दिल्ली के लाल किले तक घुस गए और उन्होंने लाल किले पर लाल-पीला झंडा भी फहरा दिया। प्रदर्शनकारी किसानों ने लाल किले के फाटक पर रस्सियां बांधकर इसे गिराने की कोशिश भी कीं।

किसानों को एक गुंबद के शीर्ष पर एक झंडा लगाते हुए देखा गया। वहीं, उस जगह पर खालसा पंथ और किसानों का झंडा लगाया गया, जहां पर प्रधानमंत्री हर वर्ष स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराते आए हैं। इससे पता चलता है कि किसानों ने दिल्ली में उपद्रव करने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी।

गणतंत्र दिवस के मौके पर ऐसे कई वीडियो सामने आ चुके हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड तोड़ दिए गए, पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और सेन्ट्रल दिल्ली में आईटीओ में पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की गई। हिंसक प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आँसू गैस छोड़ी गई।

एक पुलिसकर्मी के साथ कुछ किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा दिल्ली स्थित आईटीओ में मारपीट और हाथापाई का वीडियो सामने आया है। हाथ में डंडे लिए इन प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिसकर्मी को सड़क पर घेर लिया गया और उनके साथ हाथापाई की गई। तभी उन्हीं प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोगों ने आकर बीच-बचाव कर पुलिसकर्मी को सुरक्षित खींच निकाला।

किसान प्रदर्शनकारियों ने मर्यादा की सभी हदें लांघनी भी शुरू कर दी है। एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें देखा कि सड़क पर प्रदर्शनकारियों ने एक महिला पुलिस को घेर कर पकड़ लिया और उसे एक कोने में लेकर चले गए। महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

दिल्ली पुलिस के जवानों को किसानों की इस अराजकता के कारण उन्हें नियंत्रित करने में खासी परेशानी हो रही है। दिलशाद गार्डन में ड्यूटी के दौरान ही एक पुलिस का जवाब बेहोश होकर गिर पड़ा, जिसके बाद बाकी पुलिसकर्मियों ने उसे वहाँ फर्स्ट एड दिया। होश में आने के बाद उक्त पुलिस के जवान को अस्पताल ले जाया गया। वहीं ITO सेंटर में तो बसों को भी नुकसान पहुँचाया गया। किसान तोड़फोड़ कर आगे बढ़ते चले गए।

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