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बिहार को मोदी सरकार की बड़ी सौगात, अब गोपालगंज के सबेया एयरपोर्ट से भी भरी जा सकेगी उड़ान, लोगों का वर्षों पुराना सपना जल्द होगा साकार

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केंद्र की मोदी सरकार ने बिहार खासकर गोपालगंज को एक बड़ी सौगात दी है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय ने सबेया हवाई अड्डा को रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम ‘उड़े देश का आम नागरिक’ में शामिल कर लिया है। इस योजना के तहत सबेया हवाई अड्डा को मंजूरी मिलने से इस हवाई अड्डा से हवाई यातायात शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। इस हवाई अड्डा के चालू होने से गोपालगांज और उसके आस-पास के जिलों के लोगों को यहां से उड़ान भरने का वर्षों पुराना सपना साकार हो जाएगा।

बिहार में सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा गोपालगंज और सिवान में आता है। यहां के अधिकतर लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं, लेकिन हवाई सुविधा नहीं होने की वजह से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब सबेया एयरपोर्ट के डेवलप होने से और उड़ान स्कीम में शामिल होने से गोपालगंज के अलावा सिवान, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और यूपी के कई जिलों के लोगों को इसका फायदा मिलेगा।

स्थानीय सांसद आलोक कुमार सुमन ने कहा कि उन्हें नागर विमानन उड्डयन राज्यमंत्री हरदीप एस पुरी ने जानकारी देते हुए इसे रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम में जोड़ने की बात कही। जेडीयू सांसद ने कहा कि जब वे सांसद नहीं थे तब उनका सपना था कि गोपालगंज के लोग भी अपने शहर से ही हवाई जहाज की यात्रा करें। आज प्रधानमंत्री मोदी की वजह से उनका सपना पूरा हो रहा है।

हथुआ प्रखंड के स्थित सबेया हवाई अड्डा को चालू कराने के लिए लोग काफी समय से आवाज उठा रहे थे। अभी जिले के लोगों को हवाई सफर के लिए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर या पटना जाना पड़ता है। सबेया हवाई अड्डा को जीर्णोद्धार हो जाने से खाड़ी देश में आने जाने वाले लोगों को घरेलू स्तर पर ही उड़ान सेवा का लाभ मिलेगा। जिससे जिले में विकास की गति तेज होगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। 

गौरतलब है कि सबेया हवाई अड्डा करीब 517 एकड़ में बना हुआ है। उपेक्षा की वजह से हवाई अड्डा की जमीन पर अतिक्रमण कर लिया गया है। गोरखपुर एयरफोर्स कैंप से इसकी दूरी 125 किमी है। गोपालगंज मुख्यालय से इसकी दूरी 26 किमी है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय इस हवाई अड्डे का इस्तेमाल किया गया था। अंग्रेजों ने 1868 में इसकी हवाइपट्टी का निर्माण किया था। चीन के नजदीक होने के कारण रक्षा के दृष्टिकोण से यह हवाई अड्डा काफी संवेदनशील था। आजादी के बाद रक्षा मंत्रालय ने इस हवाई अड्डे को ओवरटेक करने के बाद इसे विकसित करने की जगह उपेक्षित छोड़ दिया था।

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