Home विचार कांग्रेसी-वाममपंथी गैंग का कश्मीर में मानवाधिकारों का नया खेल

कांग्रेसी-वाममपंथी गैंग का कश्मीर में मानवाधिकारों का नया खेल

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जम्मू-कश्मीर में धारा 370 खत्म होने से सबसे अधिक बेचैनी पाकिस्तान और चीन के बाद भारत के अंदर कांग्रेसी और वामपंथी गैंग में है।

05 अगस्त 2019 को भारत की संसद ने जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म किया तो इस गैंग ने सड़क से लेकर न्यायालय तक निर्णय को रोकने के लिए सारे दांव खेले, पर सफल नहीं हुए। आज, फिर उसी निर्णय को गलत साबित करने और कश्मीर पर देश के अंदर और बाहर विरोध खड़ा करने के लिए राज्य में मानवाधिकारों का सवाल उठा रहे हैं।

इस गैंग के लिए मानवाधिकारों का सवाल उन चंद कांग्रेसी और अन्य राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के लिए ही है जिन्हें जम्मू कश्मीर की सरकार ने नजरबंद कर रखा है, ये कभी उन नागरिकों के मानवाधिकारों से कोई मतलब रखते जिन्हें आंतकवादी सरेआम मार दिया करते हैं।

कांग्रेसी-वामपंथी गैंग को मानवाधिकारों का हनन  वहीं दिखाई देता है जहां सरकार बहुजन हिताय और बहुजन सुखाय के लिए निर्णय लेती है। जम्मू-कश्मीर राज्य में शांति व विकास की धारा को गति देने के लिए राजनीतिक दलों के कुछ नेताओं को नजरबंद करना, क्या उचित नहीं है? राज्य के नेताओं को, स्थिति के अनुसार समय समय पर सरकार रिहा भी कर रही है, अभी हाल ही में फारुख अब्‍दुल्‍ला और उमर अब्दुल्ला को रिहा किया ही गया है।

नेताओं को नजरबंद करना और फिर उन्हें रिहा कर देना यह स्पष्ट करता है कि सरकार किसी के मानवधिकारों का हनन नहीं बल्कि राज्य के लोगों के अधिकारों को बनाए रखने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी राज्य में बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय के लिए काम कर रही है। लेकिन कांग्रेसी-वामपंथी गैंग ने 05 अगस्त को देश का माहौल खराब करने के लिए सोशल मिडिया पर कश्मीर के मानवाधिकारों का राग छेड़ रखा है।

इंडियन एक्सप्रेस ने कांग्रेस के नेता सैफुद्दीन सोज की नजरबंदी की तस्वीर के साथ कश्मीर में मानवधिकारों पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसे टीव्ट करते हुए राजदीप सरदेसाई ने लिखा कि केवल कुछ ही समाचार पत्र आज ऐसा कर सकते हैं।

पत्रकार संजुक्ता बासु ने तो सीधे सीधे कहा कि मानवाधिकारों के नाम पर विरोध करने से कुछ नहीं होगा हमें जनती को सीधा कहना होगा कि भाजपा को वोट मत दो।

अंग्रेजी एक और बड़े पत्रकार सिद्धार्थ वरदारजन ने सीधा सुप्रीम कोर्ट को ही लपेट लिया, और लिखा कि कोर्ट को प्रशांत भूषण पर अवमानना का केस चलाने में कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन सरकार पर कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन पर कोई कार्यवाई नहीं करती है।

अंग्रेजी के समाचार पत्र ‘The Telegraph’ के संकर्षण ठाकुर ने सैफुद्दीन सोज की तस्वीर को ट्वीट करते हुए व्यंग किया है कि एक स्वतंत्र व्यक्ति की तस्वीर

दो कदम आगे बढ़कर ‘The Telegraph’ ने एक बहुत ही भद्दी हेडलाइन दी है। इस समाचार पत्र ने पिछले कई सालों से पत्रकारिता की हदें पार कर दी हैं, इसकी हर हेडलाइन सिर्फ और सिर्फ गाली होती है।

एनडीटीवी की पत्रकार नीधि राजदान ने तो सैफुद्दीन सोज के सुप्रीम कोर्ट से सीधी गुहार लगायी है।

अंग्रेजी और हिन्दी में सरकार के खिलाफ हर मुद्दे पर गाली की भाषा बोलने वाली अरफा खानम ने लोगों को जम्मू कश्मीर में मानवाधिकारों पर बोलने के लिए उकसाया है।

अभी तो कांग्रेसी-वामपंथी गैंग ने एक मुद्दा खड़ा किया है, उस पर एक दो दिन में कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी, प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा हमला बोलेंगे। शायद, यह हमला 05 अगस्त के दिन ही हो जब प्रधानमंत्री मोदी अयोध्या में श्रीरामजन्म भूमि मंदिर का शिलान्यास कर रहे होंगे।

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