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प्रधानमंत्री मोदी ने इसलिए कहा कि ये चुनाव वंशवाद और विकासवाद के बीच की जंग है…

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16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में कहा, “एक तरफ वंशवाद में पली पार्टियां हैं। उधर, हमारी संकल्पबद्ध कार्यकर्ताओं की पार्टी है। यही बीजेपी की खासियत है। चुनाव हमारे लिए विकासवाद की जंग है, उनके लिए (कांग्रेस) वंशवाद की जंग है।” प्रधानमंत्री उस पीड़ा को बयां कर रहे थे जिसे देश ने आजादी से लेकर अब तक झेला है। स्वतंत्रता मिलने के 70 साल बाद भी भारत के राजनीतिक क्षितिज पर वंशवाद कि बेल अमरबेल कि तरह पनप रही है। भारतीय राजनीति में ये महत्वपूर्ण है कि आप किसके बेटे है या दामाद या बेटी, भतीजे हैं। यह स्वतंत्रता के पश्चात से ही चला आ रहा है और इसके केंद्र में रहे हैं देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरल लाल नेहरू। जवाहर लाल नेहरु ने तो कांग्रेस की कमान ऐसी पकड़ी कि पिछले सत्तर वर्षों में साठ वर्ष तो देश की बागडोर उनके वंशजों, प्रपौत्रों के हाथों में में रही है। यूं कह सकते हैं कि भारतीय लोकतंत्र नेहरू-गांधी परिवार कि व्यक्तिगत सम्पति बन गयी थी।

dynasty politics in india के लिए चित्र परिणाम

हालांकि वंशवाद-परिवारवाद का विरोध कर कई दल अस्तित्व में भी आए लेकिन वे भी इस दलदल में धंस गए। देश-प्रदेश की जनता को भी यह समझाने का प्रयास होता रहा कि एक विशेष वंश को ही सत्ता में रहने का अधिकार है और वही उनका भला करेगा। जनता ने भी इसे ही अपनी नियति मान लिया था। दरअसल भारत के देश-प्रदेश की राजनीति में वंशवाद गहरे तक पैठ कर गया है। हालांकि इसके समानांतर वंशवाद-परिवारवाद से विकासवाद का संघर्ष भी लगातार जारी है। आइये हम कुछ ऐसे ही उदाहरण देखते हैं कि कैसे वंशवाद-परिवारवाद का विकासवाद से जंग हो रहा है।

गांधी फैमिली Vs मोदी
कांग्रेस राजघराने में ‘युवराज’ के राजतिलक (अध्यक्ष बनने का) का समय नजदीक आ गया। रियासत के सिपहसालारों ने राजमाता (सोनिया गांधी) को बता दिया है कि युवराज अब राजा बनने के लायक हो गए हैं। बात राहुल गांधी की हो रही है जिनको अब कांग्रेस की कमान सौंपने की तैयारी हो चुकी है। 47 साल के राहुल को शायद अब राजनीति की समझ आ गई है। ये बात अलग है कि अब तक उनके दांव कुछ दम नहीं दिखा पाए। दूसरी ओर विकासवाद के नायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जिनसे देश की 85 प्रतिशत जनता प्रसन्न है। देश की जनता उनके नेतृत्व में स्वयं को स्वतंत्र महसूस कर रही है।

वंशवाद-परिवारवाद के पोषक परिवार के नाम नेशनल हेराल्ड केस,अगस्ता वेस्टलैंड डील, बोफोर्स डील, जमीन घोटाला, वाड्रा-डीएलएफ डील, मारुति घोटाला, मंदड़ा स्कैंडल जैसे न जाने कितने ही घोटाले इसी वंशवादी राजनीति से जुड़े हुए हैं। दूसरी ओर बीते तीन सालों में केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार के एक भी आरोप नहीं है। स्टैड अप इंडिया, स्टार्ट अप योजना, मुद्रा योजना, स्किल इंडिया, उज्ज्वला योजना, सौभाग्य योजना जैसी अनगिनतक विकास योजनाएं जमीन पर उतारी जा चुकी हैं।

राहुल गांधी मोदी के लिए चित्र परिणाम

लालू फैमिली Vs नीतीश
वंशवाद-परिवारवाद और विकासवाद की जंग देखनी हो तो बिहार के बारे में जानना जरूरी है। एक ओर वंशवाद-परिवारवाद के पुरोधा लालू प्रसाद हैं, जिन्होंने बिहार के अपने 15 वर्षों के शासनकाल में राज्य का खजाना खाली कर दिया। 950 करोड़ का चारा घोटाला तो इतिहास में नाम दर्ज करा चुका है। इसके अलावा अलकतरा घोटाला, जमीन घोटाला, मॉल घोटाला, मिट्टी घोटाला, पेट्रोल पम्प घोटाला… जैसे कई बड़े घोटाले लालू एंड फैमिली ने किये हैं। प्रदेश की जनता ने भी इनके कुकर्मों पर कुछ नहीं कहा। लेकिन समय बदला और सत्ता नीतीश कुमार के हाथ में आ गई। विकासवाद और वंशवाद का फर्क साफ नजर आने लगा। नीतीश कुमार ने बिहार में विकासवाद की एक नयी सोच पैदा की है। बिहारी अस्मिता के लिए संघर्ष किया है और सात निश्चय के साथ बिहार को विकास की राह पर लेकर आगे बढ़ चले हैं।

लालू यादव नीतीश कुमार के लिए चित्र परिणाम

यादव फैमिली Vs योगी
पंजीरी वितरण घोटाला, टेंडर घोटाला, आगरा-दिल्ली एक्सप्रेस-वे घोटाला, दिल्ली यमुनोत्री स्टेट हाई-वे घोटाला, लैपटॉप वितरण घोटाला… गिनते जाएंगे लेकिन सूची समाप्त नहीं होगी। ये सारे घोटाले यूपी के बिग यादव फैमिली ने किए हैं। वंशवाद-परिवारवाद की पोषक यादव फैमिली ने जाति और धर्म की राजनीति कर उत्तर प्रदेश के विकास की पटरी से उतार दिया। उत्तर प्रदेश विकास के हर पैमाने पर पिछड़ता चला गया लेकिन इनसे सवाल तक नहीं पूछे गए। अब राज्य में सत्ता बदली है तब से ही जाति धर्म से ऊपर उठकर सबका साथ, सबका विकास के मूलमंत्र के सहारे विकासवाद की एक नयी गाथा लिखी जा रही है। सरकार बदले छह महीने भी नहीं हुए हैं लेकिन भाग्यलक्ष्मी योजना, छात्रवृति योजना, मिशन परिवार विकास योजना, सड़क निर्माण, किसानों का कर्ज माफ, लैपटॉप वितरण जैसी योजनाएं तेजी से लागू की हैं।

अखिलेश और योगी आदित्यनाथ के लिए चित्र परिणाम

गोगोई फैमिली Vs सर्बानंद सोनोवाल
उत्तर कछार घोटाला, एएनएम भर्ती प्रक्रिया में घोटाला, चिटफंड घोटाला, सारधा घोटाला… जैसे कई घोटाले हैं जिनके आरोप असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई पर लगे हैं। उसपर अपने बेटे गौरव गोगोई को भी भावी मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट करने से नहीं चूके। दरअसल तरुण गोगोई भी उसी वंशवाद-परिवारवाद के पोषक हैं जो केंद्रीय राजनीति में उनके शीर्षस्थ नेता करते रहे हैं। गांधी परिवार की तर्ज पर गोगोई परिवार को असम जनता ने नकार दिया और असम में सर्बानंद सोनोवाल को सत्ता सौंप दी। आज सर्वानंद सोनोवाल असम की जनता की आशा आकांक्षाओं के प्रतीक हैं। वे विकास योजनाओं के माध्यम से असम को एक नयी ऊंचाई पर ले जाने के लिए संकल्पबद्ध हैं।

तरुण गोगोई और सर्वानंद सोनोवाल के लिए चित्र परिणाम

जोगी फैमिली Vs रमन सिंह
पाइप खरीद घोटाला, नागरिक आपूर्ति जमीन घोटाला जैसे कई घोटाले छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल में हुए। घोटालों से घिरा प्रदेश विकास के हर मानक पर पिछड़ा रहा। ऊपर से अपने बेटे अमित जोगी को प्रोमोट करने के चक्कर में प्रदेश को पिछड़ेपन का उदाहरण बना दिया। लेकिन जब से रमण सिंह ने प्रदेश की कमान संभाली विकास की नयी अवधारणाओं के साथ विकास का प्रकाश फैला रहे हैं। आज प्रदेश का पीडीएस सिस्टम देश-दुनिया के लिए मिसाल बन गया है। नक्सलग्रस्त क्षेत्रों में विकास की रोशनी पहुंच रही है। जाहिर है वंशवाद-परिवारवाद से विकासवाद की जंग में जीत तो विकासवाद की ही होनी है।

अजीत जोगी रमन सिंह के लिए चित्र परिणाम

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