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मोदी सरकार का बड़ा फैसला, चंबल के बीहड़ में अब होगी खेती-किसानी, पर्यावरण में सुधार साथ लोगों को मिलेगा रोजगार

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प्रधानमंत्री नरे्द्र मोदी ने मरुस्थलीकरण की रोकथाम पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित सम्मेलन (कॉप-14) की उच्चस्तरीय बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत अब 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन को दुरुस्त करने की महत्वाकांक्षा रखता है। प्रधानमंत्री मोदी की इस घोषणा पर अमल भी शुरू हो चुका है। डाकुओं और अपराधियों की शरणस्थली रहे चंबल में 3 लाख हेक्टेयर से भी अधिक गैर-खेती योग्य बीहड़ भूमि है, जिसमें कृषि विकास किया जाएगा। एक महीने में इसकी प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट पेश की जाएगी। मोदी सरकार का दावा है कि इस क्षेत्र में खेती-किसानी व पर्यावरण में सुधार होगा। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के मुताबिक चंबल क्षेत्र के लिए पहले भी विश्व बैंक के सहयोग से बीहड़ विकास परियोजना प्रस्तावित थी, लेकिन कुछ कारणों से विश्व बैंक उस पर राजी नहीं हुआ। अब नए सिरे से इसकी शुरूआत की गई है। इस परियोजना में खेती के साथ-साथ कृषि बाजारों, गोदामों व कोल्ड स्टोरेज का विकास भी होगा।

तोमर ने कहा कि क्षेत्र में चंबल नदी के किनारे काफी जमीन है जहां कभी खेती नहीं हुई। इसलिए यह क्षेत्र जैविक रकबे में जुड़ेगा जो बड़ी उपलब्धि होगी। जो चंबल एक्सप्रेस बनेगा, यहीं से गुजरेगा। प्रारंभिक रिपोर्ट बनाए जाने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक की जाएगी और आगे की बातें तय होंगी। मध्य प्रदेश में देश का सबसे ज्यादा आर्गेनिक क्षेत्रफल है, जिसे प्रमोट करने की जरूरत है। ताकि आर्गेनिक फार्मिंग और आगे बढ़ सके। प्रोजेक्ट को मिशन मोड में लेकर अत्याधुनिक तकनीक के साथ काम करेंगे।

विश्व बैंक के अधिकारी आदर्श कुमार ने कहा कि विश्व बैंक मध्य प्रदेश में काम करने का इच्छुक है। परियोजना से जुड़े जिलों में किस तरह से, कौन-सा निवेश हो सकता है, देखना होगा। विश्व बैंक के ही अधिकारी एबल लुफाफा ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर भूमि इत्यादि की जो स्थितियां है, उन्हें समझते हुए प्रोजेक्ट पर विचार किया जाएगा। हम अन्य देशों का उदाहरण लेकर काम कर सकते हैं।

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