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टेक्सटाइल क्षेत्र में ‘ब्रांड इंडिया’ बनेगा नंबर-1: साकार हो रहा पीएम मोदी का 5F का मंत्र

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टेक्सटाइल इंडस्ट्री को रफ्तार देने के लिए मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, इसके बाद देश में जल्द ही 7 मेगा टेक्सटाइल पार्क खुल सकेंगे। मोदी सरकार इस योजना पर 4445 करोड़ रूपये खर्च करेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कपड़ा उद्योग में जान फूंकने के लिए सरकार ने ये बड़ा कदम उठाया है। सरकार की कोशिश है कि देश में हर सेक्टर में कारोबार जल्द से जल्द पटरी पर लौटे, ताकि देश की इकोनॉमी को कोरोना के असर से बाहर निकालने की सरकार की कोशिशों में तेजी लाई जा सके।

MITRA स्कीम से टेक्सटाइल क्षेत्र में क्रांति 

इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कपड़ा उद्योग के लिए MITRA स्कीम को मंजूरी दे दी। इसके तहत 7 मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (PM MITRA) पार्क स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। मोदी सरकार के इस फैसले से महज कपड़ा उद्योग को ही लाभ नहीं होगा बल्कि रोजगार के क्षेत्र में भी बड़ी कामयाबी मिलेगी। मोदी सरकार के इस कदम से सात लाख लोगों को प्रत्यक्ष और 14 लाख को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

साकार हो रहा पीएम मोदी का 5F का मंत्र

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए 5F का मंत्र दिया था। PM MITRA प्रधानमंत्री के 5F विजन से प्रेरित है। इस ‘5F’ विजन में फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन, फैशन टू फॉरेन का फॉर्मूला शामिल है।  पीएम मोदी के इस विजन से कपड़ा क्षेत्र के विकास में और तेजी आएगी। पीएम मोदी के इसी विजन को ध्यान में रख कर इन मेगा टेक्सटाइल पार्क का देश में निर्माण किया जा रहा है। इन पार्कों में कपड़े तैयार करने से लेकर उनकी मार्केटिंग, डिजाइनिंग और एक्सपोर्ट सभी एक ही जगह ही हो सकेंगे। भारत दुनिया में भारत कपड़ों का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है।

टेक्सटाइल क्षेत्र में ‘ब्रांड इंडिया’ बनेगा नंबर-1

जानकारों का भी मानना है कि भारत में सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से देश में टेक्सटाइल उद्योग में तेजी लाई जा सकती है। इससे ‘ब्रांड इंडिया’ का निर्माण करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य को पूरा करने के लिए भी पांच प्रमुख क्षेत्रों में सावधानीपूर्वक रणनीति बनाने की आवश्यकता होगी। इनमें परिधान, कपड़े, घरेलू वस्त्र, कृत्रिम फाइबर एवं धागे और टेक्निकल टेक्सटाइल क्षेत्र शामिल हैं।

मोदी सरकार ने कपड़ा क्षेत्र के लिए PLI का भी किया है एलान

कुछ दिनों पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने टेक्सटाइल सेक्टर के विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) स्कीम का एलान किया था। इसके तहत के तहत 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की मंजूरी दी है। इस सेक्टर को 5 वर्षों में 10,683 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। मोदी सरकार के इस एलान से

  • प्रत्यक्ष तौर पर 7.5 लाख से ज़्यादा लोगों के लिए रोज़गार के अवसर
  • भारत अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में अपना वर्चस्व और दिखा पाएगा
  • वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बन सकेगा टेक्सटाइल सेक्टर

मोदी सरकार की इस योजना से वैश्विक निवेश आकर्षित होने, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होने और निर्यात में इजाफा होने की उम्मीद है।

  • अगले पांच वर्षों में 100 अरब डॉलर के कपड़ा निर्यात का लक्ष्य
  • टारगेट हासिल करने के लिए तेजी से पूरी की जा रही विकास योजनाएं
  • कपड़ा क्षेत्र को बढ़ावा देने की हर कोशिश कर रही मोदी सरकार

रोजगार की दृष्टि से अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र

भारत में कपड़ा उद्योग एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें बड़ी संख्या में समान रूप से स्त्री-पुरुष कार्यरत हैं। उल्लेखनीय है कि भारत में सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्योगों में टेक्सटाइल उद्योग का दूसरा स्थान है। निर्यात से होने वाली आय में 13 प्रतिशत सहभागिता रखते हुए, संपूर्ण जीडीपी में इसका योगदान 5 प्रतिशत है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2015-16 में 5 करोड़ लोग प्रत्यक्ष रूप से तथा 68 करोड़ लोग अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़े हुए थे। यहां इस बात का भी बहुत महत्त्व है कि कम पूंजी निवेश, मूल्य वृद्धि के उच्च अनुपात तथा देश के लिए निर्यात और विदेशी मुद्रा आय के सशक्त साधन के रूप में कपड़ा एवं हस्तशिल्प का क्षेत्र अपार संभावनाशील है।

बनारसी साड़ियों को मिले अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व

मोदी सरकार अपनी योजनाओं द्वारा इस क्षेत्र के विकास के प्रति आरंभ से ही कटिबद्ध रही है। प्रधानमंत्री पद संभालने के कुछ ही समय बात नरेन्द्र मोदी ने बनारसी साड़ियों के लिए प्रख्यात वाराणसी के लालपुर में व्यापार सुविधा केंद्र एवं शिल्प संग्रहालय की आधारशिला रखी। अपनी अतुलनीय सुंदरता, रंगों एवं बनावट के लिए पहचानी जाने वाली बनारसी साड़ियां देश का गौरव हैं। इसके महत्त्व को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना ही इस केंद्र की स्थापना का उद्देश्य था। यह प्रयास मोदी सरकार ही था, अन्यथा पूरवर्ती सरकार के पास तो इस केंद्र को बनाने के लिए देने लायक जमीन भी नहीं थी, जिसके चलते इसे शहर के बीच बनाए जाने की बजाय शहर से दूर बनाना पड़ा। सरकारी उपेक्षा का शिकार रहा यह उद्योग भयानक बदहाली झेल रहा था। मोदी सरकार के प्रयासों से इस उद्योग और इसके बुनकरों को बड़ी राहत मिली।

मोदी सरकार के प्रयासों से बदली दशा-दिशा

बनारसी साड़ी बनाने के अतिरिक्त यहां और भी कई लघु एवं कुटीर उद्योग थे, जिन्हें सरकारी सहायता की घोर आवश्यकता थी। मोदी सरकार ने इन सभी के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए 347 करोड़ की लागत वाली परियोजनाओं की शुरुआत की। प्रधानमंत्री की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ जैसी योजनाओं का मूल भी ऐसे ही वर्गों का विकास है। यहां के हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योग को तकनीकी व विपणन संबंधी सहयोग प्रदान करने के लिए यहां 305 करोड़ की लागत से टेक्सटाइल फैसिलिटेशन की शुरुआत हुई। बुनकरों की विशेष सुविधा के लिए कॉमन फैसिलिटेशन सेंटर खोले गए। वाराणसी में 6 करोड़ रुपये की लागत वाला नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की शाखा स्थापित हुई। रीजनल सिल्क टेक्नोलॉजिकल रिसर्च स्टेशन भी शुरू हुआ। इन सभी के साथ-साथ 31 करोड़ की लागत वाली हस्तशिल्प उद्योग सर्वांगीण विकास योजना आरंभ की गई।

प्रधानमंत्री के आह्वान से और बढ़ा खादी का गौरव

भारतीय खादी व हस्तशिल्प की दिशा में किए गए प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से शायद ही कोई देशवासी होगा, जो परिचित न हो। रेडियो पर ‘मन की बात’ से लेकर अपनी अनेक योजनाओं तक प्रधानमंत्री ने इस उद्योग के उत्थान के लिए अनेक प्रयास किए। उन्होंने सभी देशवासियों को भी इस के लिए प्रेरित किया कि वे अपने निजी जीवन में खादी को और अन्य हस्तशिल्प की वस्तुओं को अवश्य स्थान दें, चाहे वह कितने भी छोटे से छोटे रूप में क्यों न हो। दूसरों को उपहार आदि देते समय भी वे इसी प्रकार की वस्तुओं का उपयोग कर सकते हैं।

दोतरफा नीतियों का चौतरफा लाभ

यह स्थिति भी संतोषजनक है कि भारतीय खादी और हस्तशिल्प के प्रति विदेशों में भी रुझान देखने को मिलता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस विषय में दोतरफा नीति अपनाई। एक ओर तो उन्होंने वस्त्र उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे माल के उत्पादन के लिए किसानों को प्रेरित किया, ताकि उन्हें बड़ा लाभ मिल सके। दूसरी ओर उन्होंने इस उद्योग से जुड़े लोगों को नई से नई तकनीक और व्यवसायगत प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए भी प्रेरित किया। इस संबंध में उन्होंने समय-समय पर राज्य सरकारों से भी संपर्क बनाए रखा और उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। कभी स्वतंत्रता संग्राम में देश का गौरव बढ़ाने वाली खादी को आज अपना अस्तित्व बचाने के लिए देश से सहयोग की अपेक्षा है, जिसे सशक्त स्वर दिया प्रधानमंत्री मोदी ने।

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